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अयोध्या मामला: CJI रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पीठ में कल होगी सुनवाई

चीफ जस्टिस रंजन गोगोई, जस्टिस एस ए बोबडे, जस्टिस एन वी रमन्ना, जस्टिस यूयू ललित और जस्टिस डी वाई चंद्रचूड़ की संविधान पीठ मंगलवार को सुबह 10:30 बजे मामले की सुनवाई शुरू करेगी. 

अयोध्या मामला: CJI रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पीठ में कल होगी सुनवाई

नई दिल्ली: अयोध्या मामले में सुप्रीम कोर्ट की पांच जजों की संविधान पीठ गुरुवार को सुनवाई करेगी. चीफ जस्टिस रंजन गोगोई, जस्टिस एस ए बोबडे, जस्टिस एन वी रमन्ना, जस्टिस यूयू ललित और जस्टिस डी वाई चंद्रचूड़ की संविधान पीठ मंगलवार को सुबह 10:30 बजे मामले की सुनवाई शुरू करेगी. सुनवाई के लिहाज से यह बेंच अहम मानी जा रही है, क्योंकि चीफ जस्टिस रंजन गोगोई के अलावा चार अन्य जज भविष्य के होने वाले चीफ जस्टिस होंगे. 

ऐसे में देखना बेहद अहम होगा कि 10 जनवरी को होने वाली सुनवाई में जल्द और रोजाना सुनवाई को लेकर सुप्रीम कोर्ट का क्या रूख रहता है. इससे पहले तत्कालीन चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा के साथ जस्टिस अशोक भूषण और जस्टिस अब्दुल नज़ीर की तीन जजों की बेंच मामले को सुन रही थी. 

इससे पहले सुप्रीम कोर्ट से मुस्लिम पक्षों को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा था. कोर्ट ने 1994 के इस्माइल फारुकी के फैसले में पुनर्विचार के लिए मामले को संविधान पीठ भेजने से इनकार कर दिया था. मुस्लिम पक्षों ने नमाज के लिए मस्जिद को इस्लाम का जरूरी हिस्सा न बताने वाले इस्माइल फारुकी के फैसले पर पुनर्विचार की मांग की थी.

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गौरतलब है कि राम मंदिर के लिए होने वाले आंदोलन के दौरान 6 दिसंबर 1992 को अयोध्या में बाबरी मस्जिद को गिरा दिया गया था. इस मामले में आपराधिक केस के साथ-साथ दीवानी मुकदमा भी चला था. टाइटल विवाद से संबंधित मामला सुप्रीम कोर्ट में पेंडिंग है.

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने 30 सितंबर 2010 को अयोध्या टाइटल विवाद में फैसला दिया था. फैसले में कहा गया था कि विवादित लैंड को 3 बराबर हिस्सों में बांटा जाए. जिस जगह रामलला की मूर्ति है उसे रामलला विराजमान को दिया जाए. सीता रसोई और राम चबूतरा निर्मोही अखाड़े को दिया जाए जबकि बाकी का एक तिहाई लैंड सुन्नी वक्फ बोर्ड को दी जाए. इसके बाद ये मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा था. अयोध्या की विवादित जमीन पर रामलला विराजमान और हिंदू महासभा ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी. 

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वहीं, दूसरी तरफ सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड ने भी सुप्रीम कोर्ट में हाई कोर्ट के फैसले के खिलाफ अर्जी दाखिल कर दी थी. इसके बाद इस मामले में कई और पक्षकारों ने याचिकाएं लगाई थी. सुप्रीम कोर्ट ने 9 मई 2011 को इस मामले में इलाहाबाद हाई कोर्ट के आदेश पर रोक लगाते हुए मामले की सुनवाई करने की बात कही थी. कोर्ट ने यथास्थिति बनाए रखने के आदेश दिए थे. उसके बाद से ही यह मामला सुप्रीम कोर्ट में लंबित है.