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Santkabir Nagar News: उत्तर प्रदेश को आमों का प्रदेश कहा जाता है और लखनऊ का मलिहाबाद दशकों से अपनी दशहरी, लंगड़ा, चौसा और सफेदा जैसी प्रसिद्ध किस्मों के कारण दुनिया भर में पहचान रखता है. यही वजह है कि मलिहाबाद को "मैंगो कैपिटल" के नाम से भी जाना जाता है. यहां 200 वर्ष पुराना दशहरी का मातृ वृक्ष आज भी मौजूद है, जो आम प्रेमियों और बागवानी विशेषज्ञों के लिए आकर्षण का केंद्र है.
इसी बीच पूर्वांचल के संतकबीर नगर जिले से एक ऐसी खबर सामने आई है, जिसने आम उत्पादन की पारंपरिक तस्वीर को नया आयाम दे दिया है. जिले के बघौली क्षेत्र के शिवापार गांव के प्रगतिशील किसान हरिशंकर यादव ने अपनी बगिया में दुनिया के सबसे महंगे और दुर्लभ माने जाने वाले जापानी 'मियाजाकी' आम का सफल उत्पादन कर सबका ध्यान अपनी ओर खींचा है.
दो साल की मेहनत से तैयार हुआ 'लाल सोना'
हरिशंकर यादव ने करीब दो वर्ष पहले मियाजाकी प्रजाति के तीन पौधे लगाए थे। वैज्ञानिक पद्धति और विशेष देखभाल के साथ किए गए इस प्रयोग का परिणाम अब सामने है. उनके तीनों पेड़ों पर आकर्षक लाल-बैंगनी रंग के फल लगे हैं, जिनका वजन लगभग 200 से 250 ग्राम तक पहुंच चुका है.
स्थानीय स्तर पर यह उपलब्धि न केवल एक किसान की सफलता की कहानी है, बल्कि प्रदेश के अन्य किसानों के लिए भी उच्च मूल्य वाली बागवानी की संभावनाओं का संकेत देती है.
क्या है मियाजाकी आम?
मियाजाकी आम मूल रूप से जापान के मियाजाकी प्रांत में उगाया जाता है. अपने अनूठे रंग, स्वाद, गुणवत्ता और सीमित उत्पादन के कारण यह दुनिया के सबसे महंगे फलों में गिना जाता है. जापान में इसे "ताइयो नो टोमागो" यानी "एग ऑफ द सन" के नाम से भी जाना जाता है.
पकने के बाद इसका रंग सामान्य पीले आमों से अलग गहरे लाल और बैंगनी आभा लिए होता है, जो इसे अन्य किस्मों से अलग पहचान देता है.
आखिर इतना महंगा क्यों है यह आम?
मियाजाकी आम की ऊंची कीमत के पीछे कई कारण हैं.
- इसकी खेती विशेष जलवायु और नियंत्रित परिस्थितियों में की जाती है.
- प्रत्येक फल की गुणवत्ता पर विशेष निगरानी रखी जाती है.
- उत्पादन सीमित होने के कारण इसकी मांग आपूर्ति से कहीं अधिक रहती है.
- अंतरराष्ट्रीय बाजार में इसे प्रीमियम श्रेणी के फल के रूप में बेचा जाता है.
विशेषज्ञों के अनुसार वैश्विक बाजार में इसकी कीमत लगभग 2.5 लाख रुपये से 3 लाख रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंच सकती है. वहीं भारत में उपलब्धता, गुणवत्ता और मांग के आधार पर इसका मूल्य 70 हजार रुपये से लेकर 1 लाख रुपये प्रति किलोग्राम तक बताया जाता है.
पोषण और औषधीय गुणों से भरपूर
मियाजाकी आम केवल अपनी कीमत के कारण ही नहीं, बल्कि पोषण मूल्य के कारण भी चर्चा में रहता है. इसमें विटामिन ए, विटामिन सी, एंटीऑक्सीडेंट्स और अन्य आवश्यक पोषक तत्व प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं. विशेषज्ञ मानते हैं कि ये तत्व शरीर की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने और कोशिकाओं को क्षति से बचाने में सहायक हो सकते हैं.
यूपी मैंगो फेस्टिवल में भी आकर्षण का केंद्र
राजधानी लखनऊ में आयोजित उत्तर प्रदेश मैंगो फेस्टिवल में इस वर्ष 800 से अधिक दुर्लभ और लोकप्रिय किस्मों का प्रदर्शन किया जा रहा है. सात श्रेणियों और 56 वर्गों में दशहरी, लंगड़ा, चौसा, आम्रपाली, रटौल और लखनऊ सफेदा सहित अनेक प्रजातियां प्रदर्शित की गई हैं.
हालांकि आमों की राजधानी कहे जाने वाले लखनऊ और मलिहाबाद की पहचान पारंपरिक किस्मों से जुड़ी रही है, लेकिन संतकबीर नगर के शिवापार गांव में मियाजाकी आम की सफल खेती यह संकेत देती है कि उत्तर प्रदेश अब प्रीमियम और अंतरराष्ट्रीय बाजार की मांग वाले फलों के उत्पादन की दिशा में भी तेजी से आगे बढ़ रहा है.
किसानों के लिए नई उम्मीद
हरिशंकर यादव का यह प्रयोग दर्शाता है कि यदि वैज्ञानिक खेती, धैर्य और नवाचार को अपनाया जाए तो छोटे गांवों से भी वैश्विक बाजार के लिए उच्च मूल्य वाली फसलें तैयार की जा सकती हैं. संतकबीर नगर में दुनिया के सबसे महंगे आम का उत्पादन न केवल स्थानीय किसानों के लिए प्रेरणा है, बल्कि यह उत्तर प्रदेश की कृषि विविधता और संभावनाओं का भी नया अध्याय है.