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Hapur RSS Leader Death Case/ अभिषेक माथुर: हापुड़ के हाफिजपुर थाना क्षेत्र में आरएसएस कार्यकर्ता सतीश की ट्रैक्टर से कुचलकर हुई मौत के मामले में अब पुलिस का चौंकाने वाला रुख सामने आया है. एक तरफ जहां पीड़ित परिवार और चश्मदीद ग्रामीण चीख-चीख कर कह रहे हैं कि रफ्तार टोकने पर मुस्लिम ट्रैक्टर चालक कलीम ने जानबूझकर सतीश पर ट्रैक्टर चढ़ाकर उनकी हत्या की, वहीं जिले की पुलिस इस पूरे हत्याकांड को महज़ एक सड़क हादसा साबित करने पर आमादा दिख रही है.
पुलिस की कार्यशैली पर गंभीर सवाल
सोमवार देर रात की इस सनसनीखेज वारदात के बाद अब हापुड़ के पुलिस अधीक्षक ज्ञानंजय सिंह का जो आधिकारिक बयान आया है, उसने खाकी की नीयत और कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. आरोप लग रहे हैं कि जिले में लगातार बढ़ रहे अपराध और अवैध खनन की नाकामी को छिपाने के लिए पुलिस अब मामले को भटकाने और दबाने की स्क्रिप्ट तैयार कर रही है. हाफिजपुर के महमूदपुर में संघ के खंड सह-संपर्क प्रमुख सतीश की मौत के बाद गांव में तनाव और मातम पसरा है.
मामले में परिजनों ने लगाए आरोप
परिवार का आरोप है कि कलीम रात के अंधेरे में अवैध खनन की मिट्टी ढो रहा था, जब सतीश ने आबादी के बीच से तेज रफ्तार में भाग रहे ट्रैक्टर को रोकने की कोशिश की, तो कलीम ने तैश में आकर सीधे उनके ऊपर गाड़ी चढ़ा दी, लेकिन हैरान करने वाली बात यह है कि हापुड़ पुलिस इसे हत्या मानने तक को तैयार नहीं है. पुलिस कप्तान का कहना है कि यह पहली नजर में सिर्फ एक सड़क दुर्घटना है. पुलिस की थ्योरी के मुताबिक, कलीम कोई पेशेवर खनन माफिया नहीं बल्कि एक अकुशल चालक था और उसकी सतीश से कोई पुरानी दुश्मनी नहीं थी.
हापुड़ एसपी ने क्या कहा?
सवाल यह उठता है कि क्या किसी को गाड़ी से रौंदने के लिए पुरानी दुश्मनी होना जरूरी है? क्या मौके पर हुए विवाद में सीधे इंसान पर ट्रैक्टर चढ़ा देना कत्ल के दायरे में नहीं आता? हापुड़ एसपी ज्ञानंजय सिंह ने कहा कि सतीश की मृत्यु प्रथम दृष्टया दुर्घटना में आई गंभीर चोटों के कारण हुई है. दोनों के बीच पूर्व में कोई रंजिश नहीं थी. ट्रैक्टर चालक अकुशल था, जो आगे चलकर खुद खाई में पलटकर घायल हो गया. मिट्टी कृषि कार्य के लिए एक खेत से दूसरे खेत में ले जाई जा रही थी. तहरीर पर मुकदमा दर्ज कर जांच की जा रही है.
क्या कह रहा है पीड़ित परिवार?
पुलिस के इस बयान ने आग में घी डालने का काम किया है. पीड़ित परिवार का कहना है कि पुलिस का पूरा ध्यान आरोपी कलीम की तीमारदारी और उसकी तरफदारी पर टिका है. मेरठ मेडिकल कॉलेज में भर्ती कलीम के घायल होने का हवाला देकर पुलिस उसे एक तरह से बेकसूर या नौसिखिया साबित करने में लगी है, जबकि सतीश के अनाथ हो चुके तीन मासूम बच्चों और रोती-बिलखती बुजुर्ग मां के आंसुओं पर अफसरों की जुबान खामोश है.
क्या है पुलिस का दावा?
इतना ही नहीं, पुलिस ने अवैध खनन पर भी अजीबोगरीब पर्दा डाला है. पुलिस का दावा है कि वहां कोई खनन नहीं हो रहा था, बल्कि खेत सुधार के नाम पर मिट्टी एक जगह से दूसरी जगह जा रही थी. सवाल खड़ा होता है कि अगर रात के सन्नाटे में तेज रफ्तार से मिट्टी ढोई जा रही थी, तो क्या स्थानीय थाने की पुलिस को इसकी भनक तक नहीं थी? या फिर पुलिस की मिलीभगत से ही यह सारा खेल चल रहा था?
हादसा बताकर पल्ला झाड़ने की जल्दबाजी में पुलिस
आपको बता दें, हापुड़ में पिछले 15 दिनों से लगातार संगीन वारदातें और मर्डर की घटनाएं सामने आ रही हैं. इसमें चाहे बीच सड़क पर हथौड़े से हत्या करना हो, या फिर मामूली स्कूटी की टक्कर के बाद युवक की जान लेना हो, लेकिन जमीनी स्तर पर रोकथाम करने के बजाय पुलिस महकमा केवल कागजी खानापूर्ति और लीपापोती तक सीमित रह गया है. इस पूरे मामले में अब तक पुलिस की कार्रवाई के नाम पर सिर्फ एक एफआईआर दर्ज हुई है. न तो अवैध खनन के सिंडिकेट पर कोई कड़ा प्रहार हुआ, न ही उन अफसरों पर कोई जवाबदेही तय की गई जिनकी नाक के नीचे यह धंधा चल रहा था, लेकिन इन सब के बीच फिलहाल, सतीश के घर का चूल्हा बुझ चुका है. बुजुर्ग मां इंसाफ की भीख मांग रही है और संघ कार्यकर्ता की मौत पर पूरे इलाके में गहरा आक्रोश है. मगर हापुड़ पुलिस इसे महज एक हादसा बताकर पल्ला झाड़ने की जल्दबाजी में है.
आखिर पुलिस हत्यारोपी कलीम को अकुशल ड्राइवर बताकर किसके दबाव में बचाना चाहती है? और अवैध खनन को कृषि कार्य का नाम देकर किस सिंडिकेट पर पर्दा डाला जा रहा है?