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अयोध्या मामले पर चीफ जस्टिस बोले, 'हम इस केस को भूल चुके, आप भी भूल जाइए'

राम मंदिर मामले (Ayodhya Case) में सुन्नी वक्फ बोर्ड ने पिछले दिनों सुप्रीम कोर्ट से विवादित जमीन पर दावा वापस लेने की बात कही. इसके बाद बाकी पक्षकार समझौते को लेकर तैयार नहीं हुए.

अयोध्या मामले पर चीफ जस्टिस बोले, 'हम इस केस को भूल चुके, आप भी भूल जाइए'

नई दिल्ली : अयोध्या केस (Ayodhya Case) में एक वकील ने मोल्डिंग ऑफ रिलीफ पर अपना दो पेज का नोट दायर करने की अनुमति मांगी. इस पर चीफ जस्टिस ने पूछा 'क्या अयोध्या मामला अभी भी चल रहा है? नहीं, अदालत ने कहा, इस मामले में फैसला सुरक्षित किया जा चुका है. हम अब इस केस को भूल चुके हैं. आप भी भूल जाइए.'

इससे पहले 70 साल पुराने इस मामले में 21 अक्टूबर (सोमवार) को मुस्लिम पक्षकारों के वकील ने मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई को सूचना दी कि उन्होंने मोल्डिंग ऑफ रिलीफ सीलबंद लिफाफे में फाइल कर दी और सभी पक्षों को भी दे दिया गया है. मुस्लिम पक्षकारों के वकील एजाज मकबूल ने कहा कि कई पार्टियों ने सीलबंद पर ऐतराज जताया था. इसलिये हमने सभी पार्टी को सर्व कर दिया है.

कोर्ट ने कहा कि आप इसे रिकॉर्ड पर ला सकते है. मुस्लिम पक्ष ने लिखित जवाब में सब कुछ कोर्ट पर छोड़ते हुए ये उम्मीद जताई है कि अदालत इस देश की विविध धर्मों/ संस्कृतियो को समेटे हुए विरासत को ध्यान में रखते हुए फैसला दे. ये भी ध्यान रहे कि आने वाली पीढि़यां इस फैसले को कैसे देखेंगी. सीलबंद लिफाफे में नोट देने पर हिन्दू पक्ष के विरोध के बाद मुस्लिम पक्ष ने मोल्डिंग ऑफ रिलीफ़ से जुड़ा नोट सार्वजनिक किया.

मुस्लिम पक्ष ने मोल्डिंग ऑफ रिलीफ के नोट को सार्वजनिक किया और कहा कि सुप्रीम कोर्ट खुद तय करे कि किसे क्या राहत देनी है. कोर्ट को ऐसा करते समय संवैधानिक मूल्यों का ध्यान रखना चाहिए. देश की राजनीति और भविष्य पर होने वाले असर को देखते हुए फैसला देना चाहिए.

क्‍या है मोल्डिंग ऑफ रिलीफ?
मोल्डिंग ऑफ रिलीफ़ का मतलब होता है कोर्ट से यह कहना कि अगर हमारे पहले वाले दावे को नहीं माना जा सकता तो नए दावे पर विचार किया जाए. गौरतलब है कि कोर्ट ने अयोध्या मामले में फैसला सुरक्षित रखते समय सभी पक्षकारों को मोल्डिंग ऑफ रिलीफ़ को लेकर तीन दिन में लिखित नोट जमा करने को कहा था.