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Shri Ram Janmabhoomi Teerth Kshetra Trust Meeting: अयोध्या के मणिरामदास छावनी में श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत नृत्य गोपाल दास की अध्यक्षता में महत्वपूर्ण बैठक हुई. मंदिर प्रबंधन को और बेहतर बनाने के लिए एयर मार्शल (रि.) जितेंद्र मिश्रा को नया सीईओ नियुक्त किया गया है. इसके अलावा, महेश भागचंदका, मदन मोहन पांडेय और निर्मला यादव को तीन नए ट्रस्टी के रूप में शामिल किया गया है.
5,585 आवेदनों से शुरू हुई थी तलाश
राम मंदिर ट्रस्ट ने CEO के पद के लिए व्यापक स्तर पर आवेदन मांगे थे. देशभर से कुल 5,585 लोगों ने इस पद में रुचि दिखाई. इनमें IAS और IPS अधिकारियों के अलावा सेना के ब्रिगेडियर स्तर के अधिकारी और गैर सरकारी संस्थाओं से जुड़े लोग भी शामिल थे. इतने बड़े आवेदन आधार के बाद चयन प्रक्रिया को कई चरणों में आगे बढ़ाया गया. अलग-अलग स्तर पर उम्मीदवारों की योग्यता और अनुभव की जांच की गई. इसके बाद 16 उम्मीदवारों का इंटरव्यू लिया गया. इंटरव्यू और विस्तृत मूल्यांकन के बाद सर्च कमेटी ने अंतिम पैनल तैयार किया. अब इसी पैनल में शामिल नामों में से एक व्यक्ति को राम मंदिर का पहला पूर्णकालिक CEO बनाया जाएगा.
कौन-कौन थे अंतिम रेस में?
सूत्रों के मुताबिक अंतिम पैनल में पूर्व IAS अधिकारी योगेश्वर राम मिश्रा, पूर्व IPS अधिकारी राजेश कुमार पांडेय और बिहार के पूर्व DGP परेश सक्सेना के नाम शामिल था .
योगेश्वर राम मिश्रा 2005 बैच के IAS अधिकारी रहे हैं. वह अयोध्या के जिलाधिकारी भी रह चुके हैं. इसके अलावा बाराबंकी और वाराणसी समेत कई जिलों में जिलाधिकारी और कई मंडलों में कमिश्नर की जिम्मेदारी संभाल चुके हैं. अयोध्या में बतौर डीएम काम करने का उनका अनुभव उन्हें इस पद के लिए खास उम्मीदवार बनाता है. राम मंदिर और अयोध्या की प्रशासनिक व्यवस्था से उनका सीधा जुड़ाव उनकी सबसे बड़ी ताकत माना जा रहा है.
दूसरे नाम राजेश कुमार पांडेय का है. वह 2003 बैच के पूर्व IPS अधिकारी हैं. उन्होंने STF और ATS जैसी महत्वपूर्ण पुलिस इकाइयों में जिम्मेदारी संभाली है. इसके अलावा लखनऊ, अलीगढ़ और मेरठ जैसे बड़े शहरों में SSP भी रह चुके हैं. सुरक्षा व्यवस्था, बड़े आयोजनों और भीड़ प्रबंधन का उनका अनुभव CEO पद के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है.
तीसरा नाम बिहार के पूर्व DGP परेश सक्सेना का बताया जा रहा है. वह बिहार पुलिस में वरिष्ठ पदों पर काम कर चुके हैं और बड़े स्तर पर प्रशासन एवं सुरक्षा व्यवस्था संभालने का अनुभव रखते हैं.
सर्च कमेटी ने कैसे किया चयन?
CEO के चयन के लिए तीन सदस्यीय सर्च कमेटी बनाई गई थी. इसमें सुप्रीम कोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश जस्टिस प्रमोद कोहली, सेवानिवृत्त लेफ्टिनेंट जनरल विष्णु कांत चतुर्वेदी और सेवानिवृत्त परमाणु वैज्ञानिक एवं उद्योगपति सुरेश हावड़े शामिल थे. सर्च कमेटी के सदस्यों ने अयोध्या पहुंचकर राम मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत नृत्यगोपाल दास महाराज से मुलाकात की. तीनों सदस्य मणिराम छावनी स्थित उनके आश्रम पहुंचे और उनका आशीर्वाद लिया. इस दौरान ट्रस्ट के अंतरिम महासचिव कृष्ण मोहन भी मौजूद रहे.
कमेटी ने मंगलवार को CEO पद के लिए तैयार किया गया पैनल ट्रस्ट अध्यक्ष को सौंप दिया. जस्टिस प्रमोद कोहली के मुताबिक समिति ने उम्मीदवारों का विस्तृत मूल्यांकन करने के बाद तीन नाम चुने हैं. अंतिम फैसला अब ट्रस्ट को करना है.
CEO के लिए क्या-क्या योग्यता जरूरी थी?
ट्रस्ट ने CEO पद के लिए पात्रता के विस्तृत मानक तय किए थे. उम्मीदवार की उम्र 50 से 70 वर्ष के बीच होनी चाहिए. उसके पास किसी मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय से कम से कम स्नातक की डिग्री होना जरूरी है. इसके साथ ही किसी बड़े सार्वजनिक संगठन, सरकारी विभाग, संस्थान या कंपनी में कम से कम 20 साल का प्रबंधकीय या कार्यकारी अनुभव मांगा गया था. उम्मीदवार को सामान्य प्रशासन के साथ वित्त और लेखा, मानव संसाधन यानी HR, IT, जनसंपर्क, सुरक्षा और कानूनी मामलों की समझ भी होनी चाहिए. हिंदी और अंग्रेजी भाषा पर अच्छी पकड़ भी जरूरी मानी गई. यानी ट्रस्ट ऐसे व्यक्ति की तलाश में था जो किसी बड़े और जटिल संस्थान को लंबे समय तक व्यवस्थित तरीके से चला सके.
धार्मिक पृष्ठभूमि भी रखी गई अहम
इस पद के लिए केवल प्रशासनिक अनुभव ही पर्याप्त नहीं था. उम्मीदवार का हिंदू धर्म का सक्रिय रूप से पालन करने वाला होना भी पात्रता के मानकों में शामिल था। भगवान राम का भक्त होना और वैष्णव परंपरा से जुड़ाव वांछनीय माना गया. अगर किसी उम्मीदवार ने पहले किसी मंदिर, हिंदू धार्मिक संस्था या धर्मार्थ संगठन का प्रबंधन किया है तो उसे अतिरिक्त लाभ मिल सकता है. रिटायर्ड सरकारी अधिकारी भी इस पद के लिए आवेदन कर सकते थे, लेकिन उन्हें भी अनुभव और बाकी निर्धारित योग्यताएं पूरी करनी जरूरी थीं.
आखिर CEO करेगा क्या?
राम मंदिर के CEO की सबसे बड़ी जिम्मेदारी मंदिर की रोजमर्रा की प्रशासनिक व्यवस्था को संभालना होगी. इसका मतलब है कि मंदिर में होने वाले काम व्यवस्थित तरीके से चलें और अलग-अलग विभागों के बीच बेहतर तालमेल बना रहे. वित्त और लेखा व्यवस्था की निगरानी भी CEO की जिम्मेदारी होगी. मंदिर को मिलने वाले दान और दूसरे वित्तीय मामलों की व्यवस्था को पारदर्शी और व्यवस्थित रखना महत्वपूर्ण काम होगा. इसके साथ कर्मचारियों की नियुक्ति, उनके काम का प्रबंधन और अलग-अलग विभागों के बीच समन्वय भी CEO के जिम्मे रहेगा.


लाखों श्रद्धालुओं की व्यवस्था सबसे बड़ी चुनौती
राम मंदिर में आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या लगातार बढ़ रही है. ऐसे में CEO के सामने सबसे बड़ी चुनौती दर्शन व्यवस्था को बेहतर बनाए रखना होगी. श्रद्धालुओं के प्रवेश और निकास की व्यवस्था, भीड़ को नियंत्रित करना, लंबी कतारों को व्यवस्थित करना, बुजुर्गों और दिव्यांग श्रद्धालुओं के लिए सुविधाएं उपलब्ध कराना और सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत रखना CEO की अहम जिम्मेदारियों में शामिल होगा. त्योहारों और विशेष अवसरों पर श्रद्धालुओं की संख्या कई गुना बढ़ सकती है. ऐसे समय में ट्रैफिक, पार्किंग, सुरक्षा, चिकित्सा सुविधा और भीड़ प्रबंधन के लिए स्थानीय प्रशासन और पुलिस के साथ बेहतर तालमेल बनाना भी जरूरी होगा.
सुरक्षा से लेकर IT तक CEO के जिम्मे
CEO की जिम्मेदारी केवल मंदिर परिसर तक सीमित नहीं रहेगी. मंदिर की सुरक्षा व्यवस्था, तकनीकी व्यवस्था यानी IT, जनसंपर्क और कानूनी मामलों की निगरानी भी उसके काम का हिस्सा होगी. राम मंदिर जैसे बड़े धार्मिक स्थल पर सुरक्षा बेहद संवेदनशील विषय है. इसलिए पुलिस और दूसरी सुरक्षा एजेंसियों के साथ समन्वय बनाकर काम करना जरूरी होगा. वहीं, आधुनिक तकनीक के जरिए दर्शन व्यवस्था, श्रद्धालुओं की सुविधाओं और प्रशासनिक कामकाज को बेहतर बनाना भी CEO की जिम्मेदारी होगी.
CEO ट्रस्ट से ऊपर नहीं होगा
राम मंदिर का CEO मंदिर प्रशासन का प्रमुख कार्यकारी चेहरा जरूर होगा, लेकिन वह ट्रस्ट से ऊपर नहीं होगा. उसे ट्रस्ट के महासचिव को रिपोर्ट करना होगा और ट्रस्ट की ओर से दिए गए अधिकारों के तहत ही काम करना होगा. CEO के अधिकार कितने व्यापक होंगे, यह ट्रस्ट तय करेगा. कर्मचारियों की व्यवस्था से लेकर अलग-अलग विभागों की जिम्मेदारी तक अंतिम ढांचा ट्रस्ट के अधिकार क्षेत्र में रहेगा. खास बात यह भी है कि CEO के कामकाज में सरकार का सीधा दखल नहीं होगा. ट्रस्ट की ओर से स्पष्ट किया गया है कि CEO ट्रस्ट के सहायक के रूप में काम करेगा और मंदिर का प्रशासन ट्रस्ट के दायरे में ही रहेगा.
ट्रस्ट की दूसरी समितियों में भी होगा बदलाव
2 सितंबर की बैठक सिर्फ CEO के चयन तक सीमित नहीं रहने वाली है. ट्रस्ट की कई महत्वपूर्ण समितियों के पुनर्गठन पर भी चर्चा होगी. धार्मिक न्यास समिति, निर्माण समिति, वित्त समिति, ऑडिट समिति और मैनेजिंग कमेटी के पुनर्गठन की भी संभावना है. यानी बैठक में राम मंदिर के प्रशासनिक ढांचे को और व्यवस्थित करने से जुड़े कई बड़े फैसले हो सकते हैं. ट्रस्ट के आठ नियमित सदस्यों में से जगद्गुरु माध्वाचार्य स्वामी विश्व प्रसन्न तीर्थ चातुर्मास के कारण अयोध्या में मौजूद नहीं रहेंगे. बताया गया है कि वह दिल्ली में चातुर्मास कर रहे हैं.
क्यों खास है राम मंदिर का पहला CEO?
राम मंदिर अब सिर्फ एक धार्मिक स्थल नहीं रह गया है, बल्कि देश-दुनिया से करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का बड़ा केंद्र बन चुका है. मंदिर परिसर और उससे जुड़ी व्यवस्थाओं का विस्तार भी लगातार हो रहा है. ऐसे में CEO की भूमिका आने वाले वर्षों में और महत्वपूर्ण हो सकती है.