8 दिन बाद खत्म हुई ट्रांसपोर्टर्स की देशव्यापी हड़ताल, मांगों के लिए बनाई कमेटी

विभिन्न मागों को लेकर चल रही यह हड़ताल 20 जुलाई से शुरू हुई थी. हड़ताल खत्चाम होने के बाद अब ट्रांसर्पोटेशन का काम शुरू हो जाएगा.

8 दिन बाद खत्म हुई ट्रांसपोर्टर्स की देशव्यापी हड़ताल, मांगों के लिए बनाई कमेटी
सपोर्टरों को राज्य में पर्यटन बस और स्कूल बस ऑपरेटरों के अलावा भारत के विभिन्न संगठनों का समर्थन मिला. (फाइल फोटो)

नई दिल्ली: केंद्र सरकार से वार्ता के बाद आठ दिनों से चल रही ट्रांसपोर्टरों की देशव्यापी अनिश्चितकालीन हड़ताल शुक्रवार (27 जुलाई) को खत्म हो गई. देशभर में हुई इस हड़ताल से करीब 30,000 करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान हुआ. विभिन्न मागों को लेकर चल रही यह हड़ताल 20 जुलाई से शुरू हुई थी. इसके चालू होने से अब ट्रांसर्पोटेशन का काम शुरू हो जाएगा. आठ दिनों से चलने वाली इस हड़ताल के समाप्त होने पर व्यापारियों ने राहत की सांस ली है. केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने इसका ऐलान किया. केंद्रीय मंत्री ने कहा कि ट्रांसपोर्टरों की कुछ मांगे पहले ही पूरी कर ली गई थी, बाकी मांगों के लिए कमेटी बनाई गई है. हड़ताल खत्‍म होने को लेकर केंद्रीय परिवहन और हाइवे मंत्रालय व ऑल इंडिया मोटर ट्रांसपोर्ट कांग्रेस (एआईएमटीसी) ने कई दौर की बैठकों के बाद संयुक्‍त व्‍यक्‍तव्‍य जारी किया.  

ट्रांसपोर्टरों को राज्य में पर्यटन बस और स्कूल बस ऑपरेटरों के अलावा भारत के विभिन्न संगठनों का समर्थन मिला. हड़ताल के दौरान देश भर में करीब 93 लाख और महाराष्ट्र में लगभग 16 लाख ट्रकों के पहिए थमे रहे. हड़ताल की मांगों में डीजल की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी, अधिक टोल शुल्क, भारी बीमा दर, जीएसटी और ई-वे बिल का बोझ, स्कूल बसों के लिए टोल छोड़ने और बंदरगाह की भीड़ को कम करना शामिल था. ट्रांसपोर्टर असोसिएशन का दावा है कि केवल महाराष्ट्र में करीब 5000 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है.

हड़ताल से पहले सरकार ने ट्रांसपोर्टरों को मनाने की खूब कोशिश की. खुद केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने उनकी मांगों के संदर्भ में कुछ ऐलान किए थे. इनमें ट्रकों के एक्सल लोड में 25-35 फीसद तक की बढ़ोतरी, साल के बजाय दो साल में फिटनेस सर्टिफिकेट तथा ओवरलोडिंग पर टोल जुर्माने में कमी जैसे अहम एलान शामिल हैं.