close

खास खबरें सिर्फ आपके लिए...हम खासतौर से आपके लिए कुछ चुनिंदा खबरें लाए हैं. इन्हें सीधे अपने मेलबाक्स में प्राप्त करें.

अयोध्‍या केस LIVE: 'खुदाई में मिली कमल की आकृति...वह संरचना मंदिर ही थी'

मुस्लिम पक्ष की बहस का जवाब देते हुए रामलला विराजमान की तरफ से वरिष्ठ वकील सी एस वैद्यनाथन ने ASI की रिपोर्ट पर दलीलें दीं.

अयोध्‍या केस LIVE: 'खुदाई में मिली कमल की आकृति...वह संरचना मंदिर ही थी'

नई दिल्‍ली: अयोध्या मामले (Ayodhya Case) को लेकर सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) में 36वें दिन की सुनवाई में हिन्‍दू पक्षों को आज अपनी जिरह पूरी करनी है. इस पृष्‍ठभूमि में मुस्लिम पक्ष की बहस का जवाब देते हुए रामलला विराजमान की तरफ से वरिष्ठ वकील सी एस वैद्यनाथन ने ASI की रिपोर्ट पर दलीलें दीं. उन्‍होंने तस्वीरों के जरिये यह बताया कि विवादित ढांचे के नीचे पिलर था. विवादित ढांचे के नीचे एक संरचना मौजूद थी. वकील वैद्यनाथन ने अलग-अलग सबूतों के जरिये यह बताया कि केंद्रीय गुम्बद (सेंट्रल डॉम) ही भगवान राम का जन्मस्थान है.

जस्टिस चन्दचूड़ ने पूछा कि ये कैसे साबित होगा कि ढांचे के नीचे जो खंभों के आधार मिले थे, वो एक ही समय के हैं? रामलला के वकील वैद्यनाथन ने कहा कि ASI रिपोर्ट में इसका जिक्र है कि 46 खम्भे एक ही समय के हैं. उन्होंने कहा कि पहले मुस्लिम पक्ष खाली जगह पर मस्जिद निर्माण की बात कह रहा था. अब वो ईदगाह पर मस्जिद निर्माण की बात कह रहे है.

खुदाई में मिली कमल की आकृति, सर्कुलर श्राइन, परनाला सब वहां मन्दिर को मौजूदगी को साबित करते है और ये सब संरचना उत्तर भारतीय मंदिरों की खासियत है. वैद्यनाथन ने अपनी जिरह पूरी की. उसके बाद मुख्य याचिकाकर्ता गोपाल सिंह विशारद की ओर से वरिष्ठ वकील रंजीत कुमार ने जिरह की. चीफ जस्टिस रंजन गोगोई ने एक बार फिर साफ कहा कि हिन्दू पक्ष को आज शाम चार बजे तक ही सुनेंगे. इसके बाद सुन्नी वक्फ बोर्ड के वकील राजीव धवन को सुनेंगे.

जस्टिस चन्दचूड़ ने रामलला के वकील से पूछा कि आस्था और विश्वास अपने आप में एकदम अलग तर्क है, अलग बहस का विषय है. लेकिन हम यहां पुख्ता सबूतों की बात कर रहे हैं जिनसे मन्दिर की मौजूदगी साबित हो सके. जस्टिस चन्दचूड़ ने फिर पूछा कि आपने जिन सरंचनाओं का जिक्र किया है, वो बौद्ध विहार में भी तो हो सकती है. आप कैसे ये साबित करेंगे कि वो बौद्ध विहार न होकर मन्दिर ही होगा. वैद्यनाथन ने कहा कि ये जगह हमेशा हिंदुओं के लिए पवित्र रही है.बौद्धधर्मियों के लिए ये कभी अहम नहीं रही है और ये साबित करता है कि मन्दिर ही था.

गोपाल सिंह विशारद के वकील रंजीत कुमार को जवाब देने के लिए बमुश्किल 5 मिनट का समय ही मिला. लंच के बाद रामलला के वकील नरसिम्हन को 10 मिनट का समय मिला.

20 मिनट के अंदर 2 हिन्दू पक्षकारों की दलील समेटने के बाद जब चीफ जस्टिस रंजन गोगोई ने निर्मोही अखाड़े के वकील से कहा कि आपके पास डेढ़ घंटे का समय है तो अखाड़े के वकील सुशील जैन ने कहा कि सुनवाई 20-20 मैच की तरह चल रही है. इस पर चीफ जस्टिस ने नाराजगी जताते हुए कहा कि आप कैसी बात कर रहे हैं.

दरअसल निर्मोही अखाड़े के वकील द्वारा सुनवाई की तुलना 20-20 मैच से करने पर चीफ जस्टिस ने नाराजगी जताते हुए कहा कि आप कैसी बात कर रहे हैं. हमने आपको 4-5 दिन विस्तार से सुना है फिर भी आप इस तरह की बात कर रहे हैं. सुशील जैन ने अपने बयान के लिए खेद जताया. हिन्दू पक्षकार गोपाल सिंह विशारद के वकील रंजीत कुमार को बमुश्किल 5 मिनट का समय ही मिला था जवाब देने के लिए. रामलला के वकील नरसिम्हन को 15 मिनट का समय मिला था...

रामललला विराजमान के वकील पी नरसिम्हा ने स्कंद पुराण का हवाला देते हुए कहा कि स्कंद पुराण में भी श्रीरामजन्म स्थान का जिक्र है और हिंदुओ का ये विश्वास रहा है कि यहां दर्शन से मोक्ष की प्राप्ति होती है. पुरातत्व विभाग के सबूत भी हमारे विश्वास की ही पुष्टि करते है. इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने सुशील जैन से पूछा कि उनको अपनी दलील पूरी करने में कितना समय लगेगा? जैन ने कहा कि मैं कोर्ट का एक मिनट भी बर्बाद नही करूंगा. जल्द से जल्द अपनी बात रखूंगा. निर्मोही अखाड़ा के वकील ने कहा कि वी आर वेरी पुअर पार्टी इन दिस केस. मैं जानता हूं कि आपके पास फैसला लिखने का समय नहीं लेकिन मेरी बात सुने बिना आपका फैसला अधूरा रहेगा, क्योंकि मेरा पूरा केस कब्ज़े पर आधारित है.

35वें दिन की सुनवाई
इससे पहले एक अक्‍टूबर को 35वें दिन की सुनवाई में हिन्दू पक्ष के वकील परासरन ने भगवत गीता के कुछ श्लोक को पढ़ा था और एक न्यायिक व्यक्ति के रूप में माने जाने वाले स्थान पर जोर दिया. खुदाई में मिली कमल की आकृति, सर्कुलर श्राइन, परनाला की उपस्थिति ये साबित करता है कि वह संरचना मंदिर ही थी क्योंकि यह उत्तर भारतीय मंदिरों की विशेषताएं हैं.

'यदि विश्वास है कि किसी जगह पर दिव्‍य शक्ति है, इसको न्यायिक व्यक्ति माना जा सकता है'

परासरन ने कहा था कि अगर लोगों का विश्वास है कि किसी जगह पर दिव्‍य शक्ति है तो इसको न्यायिक व्यक्ति माना जा सकता है, जिसका दिव्य अभिव्यक्ति से कोई अंतर न हो. परासरन ने कुड्डालोर मंदिर का उदाहरण देते हुए कहा था कि कुड्डालोर मंदिर में भी कोई मूर्ति नहीं है और केवल एक दीया जलता है, जिसकी पूजा की जाती है. राजीव धवन ने परासरन की दलील पर टोकते हुए कहा था कि इनके सभी उदाहरण में मंदिर था, यह एक मंदिर के रूप में बताया गया है.

LIVE TV

लोगों के विश्वास के साथ पूजा स्थल को मंदिर कहा जा सकता है, मंदिर पूजा स्थान के लिए इस्तेमाल किया जाने वाला एक सामान्य शब्द है. राजीव धवन ने कहा था कि सिर्फ कुछ यात्रियों के आधार पर यह नहीं कहा जा सकता है कि वहां पर मंदिर था. हिंदुओं ने वहां पर पूजा इस स्थान से शुरू की.जस्टिस भूषण ने पूछा था कि क्या एक या दो न्यायिक व्यक्ति होंगे, भूमि और राम? परासरन ने कहा था कि वहां पर दो से ज़्यादा न्यायिक व्यक्ति होंगे. जस्टिस बोबडे ने कहा था कि इनमें से कुछ प्रमुख देवता होते हैं और अन्य भी होते हैं.परासरन ने कहा था कि मंदिर में एक प्रमुख देवता होता है और अनेक रूपों में हम उस देवता की पूजा करते हैं. हम न्यायालय को न्याय का मंदिर कहते हैं. हमारे पास कई न्यायाधीश हैं, लेकिन हम पूरे को एक संस्था न्यायालय कहते हैं.

अयोध्‍या केस: 'मैं समझता हूं कि कोर्ट पर मामला जल्द से जल्द समय पर खत्म करने का दबाव है'

जस्टिस डीवाई चन्द्रचूड़ ने कहा था कि हालांकि कई देवता हो सकते हैं लेकिन न्यायाधिकारी व्यक्तित्व का श्रेय मंदिर के प्रमुख देवता को जाता है. राजीव धवन ने कहा था कि कोर्ट एक नई बहस की तरफ जा रहा है, यह मंदिर के नामकरण के बारे में नहीं है, मैं इस मामले में कोर्ट को एक लिखित नोट दूंगा.रामलला विराजमान के वकील के परासरन ने कहा था कि रामनवमी को भगवान राम का जन्मदिन के तौर पर मनाया जाता है लेकिन यह भगवान राम के जन्मस्थान पर नहीं मनाया जाता. इसलिए जन्मभूमि पर मन्दिर बनाकर भगवान राम के जन्मस्थान पर ही रामनवमी को मनाना चाहिए.हिन्दू पक्ष के वकील सीएस वैद्यनाथन ने कहा था कि जब एक बार साबित हो गया कि उस जगह पर (विवादित जमीन) भगवान राम का जन्म हुआ था तो वहां पर किसी भी मूर्ति की ज़रूरत नहीं है.