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चंद्रशेखर 'रावण' ने कहा 'बुआ', लेकिन मायावती बोलीं कि मेरा उनसे कोई नाता नहीं

मायावती ने चंद्रशेखर आजाद के लिए कहा कि ऐसे लोग वाकई दलितों के हितैषी होते तो अपना संगठन बनाने की बजाय बसपा से जुड़ते.

चंद्रशेखर 'रावण' ने कहा 'बुआ', लेकिन मायावती बोलीं कि मेरा उनसे कोई नाता नहीं
चंद्रशेखर आजाद ने जेल से रिहा होने के बाद मायावती को 'बुआ' कहा.(फाइल फोटो)
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लखनऊ: बहुजन समाज पार्टी (बसपा) अध्यक्ष मायावती ने, पिछले साल मई में सहारनपुर के शब्बीरपुर गांव में हुई जातीय हिंसा के मामले में गिरफ्तारी के बाद पिछले दिनों रिहा किये गये ‘भीम आर्मी' के संस्थापक चंद्रशेखर उर्फ रावण के साथ कोई नाता होने से इनकार किया है. मायावती ने रविवार को यहां संवाददाता सम्मेलन में कहा ‘‘मैं देख रही हूं कि कुछ लोग अपने राजनीतिक स्वार्थ में तो कुछ लोग अपने बचाव में और कुछ लोग खुद को नौजवान दिखाने के लिये कभी मेरे साथ भाई-बहन का तो कभी बुआ-भतीजे का रिश्ता जोड़ रहे हैं.’’

उन्होंने कहा कि सहारनपुर के शब्बीरपुर में हुई हिंसा के मामले में अभी हाल में रिहा हुआ व्यक्ति (चंद्रशेखर उर्फ रावण) उनके साथ बुआ का नाता जोड़ रहा है. उन्होंने कहा कि उनका कभी भी ऐसे लोगों के साथ कोई सम्मानजनक रिश्ता नहीं कायम हो सकता. अगर ऐसे लोग वाकई दलितों के हितैषी होते तो अपना संगठन बनाने की बजाय बसपा से जुड़ते.

मालूम हो कि मई 2017 में सहारनपुर जिले के शब्बीरपुर में हुई जातीय हिंसा के मामले में गिरफ्तार किये गये ‘भीम आर्मी' के संस्थापक चंद्रशेखर को 14 सितंबर को रिहा किया गया था. रिहाई के बाद उन्होंने कहा था कि मायावती उनकी बुआ हैं और उनका उनसे कोई विरोध नहीं है.

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बीजेपी की मूलभूत नीति का दुष्परिणाम है ‘मॉब लिंचिंग’ : मायावती
इसके साथ ही मायावती ने आरोप लगाया कि भीड़ द्वारा पीट-पीट कर जान लेने की घटनाएं दलितों तथा मुसलमानों के प्रति बीजेपी के पक्षपातपूर्ण रवैये का नतीजा होने के साथ-साथ सत्ताधारी दल की मूलभूत नीति का हिस्सा हैं. उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि बीजेपी के सत्ता में आने के बाद यह सिलसिला खतरनाक तरीके से बढ़ता जा रहा है.

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भीम आर्मी के नेता चंद्रशेखर 'रावण' की सहारनपुर के शब्बीरपुर गांव में जातीय हिंसा भड़कने के मामले में गिरफ्तारी हुई थी.(फाइल फोटो)

मायावती ने यहां प्रेस कांफ्रेंस में कहा, ‘‘देश के बीजेपी शासित राज्यों में कथित गोरक्षा के नाम पर लिचिंग यानी भीड़ तंत्र की बढ़ती प्रवृत्ति लोकतंत्र को कलंकित कर रही है, फिर भी सरकारें उदासीन और लापरवाह बनी हुई हैं.’’ उन्होंने कहा, ‘‘यह दलितों, आदिवासियों, पिछड़ों, मुस्लिमों और ईसाइयों आदि के मामले में बीजेपी की सरकारों के पक्षपातपूर्ण और सौतेले रवैये का परिणाम है. यह उनकी मूलभूत नीति का हिस्सा है, जो उनके सरकार में आने के बाद खतरनाक तरीके से बढ़ता गया है.’’

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'दलितों पर दमन चक्र चल रहा'
बसपा मुखिया ने कहा कि अजा...अजजा कानून में बदलाव के खिलाफ गत दो अप्रैल को दलित संगठनों द्वारा किये गये ‘भारतबंद’ के बाद से दमन चक्र लगातार चल रहा है. उन्होंने बीजेपी पर पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के निधन तक को अपने सियासी फायदे के लिये भुनाने का आरोप लगाते हुए कहा कि कि अगर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा वाजपेयी के पदचिह्नों पर चले होते तो देश में सांप्रदायिक घटनाएं नहीं होतीं और ना ही भीड़तंत्र का राज होता.

बसपा प्रमुख ने कहा कि राफेल विमान खरीद मामले में जनता को अब तक कोई संतोषजनक जवाब दे पाने में विफल रही बीजेपी लोकसभा और कुछ राज्यों के विधानसभा चुनाव नजदीक आते देख प्रलोभन भरी घोषणाएं कर और तरह-तरह के हथकंडे अपनाकर अपनी असफलताओं पर पर्दा डाल रही है. मायावती ने कहा कि केंद्र सरकार ने अपरिपक्व तरीके से नोटबंदी कर आर्थिक इमर्जेंसी लगाई, जिससे मजदूरों, किसानों, छोटे व्यापारियों और मेहनतकश लोगों का उत्पीड़न हुआ और 100 से ज्यादा गरीबों की मौत हो गई.

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अब बीजेपी के पास नोटबंदी के नाम पर सांत्‍वना देने के लिये भी कुछ नहीं बचा, क्योंकि भारतीय रिजर्व बैंक के आंकड़ों ने नोटबंदी की हकीकत उजागर कर दी है. बीजेपी सरकार को कम से कम अब तो इस राष्ट्रीय त्रासदी को अपनी गलती मानकर माफी मांगनी चाहिये. उन्होंने कहा कि जहां तक अजा...अजजा कानून के दुरुपयोग की आशंकाओं का सवाल है तो अगर वर्तमान राज्य सरकारें उत्तर प्रदेश में बसपा की पिछली सरकार की तरह ‘सर्वजन हिताय सर्वजन सुखाय’ की नीति के आधार पर काम करें तो इस कानून का दुरुपयोग नहीं हो सकता.

बसपा प्रमुख ने कहा कि उनकी पार्टी गठबंधन के खिलाफ नहीं है, लेकिन इस बारे में उसका शुरू से ही स्पष्ट नजरिया है कि वह किसी भी दल के साथ तभी कोई गठबंधन करेगी, जब उसे सम्मानजनक सीटें मिलेंगी. वरना हमारी पार्टी अकेले ही चुनाव लड़ना बेहतर समझती है.

(इनपुट: एजेंसी भाषा)