उत्तराखंड विधानसभा चुनाव परिणाम 2017 : भाजपा को प्रचंड बहुमत, कांग्रेस की करारी हार

उत्तराखंड विधानसभा चुनावों में जबरदस्त कामयाबी हासिल करते हुए भाजपा ने आज 69 में से 56 सीटें अपनी झोली में डाल लीं और तीन चौथाई से ज्यादा बहुमत के साथ सत्ता अपने नाम कर ली। भाजपा की यह सफलता प्रदेश के इतिहास में किसी भी राजनीतिक दल को अब तक मिली सबसे बड़ी कामयाबी है। प्रदेश में कुल 70 विधानसभा क्षेत्रों में से एक, चंपावत जिले की लोहाघाट सीट, पर आठ ईवीएम खराब होने कारण मतगणना पूरी नहीं हो सकी और उसका नतीजा नहीं आ सका।

उत्तराखंड विधानसभा चुनाव परिणाम 2017 : भाजपा को प्रचंड बहुमत, कांग्रेस की करारी हार

देहरादून : उत्तराखंड विधानसभा चुनावों में जबरदस्त कामयाबी हासिल करते हुए भाजपा ने आज 69 में से 56 सीटें अपनी झोली में डाल लीं और तीन चौथाई से ज्यादा बहुमत के साथ सत्ता अपने नाम कर ली। भाजपा की यह सफलता प्रदेश के इतिहास में किसी भी राजनीतिक दल को अब तक मिली सबसे बड़ी कामयाबी है। प्रदेश में कुल 70 विधानसभा क्षेत्रों में से एक, चंपावत जिले की लोहाघाट सीट, पर आठ ईवीएम खराब होने कारण मतगणना पूरी नहीं हो सकी और उसका नतीजा नहीं आ सका।

यहां निर्वाचन कार्यालय के सूत्रों ने बताया कि उन्होंने मामले से चुनाव आयोग को सूचित कर दिया है। मतगणना का काम रूकने से पहले लोहाघाट से भाजपा प्रत्याशी पूरन सिंह फर्त्याल कांग्रेस के प्रत्याशी से करीब 450 मतों से आगे चल रहे थे। प्रदेश में चली मोदी लहर में सत्ताधारी कांगेस के बड़े-बड़े किले ढह गये और मुख्यमंत्री हरीश रावत सहित कई कैबिनेट मंत्रियों को चुनावों में हार का मुंह देखना पड़ा। प्रदेश में कांग्रेस महज 11 सीटों तक सिमट गयी जबकि दो सीटें निर्दलीयों के हाथ भी लगीं।

पिछले तीन चुनावों में प्रदेश के मैदानी इलाकों में अच्छा प्रदर्शन करने वाली बसपा इस बार अपना खाता भी नहीं खोल सकी। हालांकि, भाजपा के पक्ष में चली जबरदस्त आंधी का लाभ इसके प्रदेश अध्यक्ष अजय भट्ट को नहीं मिला और वह रानीखेत में कांग्रेस के करन सिंह माहरा से 4981 मतों से पराजित हो गये। रावत हरिद्वार जिले की हरिद्वार ग्रामीण और उधमसिंह नगर जिले की किच्छा, दोनों विधानसभा क्षेत्रों से पराजित हो गये। हरिद्वार ग्रामीण में उन्हें भाजपा के यतीश्वरानंद ने 12,000 से ज्यादा मतों से शिकस्त दी वहीं किच्छा में वह 2127 मतों से भाजपा के राजेश शुक्ला से हार गये।

रावत के अलावा, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष किशोर उपाध्याय भी सहसपुर सीट से चुनाव हार गये। रावत कैबिनेट के कई मंत्री, सुरेंद्र सिंह नेगी, दिनेश अग्रवाल, मंत्री प्रसाद नैथानी, दिनेश धनै, हरीश चंद्र दुर्गापाल, नवप्रभात राजेंद्र सिंह भंडारी भी चुनाव हार गये। हालांकि, रावत कैबिनेट में नम्बर दो का स्थान रखने वाली इंदिरा हृदयेश (हल्द्वानी) और प्रीतम सिंह (चकराता) अपना दुर्ग बचाने में कामयाब रहे।

पिछले साल मार्च में मुख्यमंत्री रावत के खिलाफ बगावत करने के बाद कांग्रेस से भाजपा में आये नेताओं में से पूर्व मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा के अलावा सभी ने चुनाव लड़ा और उनमें से दो को छोड़कर सभी चुनाव जीत भी गये। इन नेताओं में प्रमुख रूप से सुबोध उनियाल, उमेश शर्मा काउ, रेखा आर्य, हरक सिंह रावत, कुंवर प्रणव सिंह चैंपियन, प्रदीप बत्रा शामिल हैं। बहुगुणा के पुत्र सौरभ ने भी सितारगंज से बड़ी जीत हासिल करते हुए कांग्रेस की मालती बिस्वास को 28450 मतों के अंतर से पराजित किया। 

वर्ष 2014 में रावत के मुख्यमंत्री बनने के बाद कांग्रेस छोड़कर भाजपा में आये सतपाल महाराज ने भी चौबट्टाखाल से शानदार जीत हासिल की जबकि ऐन चुनाव के मौके पर भाजपा में शामिल हुए रावत कैबिनेट के प्रमुख मंत्री यशपाल आर्य ने भी बाजपुर से विजय हासिल की। नैनीताल से भाजपा का टिकट पाने वाले उनके पुत्र संजीव आर्य को भी चुनाव में सफलता मिली।

हरीश रावत ने ली हार की जिम्मेदारी, दिया इस्तीफा
हरिद्वार जिले के हरिद्वार ग्रामीण और उधमसिंह नगर जिले के किच्छा, दो विधानसभा क्षेत्रों में हार का सामना करने वाले उत्तराखंड के मुख्यमंत्री हरीश रावत ने हार की जिम्मेदारी अपने ऊपर लेते हुए चुनावों में पार्टी के खराब प्रदर्शन का कारण अपने नेतृत्व में कमी को बताया। राज्यपाल को अपना इस्तीफा सौंपने के बाद रावत ने संवाददाताओं से कहा, ‘संसाधनों की कमी के बावजूद कड़ी मेहनत करने वाले अपनी पार्टी के कार्यकर्ताओं की उम्मीदों पर खरा न उतर पाने की विफलता की जिम्मेदारी मैं अपने ऊपर लेता हूं।’ 

रावत ने कहा, ‘मैं मानता हूं कि मेरे अपने नेतृत्व में ही कुछ कमी रही होगी जिसके कारण पार्टी का चुनावों में प्रदर्शन खराब रहा।’ उन्होंने प्रदेश में अपनी पार्टी के खराब प्रदर्शन के लिये ‘मोदी क्रांति और ईवीएम चमत्कार’ को भी जिम्मेदार माना। हालांकि, उन्होंने इसे स्पष्ट करने से इंकार कर दिया और कहा कि वह जो कुछ कह सकते थे, उन्होंने कह दिया है।

अजय भट्ट ने जीत के लिए जनता का जताया आभार
दूसरी तरफ, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष अजय भट्ट ने भाजपा की ऐतिहासिक विजय के लिए राज्य की जनता का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि पार्टी की विजय उनके लिये ज्यादा महत्वपूर्ण है और उनके लिए अपने खुद के चुनाव परिणाम का कोई महत्व नहीं है। यहां जारी एक बयान में भट्ट ने कहा, ‘उत्तराखंड की जनता ने एक ओर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह के नेतृत्व में भाजपा के ‘सबका साथ सबका विकास’ के एजेंडे को अपना समर्थन दिया और दूसरी ओर प्रदेश में कांग्रेस के भ्रष्टाचार, लूट तथा आतंक के माहौल को पूरी तरह नकार दिया।’