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उन्नाव रेप केस में विधायक कुलदीप सिंह सेंगर की मुश्किलें बढ़ीं, फर्जी आर्म्स एक्ट में आरोप तय किए गए

कोर्ट ने कहा प्रथम दृष्टया ये पाया गया कि इस मामले में बड़ी साजिश रची गई है. 

उन्नाव रेप केस में विधायक कुलदीप सिंह सेंगर की मुश्किलें बढ़ीं, फर्जी आर्म्स एक्ट में आरोप तय किए गए
अब सभी आरोपियों के खिलाफ आर्म्स एक्ट के झूठे मामले में फंसाने के मामले में केस चलेगा

राकेश सिंह. नई दिल्ली: उन्नाव रेप केस में बाहुबली विधायक कुलदीप सिंह सेंगर समेत अन्य आरोपियों के खिलाफ दिल्ली का तीस हजारी कोर्ट ने आर्म्स एक्ट के झूठे मामले में फसाने के मामले में आरोप तय कर दिए हैं. कोर्ट ने कहा प्रथम दृष्टया ये पाया गया कि इस मामले में बड़ी साजिश रची गई है. पुलिस वहां पहुंची लेकिन इस मामले में कोई हस्तक्षेप नहीं किया और पोस्टमार्टम के दौरान पीड़िता के शरीर पर 14 गंभीर चोट के निशान थे. 

इस मामले में कुलदीप सिंह सेंगर के अलावा माखी पुलिस थाने के तत्कालीन प्रभारी अशोक सिंह भदौरिया, सब-इंस्पेक्टर कामता प्रसाद सिंह, कॉन्स्टेबल आमिर खान, बाहुबली विधायक कुलदीप के भाई अतुल सिंह सेंगर समेत चार अन्य लोगो को आरोपी बनाया गया था. अब सभी आरोपियों के खिलाफ आर्म्स एक्ट के झूठे मामले में फंसाने के मामले में केस चलेगा और सीबीआई के चार्जशीट के मुताबिक गवाहियां होंगी.

बढ़ती ही जा रही हैं कुलदीप की मुश्किलें
उन्नाव रेप मामले में बीते शुक्रवार को दिल्ली की तीस हजारी कोर्ट ने ही बीजेपी के पूर्व विधायक कुलदीप सेंगर के खिलाफ रेप, पॉक्सो, अपहरण की धाराओं में आरोप तय किए थे. इससे पहले कोर्ट की ओर से जारी प्रोडक्शन वारंट के बाद कुलदीप सिंह सेंगर को दिल्ली की तीस हजारी कोर्ट में पेश किया गया था जिसके बाद कोर्ट ने सेंगर को तिहाड़ जेल भेज दिया था. सुप्रीम कोर्ट ने पांच मामले में से रोड एक्सिडेंट को छोड़कर बाकी चार मामले को तीस हजारी कोर्ट में ट्रांसफर किए गए थे. ये 5 केस जिला जज धर्मेश शर्मा की कोर्ट में ट्रांसफर हुए हैं. तीस हजारी कोर्ट को 45 दिन में ट्रायल पूरा करना है. 

 

इस मामले में दिन प्रतिदिन दिन (डे टू डे हेयरिंग) सुनवाई होनी है. इसके अलावा पीड़िता को एम्स में भर्ती करने को लेकर परिवार की राय मांगी गई है.कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार को निर्देश दिया था कि वो पीड़ित परिवार को ₹25 लाख का मुआवजा दे. यूपी सरकार ने बताया था कि पीड़ित को 25 लाख का अंतरिम मुआवजा दिया जा चुका है. कोर्ट की मीडिया को हिदायत दी थी कि उन्नाव कांड को रिपोर्ट करते वक्त किसी भी तरह पीड़ित की पहचान का खुलासा ना हो.