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LIVE: शिया वक्‍फ बोर्ड की सुप्रीम कोर्ट से अपील, 'सारी जमीन हिंदुओं को दे दी जाए'

अयोध्या मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ में 16वें दिन की सुनवाई में शुक्रवार को पूरी हुई.

LIVE: शिया वक्‍फ बोर्ड की सुप्रीम कोर्ट से अपील, 'सारी जमीन हिंदुओं को दे दी जाए'

नई दिल्‍ली: अयोध्या मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ में 16वें दिन की सुनवाई में शुक्रवार को पूरी हुई. इस दौरान शिया वक्फ बोर्ड ने कहा कि इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक तिहाई हिस्सा मुस्लिम को दिया था, न कि सुन्नी वक्फ बोर्ड को. हमारा वहां दावा बनता है और हम उसे हिंदुओं को देना चाहते हैं. ये ओरिजिनली हमारा है और वह हिस्सा हम हिंदुओं को देना चाहते हैं.

इससे पहले रामजन्मभूमि पुनरुद्धार समिति की ओर से वरिष्ठ वकील पीएन मिश्रा ने अपनी बहस शुरू करते हुए नमाज पढ़ने के तरीक़ों के बारे में बताया. वकील पीएन मिश्रा ने हदीस का हवाला देते हुए कहा कि इसमें लिखा है कि पैगम्बर मोहम्मद ने कहा है कि घंटी बजाकर नमाज नही पढ़ी जा सकती क्योंकि यह शैतान का इंस्‍ट्रूमेंट है. घंटी बजाने से फरिश्ते उस घर या जगह पर नहीं आते हैं. इसी तरह बिना घंटी बजाए मंदिर में पूजा नहीं की जा सकती है.

पीएन मिश्रा ने बताया कि इब्न-ए-बतूता ने अपनी भारत यात्रा पर कहा कि वह यह देख कर हैरान रह गया कि सभी मस्जिदों में घंटी बजाई जा रही थी, घंटी बजा कर पूजा की जा रही थी. उन्‍होंने हदीस के सहीह अल बुखारी का हवाला देते हुए कहा कि पैगम्बर मोहम्मद ने कहा है कि हिन्दू और मुस्लिमों के दो अलग-अलग कबीले एक साथ एक ही जमीन पर नहीं रह सकते.

जस्टिस एस ए बोबडे ने पूछा कि क्या विवादित स्थल से कोई घंटी मिली थी? पीएन मिश्रा ने कहा कि हां वहां से घंटी मिलने के सबूत है और मौखिक सबूत भी हैं. पीएन मिश्रा ने कहा कि पैगंबर मोहम्मद ने कहा था कि कब्र की तरफ चेहरा करके नमाज नहीं पढ़ी जा सकती, लेकिन बाबरी के आस पास कई कब्र थी. शाहजहां से एक इस्लामिक स्‍कॉलर अब्दुल हकीम ने कहा था कि मस्जिद अगर मंदिर को गिराकर बनाई जाती है तो वह मस्जिद नहीं होती है.

जस्टिस डी वाई चंद्रचूड़ ने कहा कि मस्जिद कैसी होनी चाहिए, मस्जिद में नमाज पढ़ने का क्या तरीका है? आप अपनी जिरह के अहम बिंदुओं को हमको बताइए. पीएन मिश्रा ने कोर्ट से कहा कि वक्‍फ ज़मीन का मालिक होना चहिए. वक्‍फ के द्वारा ही ज़मीन को दान किया जाता है. मस्जिद में कम से कम 2 समय नमाज पढ़ी जाए. वहां पर वज़ू का इंतजाम होना चाहिए.  मस्जिद में किसी भी जानवर, जीवित की तस्वीर या पेंटिंग न हो. मस्जिद में घंटी नहीं होनी चहिये. एक प्लाट में मस्जिद और मंदिर नहीं होनी चाहिए. मस्जिद में निवास नहीं होना चाहिए. मस्जिद में रसोई नहीं होना चाहिए. मस्जिद किसी दूसरे की ज़मीन पर नहीं बनाई जा सकती. मस्जिद के आस-पास कब्र नहीं होना चाहिए. मस्जिद दूसरे धर्मों के लोगो के संरक्षण में नहीं होनी चाहिए.

वकील पीएन मिश्रा ने कहा कि संबंधित ज़मीन कभी मुसलमानों के कब्जे में नहीं रही. वह हमारे कब्जे में थी. मुसलमान शासक होने की वजह से जबरन वहां नमाज़ अदा करते थे, 1856 से पहले वहां कोई नमाज नहीं होती थी.

वकिल पीएन मिश्रा ने कहा कि जन्म की बात है तो भगवान विष्णु के सातवें अवतार भगवान राम तो उसी स्थान पर पहले प्रकट हुए थे. पीएन मिश्रा ने एक श्लोक पढ़ते हुए कहा "भए प्रकट कृपाला" प्रकट होने का मतलब है कि भगवान राम सूक्ष्म रूप से तो वहां सनातन समय से रहे हैं, बस रामनवमी की दोपहर भगवान राम प्रकट हुए.

रामजन्मभूमि पुनरूद्धार समिति के वकील मिश्रा ने कहा कि एडवर्स पजेशन की अवधारणा मुस्लिम कानून में नहीं है. खासकर मस्जिदों के मामले में तो बिल्कुल ही नहीं. इसमें मालिकाना हक होना चाहिए और कब्जा पूर्ण होना चाहिए, इस्लाम में किसी मंदिर के ऊपर मस्जिद बनाना इस्लाम में प्रतिबंधित है. उन्‍होंने कहा कि 1856 से पहले वहां कोई नमाज नहीं होती थी और 1934 से सिर्फ शुक्रवार की नमाज होती थी जोकि पुलिस के पहरे में होती थी. यह पुलिस रिकॉर्ड में दर्ज है. इसके साथ ही रामजन्मभूमि पुनरूद्धार समिति के वकील PN मिश्रा ने अपनी बहस पूरी की.

उसके बाद हिन्दू महासभा की तरफ से वकील हरिशंकर जैन ने बहस शुरू की.

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15वें दिन की सुनवाई में क्‍या हुआ?
इससे पहले गुरुवार को जस्टिस बोबडे ने पीएन मिश्रा से तीन बिंदु स्‍पष्‍ट करने को कहा था कि वहां पर एक ढांचा (स्‍ट्रक्‍चर) था इस बारे में कोई विवाद नहीं है? पर क्या वह स्ट्रक्चर मस्जिद है या नहीं, बहस यह है. वह ढांचा किसको समर्पित था? इसका जवाब देते हुए पीएन मिश्रा ने कहा था कि 1648 में शाहजहां का शासन था और औरंगजेब गुजरात का शासक था. इस पर मुस्लिम पक्ष के वकील राजीव धवन ने आपत्ति जताई थी. राजीव धवन ने कहा था कि अब तक 24 बार मिश्रा संदर्भ से बाहर जाकर किस्से कहानियां सुना चुके है.

अयोध्या केस: हिंदू पक्षकार ने कहा- दूसरे का धर्मस्थल गिरा कर नहीं बनाई जा सकती मस्जिद

इस पर जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा था कि ये अपने तथ्यों को रख रहे हैं, लेकिन उन्होंने मिश्रा से भी कहा था कि सिर्फ संदर्भ बताएं. पीएन मिश्रा ने कहा था कि सिर्फ कोर्ट मुझे गाइड कर सकता है मेरे साथी वकील नहीं. चीफ जस्टिस रंजन गोगोई ने कहा था कि आप स्वतंत्र हैं, अपने तथ्य रखने को, आप आपका पक्ष रखें.

पीएन मिश्रा मस्जिद ने दलील रखते हुए बताया कि कि इस्लाम में मस्जिद बनाने के क्या कानून हैं. एक मस्जिद उसी जगह पर बनी जा सकती है जब उसका मालिक मस्जिद बनने की इजाज़त दे, वक़्फ़ को दी गई जमीन मालिक की होनी चहिए. उन्‍होंने कहा कि कुरान में यह नहीं बताया गया कि इस तरह की ज़मीन पर मस्जिद बनाई जा सकती है. इस्लाम के अनुसार दूसरे के पूजास्‍थल को गिरा कर या ध्वस्त करके उस स्‍थान पर मस्जिद नहीं बनाई जा सकती.

उन्‍होंने कहा कि ऐसी ज़मीन जिस पर दो लोगों का कब्ज़ा हो और एक मस्जिद बनाने का विरोध करे तो उस जमीन पर भी मस्जिद नहीं बनाई जा सकती. किसी दूसरे धर्मस्‍थल को गिरा कर उसका सामान इस्तेमाल करके मस्जिद बनना सही नहीं है. मस्जिद अल्लाह की इबादत के लिए बनाई जाती है. मिश्रा ने कहा कि विवादित ढांचे को जुमे की नमाज के लिए 2-3 घंटे के किये ही खोला जाता था.

सन 1860 तक विवादित ढांचे में मुसलमानों के नमाज पढ़ने का कोई सबूत नहीं है. इस्लामिक कानून के अनुसार अगर कहीं मस्जिद में अजान होती है और दो वक्‍त की नमाज नहीं होती है तो वह मस्जिद नहीं रह जाती.

जस्टिस बोबडे ने पूछा कि क्या कोई राजा राज्य की संपत्ति से वक्फ बना सकता है या उसे पहले यह खरीदनी होगी? इस पर वकील मिश्रा ने तारीख-ए-फिरोज शाही का हवाला देते हुए कहा कि विजित संपत्ति से विजेता एक पारिश्रमिक के रूप में 1/10 का मालिक है और अपने पारिश्रमिक में से वह एक वक्फ बना सकता है.