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'रामचरितमानस में भी भगवान राम के जन्मस्थान के बारे में सही जगह नहीं बताई गई'

राजीव धवन ने कहा कि प्राचीन काल में भारत में मंदिरों पर हमला किसी धर्म से नफरत की वजह से नहीं किया गया बल्कि संपत्ति लूटने के लिए किया गया.

'रामचरितमानस में भी भगवान राम के जन्मस्थान के बारे में सही जगह नहीं बताई गई'

नई दिल्‍ली: अयोध्या मामले में बुधवार को मुस्लिम पक्ष के वकील राजीव धवन ने कहा कि रामचरितमानस में भी भगवान राम के जन्मस्थान के बारे में सही जगह नहीं बताई गई है. बस यही कहा गया है कि भगवान राम अयोध्या में पैदा हुए थे. राजीव धवन ने कहा कि प्राचीन काल में भारत में मंदिरों पर हमला किसी धर्म से नफरत की वजह से नहीं किया गया बल्कि संपत्ति लूटने के लिए किया गया.

सुनवाई के दौरान सुन्नी वक़्फ़ बोर्ड के वकील राजीव धवन ने कई ऐतिहासिक किताबों का ज़िक्र किया. धवन ने कहा कि 1855 से हिन्दू और मुस्लिम दोनों विवादित जगह पर पूजा करते हैं. मुस्लिम अंदर नमाज पढ़ते थे और हिन्दू बाहर पूजा करते थे.

धवन ने कहा कि हिन्दू पक्ष की तरफ से कहा गया कि विलियम फिंच ने अयोध्या में विवादित जगह पर किसी मस्जिद के बारे में नही लिखा है लेकिन एक विदेशी यात्री विलियम फॉर्स्टर ने विवादित स्थल पर मस्जिद की बात कही है. धवन ने कहा कि यह भी साफ नहीं है कि मंदिर को बाबर ने तोड़ा या औरंगजेब ने तोड़ा. धवन ने एक गज़ेटियर का हवाला देते हुए कहा कि गज़ेटियर में भी चबूतरे में कोई जानकारी नहीं दी गई है.

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गर्भगृह से राम चबूतरे के बीच की दूरी कितनी है?

राजीव धवन ने कहा कि 1949 से पहले विवादित ढांचे के अंदर मूर्ति नहीं थी और अंदर पूजा भी नहीं होती थी, वहां पर पूजा के लिए कोई जगह नहीं थी, ना ही कोई वहां दर्शन के लिए जाता था, 84-85 में गर्भ गृह में बाहर से ही मूर्ति का दर्शन शुरू हुआ. जस्टिस डीवाई चन्द्रचूड़ ने पूछा कि मस्जिद के गर्भगृह से राम चबूतरे के बीच की दूरी कितनी है? राजीव धवन ने कहा कि उसकी दूरी 50 यार्ड है. जस्टिस बोबडे ने कहा कि उसकी दूरी 40 फीट है.

 राजीव धवन ने कहा कि लोग ज़मीन पर एक कमरे के लिए लड़ रहे है, 1885 में पूरी ज़मीन मुस्लिम को दी गई और बाहर पूजा के लिए हिन्दू को गई. जस्टिस डीवाई चन्द्रचूड़ के कहा कि 1855 से पहले यह मस्जिद के रूप में भी प्रयोग किया जाता था. 1856 के बाद रेलिंग को रखा गया था. जब रेलिंग बनाई गई उसी समय पर राम चबूतर रेलिंग के पास क्यों रखा गया शायद ऐसा इसलिए हुआ कि ताकि हिन्दू जब वहां पूजा करे तो उनको लगे कि वह गर्भगृह में पूजा कर रहे है ?

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धवन ने कहा कि यह कैसा अटकलबाजी है, 170 साल पुरानी बात है, मुझको नहीं मालूम कि वह रेलिंग के पास क्यों जाते थे, शायद इसलिए जाते थे ताकि पूरे ढांचे को कब्ज़े में ले सके. राजीव धवन ने कहा कि 19वीं सदी के गज़ेटियर और भारत आने वाले यात्रियों के अलावा और कोई सबूत नहीं है कि वहां पर सिर्फ जन्मस्थान था, धवन ने कहा कि जीलानी की दलील बिल्कुल सही है कि 1885 से पहले से यात्रियों का कोई महत्व नही है...

राजीव धवन ने कहा कि वह पूजा करने की बात करके पूरी ज़मीन मांग रहे है, लोग एक एक इंच के लिए लड़ रहे है, गवाहों ने जिससे उससे उसने किसी से सुना या बताया और उसको भी किसी और ने बताया पूरी गवाही एक झूठ के आधार पर चल रही है जो एक के बाद एक व्यक्ति से बार बार से बोली गई.

राजीव धवन ने हिन्दू पक्षकारों की गवाही पर सवाल उठाते हुए कहा कि जब गवाहों को विवादित जगह की 10 तस्वीर दिखाई गई तो उस जगह को नहीं पहचान पाए की तस्वीर कहां की है. राजीव धवन ने कहा कि जब गवाहों को तस्वीर दिख कर पूछा गया कि अल्लाह कहा लिखा है तो उन्होंने ने कहा कि उर्दू शब्द को नही पढ़ पाते हैं कि क्या लिखा हुआ है. धवन ने कहा कि जब स्ट्रक्‍चर में अल्लाह लिखा हो तो वह कैसे मंदिर हो सकता है, तस्वीर में कई जगह पर अल्लाह लिखा दिखा था.

इसके साथ ही अयोध्या मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट में 26वें दिन की सुनवाई पूरी हुई. आज मुस्लिम पक्ष की ओर से वकील राजीव धवन ने पक्ष रखा. कल भी मुस्लिम पक्ष की ओर से बहस जारी रहेगी.