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अयोध्या केस: जानिए राम मंदिर को लेकर क्या रहे तीनों पक्षों के दावे

अयोध्या केस पर सुप्रीम कोर्ट के इतिहास में अब तक की दूसरी सबसे लंबी चली सुनवाई थी. सबसे लंबी सुनवाई का रिकॉर्ड 1973 के केशवानंद भारती केस का है, जिसमें 68 दिनों तक सुनवाई चली थी. वहीं इस मामले में 40 दिनों तक नियमित सुनवाई हुई. 

अयोध्या केस: जानिए राम मंदिर को लेकर क्या रहे तीनों पक्षों के दावे
फाइल फोटो

अयोध्या/नई दिल्लीअयोध्‍या केस (Ayodhya Case) को लेकर आज सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला आने वाला है. इस मामले पर सुप्रीम कोर्ट के इतिहास में अब तक की दूसरी सबसे लंबी चली सुनवाई थी. सबसे लंबी सुनवाई का रिकॉर्ड 1973 के केशवानंद भारती केस का है, जिसमें 68 दिनों तक सुनवाई चली थी.  वहीं इस मामले में 40 दिनों तक नियमित सुनवाई हुई. आपको बताते हैं कि इस केस को लेकर तीनों पक्षों, निर्मोही अखाड़ा, रामलला विराजमान और सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड ने क्या-क्या दलील रखी.

निर्मोही अखाड़ा: गर्भगृह में रामलला की पूजा निर्मोही अखाड़े ने शुरू की थी. पूजा स्थल की व्यवस्था निर्मोही अखाड़ा ही करता रहा है

रामलला विराजमान : अयोध्या में भगवान राम का बालरूप है, उसी की पूजा होती है. रामलला के सबसे करीबी मित्र कहे जाते हैं रामलला विराजमान

सुन्नी सेंट्रल वक़्फ़ बोर्ड: जहां मंदिर का दावा किया जाता है, वहां पर बाबरी मस्जिद थी.मुस्लिम वहां नमाज़ पढ़ते रहे हैं, इसलिये वहां फिर मस्जिद बने.

अयोध्या विवाद में मंदिर को लेकर हिंदू और मुस्लिम पक्षों की क्या है दलील

हिंदू: स्कंद पुराण में जन्मस्थान का ज़िक्र. ASI को मिला मंदिर का ढांचा. सदियों से लोग पूजा करते रहे हैं. ढांचे में कमल की आकृतियां मिलीं
मुस्लिम: 1949 में गुंबद के नीचे रखी मूर्ति. ढांचा मस्जिद का होना भी संभव. मूर्ति का प्रकट होना चमत्कार नहीं. कमल मुगल मेहराबों में भी होते हैं

यह भी पढ़ेंः LIVE BLOG:अयोध्या केस में सुप्रीम कोर्ट के फैसले की पल-पल की UPDATE

भगवान राम के जन्मस्थान को लेकर दोनों पक्षों की दलील

हिंदू: विवादित स्थल राम का जन्मस्थान. सदियों से भक्तों की अटूट आस्था    
मुस्लिम: जन्मस्थान को लेकर ही विवाद है. जन्मस्थान का कोई सबूत नहीं.

पूजा और नमाज़ को लेकर दोनों पक्षों की दलील

हिंदू: 1934 से नमाज़ नहीं पढ़ी गई जन्मस्थान पवित्र और पूज्य है 
मुस्लिम: 1934 के बाद भी नमाज़ पढ़ी गई.1934 में मस्जिद पर हमला हुआ. 

मालिकाना हक़ दोनों पक्षों की दलील

हिंदू: राम का जन्मस्थान स्वयं में देवता. सदियों से पूजा हो रही है.                                                            
मुस्लिम: ग़लत एक्ट को आधार न बताया जाए. हिंदू पक्ष के पास सबूत नहीं हैं

बाबर को लेकर दोनों पक्षों की दलील

हिंदू: बाबर कभी अयोध्या नहीं आया. बाबर ने कोई मस्जिद नहीं बनवाई.                                                      
मुस्लिम: बाबरनामा में अयोध्या जाने का ज़िक्र. बाबरनामा में बाबरी मस्जिद का जिक्र

अयोध्या ज़मीन विवाद का नंबर गेम
वर्ष 1528: राम मंदिर गिराकर बाबरी मस्जिद बनवाई गई
वर्ष 1950: परमहंस रामचंद्र दास ने अदालत में अर्जी दी
वर्ष 1984:  VHP ने राममंदिर के लिए अभियान शुरू किया
वर्ष 1989: राजीव गांधी ने मंदिर का ताला खुलवाया
वर्ष 2011: अयोध्या ज़मीन विवाद सुप्रीम कोर्ट पहुंचा
वर्ष 2017: सुप्रीम कोर्ट ने मध्यस्थता की पेशकश की
वर्ष 2019: 6 अगस्त से नियमित सुनवाई शुरू हुई
40 दिन: सुप्रीम कोर्ट में नियमित सुनवाई चली
9 नवंबर 2019: अयोध्या पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला