अयोध्या फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती, 9 पुनर्विचार याचिकाएं दायर

ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (AIMPLB) के समर्थन से मिसबाहुद्दीन, हसबुल्ला, हाजी महबूब, रिजवान अहमद ने याचिका दायर की हैं. इन याचिकाओं पर खुली अदालत में सुनवाई हुई तो राजीव धवन पैरवी करेंगे. 

अयोध्या फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती, 9 पुनर्विचार याचिकाएं दायर
सुप्रीम कोर्ट में अयोध्या पर दिए गए फैसले पर पुनर्विचार याचिका दाखिल की गई है.

नई दिल्ली: अयोध्या (Ayodhya) राम जन्मभूमि विवाद मामले में शुक्रवार को मुस्लिम पक्ष की तरफ से कुल 8 पुनर्विचार याचिकाएं दाखिल की गई. महफूज उर रहमान, मिसबाहुद्दीन, उमर, रिजवान, हसबुल्ला, हाजी महबूब, असद, अयूब और पीस पार्टी ने पुनर्विचार याचिकाएं दाखिल किए हैं. इससे पहले एम सिद्दीक़ी की तरफ से याचिका दायर हुई हैं. ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (AIMPLB) के समर्थन से मिसबाहुद्दीन, हसबुल्ला, हाजी महबूब, रिजवान अहमद ने याचिका दायर की हैं. इन याचिकाओं पर खुली अदालत में सुनवाई हुई तो राजीव धवन पैरवी करेंगे. 

याचिकाओं में कहा गया है-:
- सुप्रीम कोर्ट का फैसला 1992 में मस्जिद ढहाए जाने को मंजूरी जैसा लगता है.
- फैसला अवैध रूप से रखी गई मूर्ति के पक्ष में सुनाया गया.
- अवैध हरकत करने वालों को ज़मीन दी गई.
- मुसलमानों को 5 एकड़ जमीन देने का फैसला पूरा इंसाफ नहीं कहा जा सकता.
- सुप्रीम कोर्ट अपने फैसले पर पुनर्विचार करे.

मूल वादी सिद्दीकी की ओर से मौलाना सैयद अशद रशीदी ने शीर्ष अदालत में अयोध्या (Ayodhya) फैसले पर समीक्षा याचिका दायर की है. याचिका में कहा गया है कि सुप्रीम कोर्ट ने 1934, 1949 और 1992 में मुस्लिम समुदाय के साथ हुई नाइंसाफी को गैरकानूनी करार दिया, लेकिन उसे नजरअंदाज भी कर दिया. याचिकाकर्ता ने कहा कि वह इस मुद्दे की संवेदनशील प्रकृति के प्रति सचेत है और विवाद में इस मुद्दे पर चुप रहने की आवश्यकता को भी समझते हैं, ताकि हमारे देश में शांति और सद्भाव बना रहे. इस दौरान हालांकि यह भी कहा गया कि न्याय के बिना शांति नहीं हो सकती.

मालूम हो कि देश के इस सबसे पुराने मामले में सुप्रीम कोर्ट अपने फैसले में विवादित मानी जा रही भूमि हिंदू पक्षकारों को सौंप दिया है. साथ ही मुस्लिमों को अध्योध्या के किसी प्रसिद्ध जगह पर पांच एकड़ जमीन देने का आदेश दिया है.

अयोध्या (Ayodhya) मामले पर ऐतिहासिक फैसला देते हुए सुप्रीम कोर्ट ने शनिवार को कहा कि विवादित स्थल पर मस्जिद की मौजूदगी हिंदुओं की आस्था व विवादित स्थल पर भगवान राम के जन्म लेने के विश्वास को हिला नहीं पाई.' प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पांच न्यायाधीशों की संविधान पीठ ने अयोध्या (Ayodhya) मामले पर अपने फैसले में कहा, 'मस्जिद की भौतिक संरचना भगवान राम के विवादित स्थल पर जन्म के हिंदुओं के आस्था व विश्वास को डिगा नहीं पाई.'

इस पांच सदस्यीय पीठ के दूसरे न्यायाधीशों न्यायमूर्ति एस.ए.बोबडे, एस.ए.नजीर, डी.वाई.चंद्रचूड़ व अशोक भूषण ने कहा, 'साक्ष्य संकेत देते हैं कि स्थल पर मस्जिद होने के बावजूद हिंदू उस जगह को भगवान राम की जन्म स्थली मानकर पूजा करते करते रहे.'

पीठ ने कहा, 'हिंदुओं द्वारा पवित्र माने जाने वाले एक जगह पर इस्लामिक संरचना के मौजूदगी के बाद भी उन्हें पूजा करने से नहीं रोका और उन्होंने विवादित स्थल पर पूजा जारी रखी.' कोर्ट ने पाया कि अंग्रेजों द्वारा विभाजन के लिए दीवार बनाए जाने के बाद भी हिंदुओं ने मुख्य गुंबद के नीच अपने पूजा के अधिकार को दृढ़ता से रखा.

पीठ ने कहा, 'रिकॉर्ड से स्पष्ट है कि व्यक्तियों ने मूर्तियों को स्थापित करने का कार्य किया और अंदर के प्रांगण के बाहर व भीतर पूजा शुरू की. यहां तक कि 'राम चबूतरा' के स्थापना के बाद तीर्थयात्री 'गर्भगृह' में भी पूजा-अर्चना करने लगे. गर्भगृह तीन गुंबद वाली संरचना के अंदर स्थित है.'

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