VIDEO: अजीब है उत्तराखंड के इस मंदिर की प्रथा, पत्थरबाजी करके मनाया जाता है रक्षाबंधन

इस साल पत्थरबाजी की घटना में कम से कम 60 लोग घायल हुए हैं जिन्हें नजदीकी अस्पताल में पहुंचाया गया है.

VIDEO: अजीब है उत्तराखंड के इस मंदिर की प्रथा, पत्थरबाजी करके मनाया जाता है रक्षाबंधन
(फोटो साभार सोशल मीडिया)

देहरादून: उत्तराखंड के चंपावत जिले में हर साल रक्षाबंधन के अवसर पर बग्वाल खेली जाती है. इस खेल में शामिल होने वाले लोग अलग-अलग गुटों में बंट जाते हैं और एक-दूसरे पर जमकर पत्थरबाजी करते हैं. पत्थरबाजी करने के बाद सभी गुट के लोग आपस में गले मिलकर खुशियां मनाते हैं और एक दूसरे का हाल जानते हैं. इस खेल में 60 से ज्यादा लोगों के घायल होने की खबर है. घायलों को नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया है.

स्थानीय लोगों का कहना है कि देवीधुरा में मां वाराही देवी के मंदिर के प्रांगण में हर साल रक्षाबंधन के अवसर पर श्रावणी पूर्णिमा को 'बग्वाल' खेली जाती है. इस खेल के दौरान कोई भी किसी को निशाना बनाकर पत्थर नहीं फेंकता है. उनका मकसद एक खेमे से दूसरे खेमे में पत्थर पहुंचाना होता है. लेकिन, हर साल इस खेल में दर्जनों लोग घायल होते हैं. घायल होने के बावजूद खेल खेलने के लिए और देखने वालों में इसको लेकर जबरदस्त उत्साह रहता है. लोगों का कहना है कि नर बलि की परम्परा के तहत ही बग्वाल खेल का आयोजन होता है.

 

 

इस साल बग्वाल मेला बारिश और कोहरे की आगोश के बीच आयोजित किया गया. इस बार भी फल-फूलों के साथ पत्थरों की मार आठ मिनट चली, जिसमें पांच दर्जन बग्वाली वीर और दर्शक लहूलुहान हो गए. जिन्हें प्राथमिक उपचार दिया गया. इस रोमांचक, अदभुत और अकल्पनीय नजारे को 20 हजार से ज्यादा दर्शक टकटकी लगाकर अपलक देखते रहे.

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सुबह बाराही धाम में विशेष पूजा अर्चना के बाद  दिन में दोपहर एक बजे से सात थोकों और चार खामों के बग्वाली वीरों के जत्थे आने शुरू हो गए. खाम के लोगों ने अलग-अलग रंग की पगड़ियों के साथ मां बाराही के जयघोष के बीच मंदिर और बग्वाल मैदान, खोलीखांड द्रुबाचैड की परिक्रमा की. बांस के फर्रों और डंडों के बीच बग्वाली वीर उछल-उछल कर मैदान में रोमांच के साथ जोश और जज्बा पैदा कर रहे थे. सबसे पहले चम्याल खाम और अंत में गहड़वाल खाम का जत्था पंहुचा.

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वालिक खाम तिरंगे के साथ पहुंचे. मंदिर छोर पर लमगडिया और बालिक तथा बाजार छोर में गहड़वाल और चम्याल खाम के बग्वाली वीर आमने सामने आ गए. जैसे ही पुजारी ने शंख और घंट बजाई कि उतावले बग्वाली वीरों ने फल-फूलों के साथ ही पत्थर बरसाने लगे. जब पुजारी को लगा कि एक इंसान के बराबर रक्तपात हो गया है तो उन्होंने खेल बंद करने का निर्देश दिया.

बग्वाली खेल दोपहर 2.38 बजे शुरू हुई और 2.46 मिनट तक चली. इस दौरान करीब 60 लोग लहू-लुहान हो गए. इस साल इस मेले के मुख्य अतिथि केंद्रीय राज्य मंत्री अजय टम्टा और उत्तराखंड के मंत्री धन सिंह रावत रहे.