हिंदू विरोधी है बीजेपी सरकार, SC/ST एक्ट से टूटेगा समाज: शंकराचार्य स्वरूपानंद

शंकराचार्य स्वरूपानंद ने कहा कि SC/ST एक्ट से एक दूसरे के प्रति नफरत का भाव बढ़ेगा और समाज का विघटन होगा.

हिंदू विरोधी है बीजेपी सरकार, SC/ST एक्ट से टूटेगा समाज: शंकराचार्य स्वरूपानंद
फाइल फोटो

मथुरा: एससी/एसटी एक्ट को लेकर बवाल जारी है. कानून को पुराने स्वरूप में लागू करने के सरकार के फैसले का उच्चवर्गीय लोग विरोध कर रहे हैं. अलग-अलग राज्यों में सरकार के इस फैसले के खिलाफ विरोध प्रदर्शन जारी है. इस बीच द्वारका-शारदा पीठ के शंकराचार्य स्वरूपानंद सरस्वती ने शुक्रवार को कहा कि केंद्र सरकार द्वारा संशोधित रूप में लाया गया SC/ST एक्ट भारतीय समाज में विघटन का कारण बनेगा. द्वारका-शारदापीठ की प्रतिनिधि डॉ दीपिका उपाध्याय द्वारा उनकी ओर से जारी बयान में कहा गया है कि केंद्र की बीजेपी सरकार हिंदू विरोधी है. इस कानून को सवर्णों को शोषित करने वाला बताया गया है.

शंकराचार्य स्वरूपानंद इस समय वृंदावान के अटल्ली चुंगी स्थित उड़िया आश्रम में चातुर्मास प्रवास पर हैं. उन्होंने कहा कि हर जाति में अच्छे और बुरे लोग होते हैं. कानून के वर्तमान प्रावधान के मुताबिक, अनुसूचित जाति और जनजाति के लोगों द्वारा केवल शिकायत किए जाने पर सवर्णों को जेल भेज दिया जाएगा. यह गलत है. इससे समाज में एक दूसरे के प्रति आक्रोश की भावना बढ़ेगी और सामाज का विघटन शुरू हो जाएगा.

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उन्होंने कहा कि हम भी चाहते हैं कि दलित वर्ग का कल्याण हो. वे समाज की मुख्यधारा से जुड़ें और विकास की ओर अग्रसर हों. उनके साथ किसी तरह का भेदभाव न हो और न ही उनपर किसी तरह का जुल्म हो. लेकिन, इस कानून की मदद से उनका भला नहीं होने वाला है. इस कानून से जातिगत भेदभाव और बढ़ जाएगा और समाज पीछे की ओर चला जाएगा. समाज पीछे की ओर जाएगा तो देश भी आगे की बजाए पीछे की ओर जाएगा.

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आपको बता दें कि मार्च 2018 में सुप्रीम कोर्ट ने एक सरकारी अधिकारी की याचिका पर फैसला सुनाते हुए SC/ST एक्ट के प्रावधानों को नरम किया था. कोर्ट ने कहा कि इस कानून के तहत मामला दर्ज होने पर तुरंत गिरफ्तारी नहीं होगी. मामले की शुरुआती जांच के बाद ही आरोपी को गिरफ्तार किया जा सकता है. सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ दलित संगठनों ने विरोध किया.

दलित संगठनों के विरोध के बाद केंद्र सरकार ने मानसून सत्र में विधेयक लाकर सुप्रीम कोर्ट के आदेश को पलट दिया. विधेयक की मदद से कानून को दोबारा पुराने स्वरूप में लागू कर दिया गया है. दलित संगठनों ने इसका समर्थन किया लेकिन, सरकार के इस फैसले से सवर्ण भड़क गए हैं. पूरे देश के सवर्ण संगठन इसके विरोध में अब सड़क पर उतरने लगे हैं.