जानिए कौन है चित्रकूट जेल में मारा गया अंशुल दीक्षित, छात्र राजनीति से निकल अपराध की दुनिया में रखा था कदम

27 अक्टूबर 2013 को अंशु दीक्षित ने भोपाल में एमपी पुलिस और यूपी एसटीएफ की टीम पर गोली चला दी थी. इस गोलीबारी में एसटीएफ के दरोगा संदीप मिश्र और भोपाल क्राइम ब्रांच का सिपाही राघवेंद्र पांडेय घायल हो गए थे. 

जानिए कौन है चित्रकूट जेल में मारा गया अंशुल दीक्षित, छात्र राजनीति से निकल अपराध की दुनिया में रखा था कदम
गैंगस्टर अंशुल दीक्षत ( फाइल फोटो).

चित्रकूट: चित्रकूट जिला जेल में बंद शार्प शूटर कैदी अंशुल दीक्षित ने शुक्रवार को ताबड़तोड़ फायरिंग कर पश्चिम यूपी के बड़े बदमाश मुकीम काला और मेराजुद्दीन को गोलियों से भून डाला. जवाबी कार्रवाई में पुलिस ने अंशू को भी मार गिराया. अंशुल दीक्षित भी बेहद शातिर अपराधी था. कुछ साल पहले एक दूसरे जेल से आए उसके वीडियो से ये साफ होता है कि उसका जेलों में क्या रसूख था.

अंशुल दीक्षित सीतापुर जिले के मानकपुर कुड़रा बनी का रहने वाला था. लखनऊ यूनिवर्सिटी में एडमिशन के बाद वह कई अपराधियों के संपर्क में आया. उस पर यूनिवर्सिटी के सेक्रेट्ररी विनोद त्रिपाठी और गौरव सिंह की हत्या का भी आरोप था. इसके अलावा लखनऊ के सीएमओ हत्याकांड में भी वह आरोपी रह चुका है. जीआरपी की कस्टडी से वर्ष 2013 में वह उस समय भाग गया था. जब उसे पेशी पर ले जाया जा रहा था. साल 2008 में वह बिहार के गोपालगंज में अवैध असलहों के साथ पकड़ा गया था. 

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एमपी पुलिस और यूपी एसटीएफ पर चला दी थी गोली
27 अक्टूबर 2013 को अंशु दीक्षित ने भोपाल में एमपी पुलिस और यूपी एसटीएफ की टीम पर गोली चला दी थी. इस गोलीबारी में एसटीएफ के दरोगा संदीप मिश्र और भोपाल क्राइम ब्रांच का सिपाही राघवेंद्र पांडेय घायल हो गए थे. इसके बाद मध्य प्रदेश पुलिस ने अंशु की गिरफ्तारी पर 10 हजार रुपये का इनाम घोषित किया था.

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यूपी एसटीएफ ने मुठभेड़ में किया था गिरफ्तार
5 दिसंबर 2014 को एसटीएफ को सूचना मिली कि अंशु गोरखपुर में मौजूद है और वहां से नेपाल भागने की फिराक में है. इसके बाद एसटीएफ की टीम ने सर्विलांस की मदद से उसकी घेराबंदी की. गोरखनाथ इलाके में थोड़ी देर मुठभेड़ चली और उसी दौरान अंशु को गिरफ्तार कर लिया गया. अंशु के पास से 9 एमएम की पिस्टल और अन्य सामान मिले थे. 

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क्या है पूरा मामला ?
दरअसल, भोपाल से फरारी काट चुके पश्चिमी यूपी के कुख्यात बदमाश अंशु दीक्षित ने शुक्रवार सुबह करीब 10 बजे मुकीम काला और मेराज अली को मारने के बाद पांच कैदियों को बंधक बना लिया. पुलिस ने अंशु को उन्हें छोड़ने की बात कही. लेकिन वह नहीं माना. आखिरकार वह पुलिस की गोली का शिकार बन गया. हालांकि, ये तीनों कैदी बेहद खतरनाक अपराधी थे. इन्होंने न सिर्फ कई परवारों के चिराग बुझाएं बल्कि दर्जनों मासूमों पर भी जुर्म किए.  

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