'एकल अभियान' को जनांदोलन बनाने के लिए लखनऊ में 16 फरवरी से 'परिवर्तन कुंभ'

17 फरवरी को 'राष्ट्र निर्माण' के इस बड़े अभियान का विधिवत उद्घाटन मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ करेंगे जबकि 18 फरवरी को इसके समापन पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह मौजूद रहेंगे. 

'एकल अभियान' को जनांदोलन बनाने के लिए लखनऊ में 16 फरवरी से 'परिवर्तन कुंभ'

विशाल रघुवंशी/लखनऊ:  देश के दूरदराज के क्षेत्रों, गांवों और आदिवासियों के इलाके में पिछड़े और वंचित तबके के बच्चों तक शिक्षा का उजाला फैलाने के लिए लखनऊ में 16 फरवरी से 'एकल परिवर्तन कुंभ' की शुरुआत की जाएगी, जिसमें करीब 2.5 लाख लोगों के शामिल होने की उम्मीद है. 17 फरवरी को 'राष्ट्र निर्माण' के इस बड़े अभियान का विधिवत उद्घाटन मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ करेंगे जबकि 18 फरवरी को इसके समापन पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह मौजूद रहेंगे. 16 फरवरी के कार्यक्रम में साध्वी ऋतंभरा भी शामिल होंगी. इस अभियान के साथ इस बार पर्यावरण की रक्षा का बड़ा उद्धेश्य  भी जोड़ा गया है जिसके लिए  'एकल परिवर्तन कुंभ' के दौरान 'एक छात्र-एक पेड़' कार्यक्रम के तहत छात्रों द्वारा पौधों को भी गोद लिया जाएगा.  लखनऊ में हुई एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में पूरे कार्यक्रम की जानकारी 'एकल अभियान ट्रस्ट बोर्ड' के ट्रस्टी लक्ष्मी नारायण गोयल ने दी. इससे पहले इस महात्वाकांक्षी कार्यक्रम की सफलता के लिए हवन भी किया गया.     

क्या हैं 'एकल अभियान'?
'राष्ट्र निर्माण' के मकसद से 1989 में एकल अभियान की शुरुआत हुई थी जिसके तहत देश के दूरदराज के इलाकों में 'एकल विद्यालय' खोले गए. ऐसे इलाकों के वंचित वर्ग के बच्चे भी शिक्षा पा सकें इसलिए एक शिक्षक के माध्यम से सभी विषयों की शिक्षा देने की ये अनूठी पहल है. पहले एकल विद्यालय की शुरुआत झारखंड में की गई जिनकी संख्या अब 1 लाख 21 हजार तक पहुंच चुकी है. ये अभियान 27 राज्यों के 360 जिलों तक पहुंच चुका है. उत्तर प्रदेश में एकल विद्यालयों की संख्या करीब 22 हजार तक हो चुकी है. इन एकल विद्यालयों के जरिए चार लाख गांवों में परिवर्तन, समाज सुधार और विकास की योजनाएं चलाई जा रही हैं. 

लखनऊ में कार्यक्रम   
लखनऊ में 'एकल अभियान ट्रस्ट बोर्ड' के ट्रस्टी लक्ष्मी नारायण गोयल ने बताया कि 16 फरवरी के पहले दिन लखनऊ के रमाबाई आंबेडकर मैदान में उत्तर भारत के 20 हजार गांवों से स्वराज सैनिक और सेनानी भी सम्मेलन में शामिल होंगे.  श्री गोयल ने बताया कि अगले दो दिनों में  17 और 18 फरवरी को डॉ राम मनोहर लोहिया राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय के डॉक्टर भीमराव आंबेडकर सभागार में 'परिवर्तन कुंभ' की शुरुआत होगी. इस दौरान पांच साल की कार्ययोजना पर मंथन होगा तो पिछले पांच साल में हासिल की गईं उपलब्धियों की समीक्षा भी की जाएगी. उन्होंने बताया कि एकल विद्यालयों के जरिए 30 लाख से अधिक छात्रों को बुनियादी शिक्षा के साथ 'राष्ट्र धर्म सर्वोपरि' और भारतीयता के संस्कारों की भी शिक्षा दी जा रही है. इसके साथ ही बचपन से दी जाने वाली कंप्यूटर शिक्षा भी एक अभियान की शिक्षा पद्धति का अहम हिस्सा है. 

लखनऊ में 'लघु भारत' की झांकी
तीन दिन के इस आयोजन में लखनऊ में एक लघु भारत जैसा बस जाएगा. 16 फरवरी को रमाबाई आम्बेडकर पार्क तक पहुंचने से पहले लखनऊ की 6 जगहों पर शोभायात्रा यात्रा भी निकाली जाएगी. एकल अभियान के लिए देश भर में चलाए जा रहे कुटीर उद्योगों की जानकारी देने के  लिए एक प्रदर्शनी भी आयोजित होगी. एकल परिवर्तन कुंभ  में शामिल होने के लिए देशभर से आने वाले लोगों के लिए  खाने-पीने का इंतजाम  बहुत से स्वयंसेवक कर रहे हैं। परिवर्तन कुंभ में आने वाले ढाई लाख लोगो के लिए रुकने और खाने की सारी व्यवस्था लखनऊ निवासियों की मदद से उनके घरों पर की जा रही हैय 

'एकल अभियान' एक जन अभियान
'एकल अभियान ट्रस्ट बोर्ड' के ट्रस्टी लक्ष्मी नारायण गोयल ने ये जानकारी भी दी कि एकल विद्यालय अभियान को ग्रामीण और आदिवासी बच्चों की शिक्षा में योगदान के लिए 2017 के गांधी शांति पुरस्कार से भी नवाजा जा चुका है. इस अभियान के तहत देश भर के चार लाख गांवों में बसे 30 करोड़ वन बंधुओं और ग्रामवासियों की मदद से विभिन्न सामाजिक योजनाएं भी चलाई जा रहीं हैं जो स्वाभिमान जागरण और राष्ट्रवाद की भावना को भी जन जन तक पहुंचा रहीं हैं. इनमें एकल विद्यालय योजना के अलावा, आरोग्य योजना, ग्रामोत्थान योजना, ग्राम स्वराज योजना और श्रीहरि कथा प्रसार जैसी योजनाएं संचालित हो रही हैं.