उत्तराखंड: भारत के इस आखिरी गांव में विराजमान हैं बाबा बर्फानी, दिसंबर से मार्च तक मिलता है दर्शन

चमोली, पुष्कर चौधरी. अमरनाथ गुफा में बनने वाले शिवलिंग की तरह चमोली जिले के आखिरी गांव नीती के पास टिम्मरसैंण स्थित एक गुफा है जिसमें बर्फानी बाबा विराजते हैं. 

उत्तराखंड: भारत के इस आखिरी गांव में विराजमान हैं बाबा बर्फानी, दिसंबर से मार्च तक मिलता है दर्शन
सर्दियों में यहां करीब 10 फुट ऊंचा शिवलिंग बन जाता है.

चमोली, पुष्कर चौधरी. अमरनाथ गुफा में बनने वाले शिवलिंग की तरह चमोली जिले के आखिरी गांव नीती के पास टिम्मरसैंण स्थित एक गुफा है जिसमें बर्फानी बाबा विराजते हैं. यह गांव तिब्बत बॉर्डर के पास है. यहां बाबा बर्फानी सदियों से विराजमान हैं लेकिन स्थानीय लोगों को छोड़ दिया जाए तो कम ही लोग होंगे जिन्हें इस बर्फ के शिवलिंग के बारे में जानकारी होगी. श्रद्धालु इस शिवलिंग के दर्शन दिसंबर से मार्च महीने तक कर सकते हैं. 

दिसंबर से मार्च के बीच होते हैं दर्शन
दरअसल, टिम्मरसैंण में पहाड़ी पर स्थित गुफा के अंदर एक शिवलिंग विराजमान है. सर्दियों में इसपर बर्फ जमने से करीब 10 फुट ऊंचा शिवलिंग बन जाता है. इस शिवलिंग पर पहाड़ी से टपकने वाले जल से हमेशा अभिषेक होता रहता है. स्थानीय लोग बताते हैं कि शीतकाल के बाद जब बर्फ पिघलती है, तो यह शिवलिंग मूल आकार में आ जाता है. स्थानीय लोग इसे 'छोटा अमरनाथ' भी कहते हैं.

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आइटीबीपी के जवान भी करते हैं दर्शन
गुफा में हर साल 15 दिसंबर से 15 मार्च के बीच बर्फानी बाबा के दर्शन होते हैं. चीन सीमा पर तैनात आइटीबीपी (भारत-तिब्बत सीमा पुलिस बल) के जवान भी यहां दर्शन के लिए आते हैं. आइटीबीपी के जवान हीमवीर ने बताया कि हम यहां से गुजरते समय बाबा के दर्शन करने के बाद ही आगे जाते हैं. 

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दर्शन के लिए खड़ी चढ़ाई चढ़कर आते हैं लोग
देश के इस अंतिम गावं में बसे बाबा बर्फानी के दर्शन के लिए सड़क दो किलोमीटर की खड़ी चढ़ाई चढ़कर जाना होता है. आइटीबीपी के जवान और स्थानीय बताते हैं कि बाबा बर्फानी की गुफा के आस-पास बर्फ नहीं होती लेकिन ये बाबा जी की कृपा ही है कि गुफा के अंदर बर्फ का इतना विशाल शिवलिंग बन जाता है.