सीएम रावत ने किया दून को 'स्मार्ट' बनाने के लिए किया 575 करोड़ की योजनाओं का शिलान्यास

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने कहा कि तकनीक के बिना स्मार्ट सिटी की परिकल्पना नहीं की जा सकती है. 

सीएम रावत ने किया दून को 'स्मार्ट' बनाने के लिए किया 575 करोड़ की योजनाओं का शिलान्यास
मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने स्मार्ट सिटी मिशन के अंतर्गत कुल 575 करोड़ रूपए की योजनाओं का शिलान्यास किया.

देहरादून: आखिरकार देहरादून को स्मार्ट सिटी बनाने की दिशा में प्रदेश सरकार ने शुरुआत कर दी है. रविवार को मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने देहरादून शहर के लिए सात बड़ी योजनाओं का शिलान्यास किया. स्मार्ट सिटी में 205 करोड़ रुपए से ग्रीन बिल्डिंग बनेगी. इसमें राज्य सरकार के कई विभागों के ऑफिस होंगे. इसके अलावा 190 करोड़ रुपए से स्मार्ट सड़कें बनाई जाएंगी. स्मार्ट सिटी में देहरादून का चयन तीसरे चरण में किया गया था.

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने स्मार्ट सिटी मिशन के अंतर्गत कुल 575 करोड़ रूपए की योजनाओं का शिलान्यास किया. इनमें दून लाईब्रेरी करीब साढ़े 12 करोड़, पलटन बाजार विकास की लागत 13 करोड़, वर्षा जल निकासी लागत 16 करोड़, परेड ग्राउन्ड जीर्णोद्धार लागत 21 करोड़, सीवरेज लागत 28 करोड़, पेयजल सम्वर्धन व वाटर मीटरिंग लागत साढ़े 32 करोड़, स्मार्ट वॉटर मैनेजमेंट लागत 57 करोड़, स्मार्ट रोड लागत 190 करोड़, इंटीग्रेटेड ऑफिस काम्प्लैक्स ग्रीन बिल्डिंग लागत 205 करोड़ की योजनाएं शामिल हैं. पिछले साल से अब तक शहर में कई जगह अतिक्रमण हटाकर स्मार्ट सिटी की बुनियाद रखी गई.

इस मौके पर मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने कहा कि तकनीक के बिना स्मार्ट सिटी की परिकल्पना नहीं की जा सकती है. सरकार, तकनीक के माध्यम से जनसुविधाओं में सुधार करने की कोशिश कर रही है. स्मार्ट दून के लिए पिछले कुछ समय में बहुत तेजी से काम हुआ है. आने वाले समय में बदला हुआ दून दिखेगा. स्मार्ट दून की तरफ आगे बढ़ने में दून वासियों का भी पूरा सहयोग मिल रहा है. 

सिटी के प्रमुख मार्गों पर अंडरग्राउन्ड केबलिंग की जाएगी. इसके अलावा सरकारी भवनों पर सौर ऊर्जा का काम शुरू हो चुका है. राज्य सरकार धीरे-धीरे ग्रीन एनर्जी की ओर बढ़ रही है. स्मार्ट सिटी के तहत देहरादून शहर का चयन काफी देर से हुआ अब राज्य सरकार ने इस के कामों की शुरुआत कर दी है. देखना यह होगा कि कब तक शहर में काम शुरू हो पाते हैं और कब यह अव्यवस्थित शहर स्मार्ट बन पाता है.