UPPCL PF SCAM: सीबीआई ने पूर्व चेरयमैन और एमडी से 4323 करोड़ के घोटाले में की पूछताछ

सीबीआई ने यूपीपी​सीएल कर्मचारियों के भविष्य निधि का पैसा दीवान हाउसिंग फाइनेंस लिमिटेड (DHFL) में निवेश करने के संबंध में तत्कालीन चेयरमैन आलोक कुमार और पूर्व एमडी अपर्णा से पूछताछ की.  

UPPCL PF SCAM: सीबीआई ने पूर्व चेरयमैन और एमडी से 4323 करोड़ के घोटाले में की पूछताछ
फाइल फोटो

लखनऊ: केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने उत्तर प्रदेश पॉवर कॉर्पोरेशन लिमिटेड (UPPCL) के 4323 करोड़ रुपये के भविष्य निधि घोटाले (PF SCAM) के संबंध में दो पूर्व अधिकारियों से पूछताछ की. सीबीआई ने यूपीपी​सीएल कर्मचारियों के भविष्य निधि का पैसा दीवान हाउसिंग फाइनेंस लिमिटेड (DHFL) में निवेश करने के संबंध में तत्कालीन चेयरमैन आलोक कुमार और पूर्व एमडी अपर्णा से पूछताछ की.

आपको बता दें कि बीते साल नवंबर में यूपीपी​सीएल के तत्कालीन चेयरमैन व प्रमुख सचिव ऊर्जा रहे आलोक कुमार को योगी सरकार ने पीएफ घोटाले में उनकी संलिप्तता को लेकर पद से हटा दिया था. उनकी जगह अरविंद कुमार को यूपीपीसीएल का नया चेयरमैन बनाया गया था. वहीं, अपर्णा मार्च 2017 में यूपीपीसीएल के प्रबंध निदेशक पद पर तैनात थीं.

यूपीपीसीएल पीएफ घोटाले मई 2017 से शुरू हुआ था, जब हजारों कर्मचारियों के भविष्य निधि का करोड़ों रुपया बैंक से निकालकर खस्ताहाल कंपनी डीएफएचएल में निवेश कर दिया गया था. योगी सरकार ने इस घोटाले की जांच के लिए पहले एसआईटी गठित की थी. बाद में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने घोटाले की जांच सीबीआई को सौंपने का फैसला किया था. सीबीआई ने इसी साल मार्च में 4323 करोड़ रुपये के इस घोटाले में अपनी जांच शुरू की.

सीबीआई द्वारा इस मामले में दर्ज की गई एफआईआर के मुताबिक यूपी सरकार ने यूपीपीसीएल के हजारों कर्मचारियों के भविष्य निधि के पैसों की देखभाल और बेहतर ब्याज के लिए 'उतर प्रदेश स्टेट पॉवर सेक्टर इम्पलाइज ट्रस्ट' और 'उतर प्रदेश पॉवर कॉरपोरेशन अशंदायी भविष्य निधि' का गठन किया था. केन्द्र सरकार के निर्देशानुसार बेहतर ब्याज के लिए भविष्य निधि के पैसे को 1 से 3 साल तक के लिए सरकारी बैंकों में जमा कराया जा सकता है.

सीबीआई ने अपनी एफआईआर में आरोप लगाया कि 'उतर प्रदेश स्टेट पॉवर सेक्टर इम्पलाइज ट्रस्ट' के ट्रस्टी प्रवीण कुमार गुप्ता और सुधांशु द्विवेदी ने बैंकों से पैसे निकालकर प्राइवेट कंपनी डीएचएफएल में जमा करवा दिए. आरोप के मुताबिक कर्मचारियों के सामान्य भविष्य निधि से 2631 करोड़ रुपये और अंशदायी भविष्य निधि से 1491 करोड़ रुपये डीएचएफएल में जमा कराए गए. हालांकि, बाद में 1855 करोड़ रुपये वापस निकाल लिए गए, बावजूद इसके करोड़ों रुपये डूब गये.

सीबीआई ने अपनी जांच में पाया कि कुल 4323 करोड़ रुपये DHFL समेत दूसरी हाउसिंग कंपनियों में मई 2017 से जुलाई 2019 तक जमा किये गये थे. इसी दौरान UPPCL के चेयरमैन 1988 बैच के IAS अफसर आलोक कुमार थे और MD 2001 बैच की IAS अपर्णा थीं. CBI से पहले यूपी पुलिस ने नवंबर 2019 में लखनऊ में मामला दर्ज कर दोनों ट्रस्टी को गिरफ्तार किया था.

दीवान हाउसिंग फाइनेंस लिमिटेड देश की नामी 50 कंपनियों में गिनी जाती थी. लेकिन आरोप है कि DHFL ने लोगों के पैसों को शेल कंपनियों के जरिए अपने खातों में जमा कर लिए. प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने डीएचएफएल के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग का मामला दर्ज जांच शुरू की. प्रवर्तन निदेशालय को जांच में दाउद के साथी रहे गैंगस्टर इकबाल मिर्ची का डीएचएफएल के साथ लिंक मिले. येस बैंक Yes Bank के 3700 करोड़ रुपये के घोटाले का तार भी DHFL से जुड़े मिले हैं. इसके बाद ED ने DHFL के दोनों प्रमोटर कपिल वाधवान और धीरज वाधवान को गिरफ्तार किया था.