यूपी में मोदी लहर से सपा-कांग्रेस और बसपा साफ, सहयोगियों के साथ BJP ने जीती 325 सीटें

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में मोदी लहर और भाजपा की ‘केसरिया सुनामी’ के आगे सपा-कांग्रेस समेत सभी विरोधी दलों के पांव उखड़ गये और भगवा दल प्रचंडतम बहुमत के साथ 14 साल का बनवास खत्म कर सत्ता में आ गया. ‘टीम पीके’ की रणनीति के सहारे चुनाव लड़ रही कांग्रेस और सपा का ‘साथ’ जनता को ‘पसंद’ नहीं आया और ना ही बसपा के विकास और सुशासन के दावे उसका दिल जीत सके.

यूपी में मोदी लहर से सपा-कांग्रेस और बसपा साफ, सहयोगियों के साथ BJP ने जीती 325 सीटें

लखनऊ : उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में मोदी लहर और भाजपा की ‘केसरिया सुनामी’ के आगे सपा-कांग्रेस समेत सभी विरोधी दलों के पांव उखड़ गये और भगवा दल प्रचंडतम बहुमत के साथ 14 साल का बनवास खत्म कर सत्ता में आ गया. ‘टीम पीके’ की रणनीति के सहारे चुनाव लड़ रही कांग्रेस और सपा का ‘साथ’ जनता को ‘पसंद’ नहीं आया और ना ही बसपा के विकास और सुशासन के दावे उसका दिल जीत सके.

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के अंतिम परिणाम :

भाजपा गठबंधन -- 325 सीट

सपा कांग्रेस गठबंधन -- 54 सीट

बहुजन समाज पार्टी -- 19 सीट

अन्य के खाते में -- 5 सीट

नोटबंदी के बाद हुए इस चुनाव में इस मुद्दे का कोई असर नहीं दिखा और जनता ने बेहद पोशीदा तरीके से भाजपा के पक्ष में वोट करके सूबे में उसे 312 सीटों के साथ अब तक की सबसे बड़ी जीत दिला दी. हालांकि बसपा ने भाजपा की इस अभूतपूर्व जीत को इलेक्ट्रानिक वोटिंग मशीनों में गड़बड़ी का परिणाम बताते हुए चुनाव आयोग से दोबारा चुनाव कराने की मांग की जिसे चुनाव आयोग ने खारिज कर दिया. वहीं, सपा अध्यक्ष कार्यवाहक मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने भी मायावती की शिकायत पर सरकार से जांच कराने को कहा.

चुनाव में अपनी पार्टी की हार के बाद अखिलेश ने राज्यपाल राम नाईक को इस्तीफा सौंप दिया, मगर वह अगली सरकार बनने तक कार्यवाहक मुख्यमंत्री बने रहेंगे. इससे पहले, वर्ष 1991 में ‘राममंदिर लहर’ के दौरान हुए विधानसभा चुनाव में भाजपा ने 221 सीटें जीती थीं. प्रदेश के इतिहास में वर्ष 1951 को छोड़कर जब कुछ सीटों पर दोहरी सदस्यता की व्यवस्था थी, अब तक केवल वर्ष 1977 में जनता पार्टी को प्रदेश विधानसभा की 425 में से 352 सीटें मिली थीं. उसके बाद 1980 में कांग्रेस को 309 सीटें हासिल हुई थीं. कुल मिलाकर यह तीसरा मौका है जब किसी पार्टी को उत्तर प्रदेश में 300 से अधिक यानी तीन चौथाई सीटें मिली हैं.

रविवार को दिल्ली में भाजपा संसदीय दल की बैठक में मुख्यमंत्री के नाम पर फैसला होगा. वर्ष 2012 में हुए पिछले विधानसभा चुनाव में भाजपा को महज 47 सीटें मिली थीं, लेकिन साल 2014 में हुए लोकसभा चुनाव में उसने प्रदेश में 43 . 3 प्रतिशत वोट हासिल करके कुल 80 में से 71 सीटें जीती थीं.

वर्ष 2012 में हुए विधानसभा चुनाव में 224 सीटें पाकर स्पष्ट बहुमत के साथ सरकार बनाने वाली सपा को इस बार महज 47 सीटों पर संतोष करना पड़ा. वहीं, साल 2007 में पूर्ण बहुमत की सरकार बनाकर प्रदेश में 14 साल तक चले गठबंधन राज का खात्मा करने वाली बसपा महज 19 सीटों पर सिमट गयी. सपा के साथ मिलकर चुनाव लड़ रही कांग्रेस का और भी बुरा हश्र हुआ. वर्ष 2012 में हुए विधानसभा चुनाव में 28 सीटें प्राप्त करने वाली इस पार्टी को मात्र सात सीटें ही मिलीं.

सहयोगी अपना दल (सोनेलाल) की नौ सीटों और सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी की चार सीटों के साथ भाजपा नीत गठबंधन 325 के आंकड़े पर पहुंच गया है. इसके अलावा तीन सीटों पर निर्दलीय प्रत्याशी जीते जबकि राष्ट्रीय लोकदल और निर्बल इंडियन शोषित हमारा आम दल के खाते में एक-एक सीट गयी. दोपहर तक विधानसभा चुनाव के रुझान और नतीजे भाजपा के पक्ष में होते ही जहां भाजपा प्रदेश मुख्यालय में जश्न का माहौल बन गया, वहीं सपा के दफ्तर में सन्नाटा पसरने लगा. होली से दो दिन पहले मिली इस उत्साहजनक जीत पर भाजपा कार्यकर्ताओं ने जमकर होली खेली और पटाखे जलाकर खुशी का इजहार किया.

ईवीएम में गड़बड़ी का माया ने लगाया आरोप

लोकसभा चुनाव में एक भी सीट जीत पाने में नाकाम रही बसपा प्रमुख मायावती ने इस विधानसभा चुनाव में भी पार्टी की करारी हार के बाद वोटिंग मशीनों में गड़बड़ी का आरोप लगाते हुए वोटिंग मशीन का चुनाव रद्द कराकर पुरानी व्यवस्था बैलेट पेपर से चुनाव कराने की मांग की. उन्होंने कहा, ‘मैं खुली चेतावनी देती हूं यदि भाजपा सही मायने में ईमानदार है तो मुख्य चुनाव आयोग को लिखकर दे कि इस चुनाव में उनको सही वोट पड़ा है. यदि इनमें थोडी सी भी ईमानदारी है तो घबराना नहीं चाहिए और बैलेट पेपर के माध्यम से चुनाव करायें.’ मायावती ने संवाददाताओं से कहा कि मुस्लिम बहुल इलाकों में भी ज्यादातर वोट भाजपा को ही चले गये जिससे इस आशंका को और बल मिलता है कि वोटिंग मशीनों को अवश्य ही मैनेज किया गया है. जिस भाजपा ने उत्तर प्रदेश में जहां मुस्लिम समाज का 18 से 20 प्रतिशत वोट है, एक भी टिकट मुसलमान को ना दिया हो, उसके बावजूद मुस्लिम बहुल इलाकों में मुस्लिम समाज का वोट भाजपा को चला जाए, गले से नीचे नहीं उतर रहा है.’ 

लोकतंत्र में समझाने से नहीं बहकाने से मिलता है वोट : अखिलेश

सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने प्रदेश विधानसभा चुनाव में भाजपा की जोरदार जीत  को अप्रत्याशित बताते हुए कहा कि अब वह कह सकते हैं कि लोकतंत्र में समझाने से नहीं बहकाने से वोट मिलता है. विधानसभा चुनाव परिणाम आने के बाद पहली बार मीडिया से मुखातिब हुए अखिलेश ने कहा, ‘पूरे चुनाव में मुझे नहीं लगा कि ऐसा होगा. मेरी सभाओं में भारी भीड़ उमड़ती थी. पता नहीं क्या हुआ. हम देखना चाहते हैं कि अब समाजवादियों से भी अच्छा काम क्या होगा.’ अखिलेश ने टीस भरे अंदाज में कहा ‘मैं समझता हूं कि लोकतंत्र में समझाने से नहीं बहकाने पर वोट मिलता है. गरीब को अक्सर पता ही नहीं होता कि वह क्या चाहता है. किसान को पता ही नहीं होता कि उसे क्या मिलने जा रहा है. मैं समझता हूं कि जनता कुछ और सुनना चाहती रही होगी. मैं उम्मीद करता हूं कि अगली सरकार समाजवादी सरकार से ज्यादा अच्छा काम करेगी.’ 

पीएम नरेंद्र मोदी का जादू बरकरार है : केशव मौर्य

विधानसभा चुनाव में अपनी पार्टी की जीत से प्रफुल्लित भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का जादू बरकरार है और प्रदेश की जनता ने उनमें पूरा विश्वास व्यक्त किया है, तभी भाजपा ने ऐतिहासिक जीत दर्ज की है. मौर्य ने कहा, ‘उत्तर प्रदेश की जनता ने भ्रष्टाचार और गुंडागर्दी को अस्वीकार कर दिया है. जातिवाद और परिवारवाद की राजनीति करने वालों को नकार दिया है.’ उन्होंने कहा कि भाजपा ने चुनाव से पहले जनता से जो वायदे किये हैं, उन्हें पूरा करेगी. प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में केन्द्र और भाजपा की उत्तर प्रदेश की सरकार के कार्यकाल में राज्य के विकास की गति और तेज होगी.