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पीएम मोदी को रोकने के लिए गठबंधन कर रहे SP-BSP और कांग्रेस जैसे दल :दिनेश शर्मा

उप मुख्यमंत्री शर्मा ने इस मौके पर कहा कि प्रधानमंत्री मोदी की मेहनत एवं ईमानदारी की प्रशंसा सिर्फ देश में ही नहीं बल्कि विदेशों में भी होती है. 

पीएम मोदी को रोकने के लिए गठबंधन कर रहे SP-BSP और कांग्रेस जैसे दल :दिनेश शर्मा
फोटो साभार : PTI

लखनऊ: उत्तर प्रदेश के उप मुख्यमंत्री दिनेश शर्मा ने गुरूवार को कहा कि दिन-रात मेहनत कर देश को प्रगति के पथ पर लगातार आगे ले जाते हुए और गांव, गरीब एवं समाज के सभी वर्गों के कल्याण के लिए काम कर रहे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को रोकने के लिए सपा-बसपा एवं कांग्रेस जैसे दल गठबंधन कर रहे हैं. शर्मा गुरूवार को बीजेपी के अनुसूचित जाति मोर्चा द्वारा स्थानीय विश्वेश्वरैया सभागार में आयोजित सामाजिक प्रतिनिधि बैठक में उपस्थित प्रतिनिधियों को संबोधित कर रहे थे.

विपक्षी दलों ने समाज को मूलभूत सुविधाओं से दूर रखा- शर्मा
उप मुख्यमंत्री शर्मा ने इस मौके पर कहा कि प्रधानमंत्री मोदी की मेहनत एवं ईमानदारी की प्रशंसा सिर्फ देश में ही नहीं बल्कि विदेशों में भी होती है. उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री आवास योजना, उज्ज्वला योजना, जनधन योजना, मुद्रा योजना और आयुष्मान भारत जैसी तमाम योजनाएं लागू कर मोदी ने समाज के उस वर्ग को लाभ पहुंचाया है जिसे कांग्रेस, सपा, बसपा जैसी सरकारों ने अपनी-अपनी सत्ता के दौरान मूलभूत सुविधाओं से भी वंचित रखा. 

सभी विपक्षी दल परिवारवाद में फंसे हैं- उप मुख्यमंत्री
शर्मा ने कहा कि सपा, बसपा और कांग्रेस जैसे दल लगातार कह रहें है कि मोदी सरकार ने कुछ नहीं किया. अगर मोदी सरकार ने कुछ नहीं किया, तो फिर इन दलों को गठबंधन की आवश्यकता क्यों पड़ रही है? समाज के सभी वर्गों के लोग यह जान चुके हैं कि परिवारवाद की राजनीति में फंसे सपा-बसपा और कांग्रेस जैसे दल कभी देश का भला नहीं करेंगे और न ही देश के नागरिकों का भला करेंगे.

SP-BSP की काट के लिए बीजेपी ने बिछाई सियासी बिसात
बता दें कि आगामी लोकसभा चुनावों के मद्देनजर सपा और बसपा के संभावित गठबंधन के मद्देनजर उनकी काट को खोजने के लिए योगी आदित्‍यनाथ सरकार नया जातीय समीकरण तैयार कर रही है. ये इसलिए भी अहम है, क्‍योंकि 11 दिसंबर को चुनावी राज्‍यों के नतीजे सामने आने के बाद अगर मध्‍य प्रदेश, छत्‍तीसगढ़, राजस्‍थान में बीजेपी को अपेक्षित नतीजे नहीं मिले तो आगामी लोकसभा चुनावों के मद्देनजर पूरा फोकस यूपी की तरफ शिफ्ट हो जाएगा. दरअसल, बीजेपी के नेतृत्‍व में 2014 के लोकसभा चुनावों में राज्‍य की 80 में से 73 सीटें एनडीए को मिली थीं. इसलिए विपक्ष बीजेपी को नुकसान पहुंचाने के लिए उसको यूपी में घेरने की ही सबसे ज्‍यादा कोशिश करेगा.

यूपी में विपक्ष की जातिगत गोलबंदी की योजना को देखते हुए सियासी जानकारों के मुताबिक यूपी सरकार प्रदेश में आरक्षण व्‍यवस्‍था में बंटवारे के बारे में सोच रही है. इस कड़ी में आरक्षण बंटवारे को लेकर गठित की गई सामाजिक न्याय समिति ने अपनी रिपोर्ट पिछले दिनों यूपी सरकार को सौंप दी है. सूत्रों के मुताबिक रिपोर्ट में सुझाव दिया गया है कि आरक्षण कोटे को जाति के आधार पर सब-कैटेगरी में बांटा जाए. 

7-11-9 का फॉर्मूला
उत्तर-प्रदेश पिछड़ा समाजिक न्याय समिति ने अपनी रिपोर्ट में ओबीसी के 27 फीसदी आरक्षण को 7-11-9 के फॉर्मूले पर बांटने की सिफारिश की है. समिति ने इसके लिए तीन वर्ग- पिछड़ा, अति पिछड़ा और सर्वाधिक पिछड़ा वर्ग बनाने का प्रस्ताव दिया है. मतलब, पिछड़ा वर्ग के लिए 7 फीसदी आरक्षण, अति पिछड़ा के लिए 11 फीसदी और सर्वाधिक पिछड़ा वर्ग को 9 फीसदी आरक्षण देने की सिफारिश की गई है. इस रिपोर्ट में पिछड़ा वर्ग में 12 जातियां, 59 जातियों को अति पिछड़ा और 79 जातियों को सर्वाधिक पिछड़ों की श्रेणी में रखा गया हैं.

उत्तर-प्रदेश पिछड़ा सामाजिक न्याय समिति का गठन 10 जून 2018 को योगी सरकार ने किया था. रिटायर्ड जस्टिस राघवेंद्र कुमार की अध्यक्षता में 3 सदस्यीय कमेटी का गठन किया गया था. कुछ दिन पहले ही इस कमेटी ने अपनी रिपोर्ट मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को सौंपी है और इस रिपोर्ट को परीक्षण के लिए समाज कल्‍याण विभाग को भेज दिया गया है.

7-7-8 का फॉर्मूला
समिति की रिपोर्ट में कहा गया है कि एससी और एसटी आरक्षण (कुल 22 फीसदी) को मिलाकर तीन सब कैटेगरी में बांट दिया जाए. दलित को 7 फीसदी, अति दलित को 7 फीसदी और महादलित को 8 फीसदी आरक्षण देने की बात कही गई है. दलित वर्ग में 4, अति दलित वर्ग में 32 और महादलित वर्ग में 46 जातियों को रखने की सिफारिश की गई है. सिर्फ इतना ही नहीं योगी सरकार लंबे समय से 17 अति पिछड़ी जातियों को अनुसूचित जाति की कैटेगरी में डालने के बारे में सोच रही थी. प्रदेश में जिन 17 जातियों को अनुसूचित जातियों के दायरे में लाने की बात की जा रही थी उनकी आबादी करीब 13.63 फीसदी है.

दरअसल, सपा और बसपा संभावित गठबंधन को देखते हुए बीजेपी को पता है कि उसके ओबीसी और दलित वोटबैंक में सेंध लगना तय है. इसलिए आरक्षण के जरिए नई बिसात बिछाई जा रही है.

(इनपुट भाषा से)