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15 मार्च 2020 तक दिल्ली-NCR में डीजल जनरेटर बंद, EPCA ने लगाया बैन

जनरेटर पर बैन को लेकर ईपीसीए ने स्टेट इलेक्ट्रिसिटी बोर्ड को इस बात का ध्यान रखने की हिदायत दी है कि जिन जगहों पर ज़रूरत है, वहां इलेक्ट्रिसिटी की उपलब्धता ठीक तरह से की जाए ताकि लोगों को परेशानी ना हो. पर्यावरण प्रदूषण नियंत्रण और संरक्षण प्राधिकरण के ग्रेप लागू करने की वजह दिल्ली-एनसीआर की हवा का एयर क्वॉलिटी इंडेक्स रेड जोन में पहुंचना है. 

15 मार्च 2020 तक दिल्ली-NCR में डीजल जनरेटर बंद, EPCA ने लगाया बैन
प्रतीकात्मक तस्वीर

नई दिल्ली: दिल्ली-एनसीआर (Delhi-NCR) में आज से प्रदूषण (Pollution) के बढ़ते खतरे को देखते हुए पर्यावरण प्रदूषण प्राधिकरण (Environmental Pollution Control Authority) ने डीजल जनरेटर (Diesel Generator) पर बैन लगा दिया है. ग्रेडेड रेस्पॉंस एक्शन प्लान अब से 15 मार्च 2020 तक लागू रहेगा. ऐसे में दिल्ली-एनसीआर में डीजल जनरेटर का इस्तेमाल नहीं किया जा सकेगा. डीजल जनरेटर के प्रतिबंध से उद्योगों के कामकाज पर असर पड़ेगा साथ ही सोसाइटी में रहने वाले लोगों को भी परेशानी का सामना करना पड़ेगा.

हालांकि जनरेटर पर बैन को लेकर ईपीसीए ने स्टेट इलेक्ट्रिसिटी बोर्ड को इस बात का ध्यान रखने की हिदायत दी है कि जिन जगहों पर ज़रूरत है, वहां इलेक्ट्रिसिटी की उपलब्धता ठीक तरह से की जाए ताकि लोगों को परेशानी ना हो. पर्यावरण प्रदूषण नियंत्रण और संरक्षण प्राधिकरण के ग्रेप लागू करने की वजह दिल्ली-एनसीआर की हवा का एयर क्वॉलिटी इंडेक्स रेड जोन में पहुंचना है. 

अधिकारियों को इस बात की हिदायत दी गई है कि ग्रेप के क्रियान्वयन में किसी तरह की ढिलाई न बरती जाए.  इसके साथ ही होटल, रेस्तरां एवं ढाबों में कोयला और लकड़ी नहीं जलाई जा सकेगी. वहीं,  पार्किंग के दरों में भी इजाफा किया गया है और लोगों को पब्लिक ट्रांसपोर्ट का इस्तेमाल करने की भी सलाह दी गई है.  

प्रदूषण की रोकथाम के लिए उठाए जा रहे कदम
- धूल प्रभावित क्षेत्रों में पानी का छिड़काव
- करीब 305 किलोमीटर की सड़क को डस्ट फ्री जोन बनाया
- लगातार शहर में किया जा रहा प्लांटेशन
- कूड़ा जलाने पर भारी भरकम लगाया जा रहा जुर्माना
- कंस्ट्रक्शन साइटों को तीन दिन में मलबा हटाने के निर्देश
- शहर में कंस्ट्रक्शन साइटों को ग्रीन शीट से ढकने के निर्देश
- बढ़ाई जा सकती हैं पार्किंग दरें

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वर्तमान समय में प्रदूषण के स्तर का बढ़ना खतरनाक है. जनरेटर चलाने पर अधिक खर्च आता है. साथ ही प्रदूषण के स्तर में बढ़ोतरी होती है. लेकिन बिजली के न आने से व्यवसाय पर बुरा असर पड़ रहा है. ऐसे में सप्लाई 24 घंटे होनी चाहिए. तभी इस पर रोक लगाया जा सकती है.