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...जब जच्चा की जान पर भारी पड़ी सड़क, परिजन बांस के डंडों में बांधकर ले गए अस्पताल

परिजनों ने बताया कि महिला अपने घर से 131 किलोमीटर दूर देहरादून के श्रीमहंत इंदिरेश अस्पताल में भर्ती है, जहां उसका इलाज चल रहा है और उसकी हालत गंभीर बनी हुई है. 

...जब जच्चा की जान पर भारी पड़ी सड़क, परिजन बांस के डंडों में बांधकर ले गए अस्पताल
बीमार महिला को बांस के डंडे में बांधकर लेकर जाते महिला के परिजन.

देहरादून: उत्तराखंड में स्वास्थ्य सेवाएं कितनी बदहाल है, ये कहना नया नहीं है. सरकार लाख दावे करें, लेकिन हकीकत वहां, रहने वाले लोग अच्छे से जानते है. ताजा मामला देहरादून के दुर्गम क्षेत्र चकराता तहसील का है, जहां एक 23 साल जच्चा की तब जान पर बन आई, जब मां बनने के बाद उसकी अचानक तबीयत खराब होने लगी हुई.

दरअसल, रीना चौहान की कुछ दिन पहले डिलीवरी हुई थी और उसके बाद उसकी तबीयत बिगड़ती चली गई. घरवालों के सामने मुसीबत ये थी कि उसे अस्पताल लेकर कैसे जाया जाए. मंगलवार को प्रसूता की तबियत अधिक बिगड़ी तो आनन-फानन में परिजनों ने उसे अस्पताल ले जाया गया, क्षेत्र में सड़क नहीं होने के कारण परिजन रीना को बांस के डंडों में बांधकर लोखंडी रोड हैड तक 14 किलोमीटर की खड़ी चढ़ाई चढ़नी पड़ी. 

परिजन इसे करीब 72 किमी दूर सीएचसी विकासनगर लेकर पहुंचे, लेकिन यहां भी डॉक्टरों ने अधिक रक्तस्राव होने के कारण रीना को हायर सेंटर रेफर कर दिया. परिजनों ने बताया कि महिला अपने घर से 131 किलोमीटर दूर देहरादून के श्रीमहंत इंदिरेश अस्पताल में भर्ती है, जहां उसका इलाज चल रहा है और उसकी हालत गंभीर बनी हुई है.

 

अब सवाल ये खड़ा होता है कि क्या विकासनगर, चकराता सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र रेफरल सेंटर मात्र ही बन चुके हैं. चकराता तहसील में यह बुरायला गांव करीब 14 किमी की दूरी पर स्थित है, जहां आज भी सड़क नहीं है, जबकि लम्बे समय से यह सड़क पीएमजीएसवाई में स्वीकृत है. गांव में करीब 24 परिवार रहते हैं.