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अयोध्‍या केस: 'महाभारत काल में लिखे पुराण में रामजन्मभूमि के लिए हिंदू आस्था का जिक्र'

रामजन्मभूमि पुनरुद्धार समिति की तरफ से पीएन मिश्रा ने स्कंद पुराण का हवाला दिया और कहा कि महाभारत काल में लिखे पुराण में रामजन्मभूमि के लिए हिंदू आस्था का ज़िक्र है.

अयोध्‍या केस: 'महाभारत काल में लिखे पुराण में रामजन्मभूमि के लिए हिंदू आस्था का जिक्र'

नई दिल्‍ली: अयोध्या मामले में निर्मोही अखाड़ा की दलीलें पूरी होने के बाद रामजन्मभूमि पुनरुद्धार समिति की तरफ से पीएन मिश्रा पक्ष ने रखा. मंगलवार सुबह सबसे पहले निर्मोही अखाड़ा की ओर से वकील सुशील जैन ने पक्ष रखा. निर्मोही अखाड़ा ने शेबेट के दावे पर तैयार अपने नोटस को पढ़ा. निर्मोही अखाड़ा ने याचिका भगवान की तरफ से मन्दिर के रखरखाव (मैनेजमेंट) के लिए दाखिल की है. जैन ने कहा कि विवादित स्थल के अंदरूनी आंगन में एक मंदिर था वही जन्मभूमि का मंदिर है, वहां कभी कोई मस्जिद नहीं थी, मुसलमानों को मंदिर में जाने की इजाज़त नहीं थी, वहां पर हिन्दू अपनी आस्था के अनुसार पूजा करते थे. सुशील कुमार जैन ने कहा कि रेवन्यू रिकॉर्ड से साफ है कि ज़मीन पर निर्मोही अखाड़े के अधिकार है. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि आस्था प्रदर्शित करने के लिए स्कन्द पुराण का प्रयोग सद्भावपूर्वक होता है लेकिन स्कन्दापुराण के माध्यम से जन्म स्थान के अस्तित्व को बताना सही नहीं.

रामजन्मभूमि पुनरुद्धार समिति की तरफ से पीएन मिश्रा ने अपनी बहस शुरू करते हुए कहा कि मंदिर को शिफ्ट किया जा सकता है लेकिन राम जन्मभूमि को शिफ्ट नहीं किया जा सकता, जैसे मक्का और मदीना. हिंदुओं के लिए यह मायने नहीं रखता कि मंदिर बाबर ने गिराई या औरंगज़ेब ने गिराई, यह मुस्लिम पक्ष के लिए अहम है बाबर ने मस्जिद कैसे बनवाई थी? जन्मभूमि से 85 स्तंभ मिले थे जिसमें से 84 स्तंभ विक्रमादित्य ने स्थापित किए थे और एक गरुड़ स्‍तंभ था.

पीएन मिश्रा ने कहा कि हमारी आस्था और विश्‍वास है कि जन्मभूमि पर ही मस्जिद बनी है. हम लंबे अरसे से पूजा करते आ रहे हैं, सभी गजेटियर में उस जमीन को जन्मस्थान बताया गया है. पीएन मिश्रा ने कहा कि 1888 में एलेक्ज़ेंडर ने बुक लिखी उसमें बाबरी मस्जिद के बारे में डिस्क्रिप्शन था कि उसको मीर बाकी ने 1523 AD में बनवाया था, यह बाबर से बहुत पहले की बात है जबकि बाबर 1526 में आया था. हेनरी बेवरेज ने कहा कि 1528 में बाबर के कहने पर मीर बाकी ने बनवाया था, बाद में कहा गया कि 1560 में अब्दुल बाकी इस्फ़हानी ने मस्जिद बनवाई .1965 में ASI की रिपोर्ट में कहा गया कि हेनरी बेवरेज और सभी का विवरण ग़लत था 1934 में अब्दुल हसन गया और उसने डिस्क्रिप्शन में कुछ शब्द जोड़ दिया था. पीएन मिश्रा ने कहा कि बाबरनामा में मीर बाकी नाम का कोई व्यक्ति नहीं है, मीर शब्द रॉयल लोगों के लिए इस्तेमाल किया जाता था, बाबरनामा में बाकी बेग, बाकी तरखान, बाकी फहानी, बाकी ताशकन्दी जैसे लोको का ज़िक्र है लेकिन मीरबाकी का ज़िक्र नहीं है.

इससे पहले सोमवार को 12वें दिन की सुनवाई में निर्मोही अखाड़ा की ओर से पेश वरिष्ठ वकील सुशील जैन ने कहा था कि हम देवस्थान का प्रबंधन करते हैं और पूजा का अधिकार चाहते हैं और जन्मस्थान का पजेशन न तो देवता के नेक्स्ट फ्रेंड को दिया जा सकता है न ही पुजारी को. यह केवल जन्मस्थान के कर्ता-धर्ता को दिया जा सकता है और निर्मोही अखाड़ा जन्मस्थान का देखरेख करता है. कोर्ट ने कहा था कि आप दो मुद्दों पर बहस कीजिए पहला पूजा कैसे होगी यानी उसका नेचर क्या होगा और दूसरा कि आप बाहर या भीतर कहां पूजा करना चाहते हैं?

अयोध्‍या केस: 'हम देवस्थान का प्रबंधन करते हैं और पूजा का अधिकार चाहते हैं'

पिछले शुक्रवार को 11वें दिन की सुनवाई में पूरे दिन निर्मोही अखाड़ा के वकील सुशील जैन ने बहस की थी. उन्होंने निर्मोही को जन्मस्थान का शेबेट (देवता की सेवा करने वाला) बताया था.उन्होंने कहा था कि रामलला के नाम पर किसी और को याचिका करने का हक नहीं है और जगह हमारे हवाले की जाए.

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इससे पहले गुरुवार को याचिकाकर्ता गोपाल सिंह विशारद की ओर से पेश वरिष्ठ वकील रंजीत कुमार ने कहा था कि मैं श्री राम उपासक हूं और मुझे जन्मस्थान पर उपासना का अधिकार है. यह अधिकार मुझसे छीना नहीं जा सकता. उन्होंने 80 साल के अब्दुल गनी की गवाही का हवाला देते हुए कहा था कि बाबरी मस्जिद राम जन्मस्थान पर बनी है. ब्रिटिश राज में मस्जिद में सिर्फ जुमे की नमाज़ होती थी, हिन्दू भी वहां पर पूजा करने आते थे. रंजीत कुमार ने कहा था कि मस्जिद गिरने के बाद मुस्लिमों ने नमाज़ पढ़ना बंद कर दिया, लेकिन हिंदुओं ने जन्मस्थान पर पूजा जारी रखी.

अयोध्‍या केस: 'मैं श्रीराम उपासक हूं और मुझे जन्मस्थान पर उपासना का अधिकार है'

रामलला विराजमान
इससे पहले बुधवार को रामलला विराजमान के वकील सीएस वैद्यनाथन ने अपनी बहस पूरी कर ली थी. उन्होंने कहा था कि विवादित भूमि पर मंदिर रहा हो या न हो, मूर्ति हो या न हो, लोगों की आस्था होना काफी है, यह साबित करने के लिए कि वही रामजन्म स्थान है. वैद्यनाथन ने कहा था कि जब संपत्ति भगवान में निहित होती है तो कोई भी उस संपत्ति को ले नहीं सकता और उस संपत्ति से ईश्वर का हक नहीं छीना जा सकता. ऐसी संपत्ति पर एडवर्स पजेशन का कानून लागू नहीं होगा.

अयोध्या केस: 'ब्रिटिश राज में मस्जिद में सिर्फ जुमे की नमाज़ होती थी, हिंदू भी वहां पर पूजा करने आते थे'

रामलला के वकील ने कहा था कि मंदिर में विराजमान रामलला कानूनी तौर पर नाबालिग का दर्जा रखते हैं. नाबालिग की संपत्ति किसी को देने या बंटवारा करने का फैसला नहीं हो सकता. हज़ारों साल से लोग जन्मस्थान की पूजा कर रहे हैं. इस आस्था को सुप्रीम कोर्ट को मान्यता देना चाहिए. उन्होंने कहा था कि 1949 में विवादित इमारत में रामलला की मूर्ति पाए जाने के बाद 12 साल तक दूसरा पक्ष निष्क्रिय बैठा रहा. उन्हें कानूनन दावा करने का हक नहीं है. कोर्ट जन्मस्थान को लेकर हज़ारों साल से लगातार चली आ रही हिंदू आस्था को महत्व दे.