पौड़ी: दिव्यांग भाई बहनों का गीत संगीत है कमाल, बस सरकार से थोड़ी मदद की है दरकार

पौड़ी: दिव्यांग भाई बहनों का गीत संगीत है कमाल, बस सरकार से थोड़ी मदद की है दरकार

दृष्टिहीन भाई बहन आज भी संघर्षों से जूझकर कला और संस्कृति के क्षेत्र में अपने हुनर की एक नजीर पेश कर रहे हैं.

पौड़ी: दिव्यांग भाई बहनों का गीत संगीत है कमाल, बस सरकार से थोड़ी मदद की है दरकार

कपिल पंवार/पौड़ी: कहते हैं हौसले अगर बुलन्द हों तो आसमान में भी सुराग किया जा सकता है, कुछ इन्हीं हौसलों को समेटे एक दिव्यांग और गरीब परिवार के दो भाई और एक बहन आज भी संघर्षों से जूझकर कला और संस्कृति के क्षेत्र में अपने हुनर की एक नजीर पेश कर रहे हैं.
दिव्यांग होने के बाद भी कठिन परिस्थितियों को मात देता ये दिव्यांग और गरीब परिवार पौड़ी जनपद के कोटमण्डल गांव का रहने वाला है. बचपन में ही दो भाई और एक बहन किसी कारण दृष्टिहीन हो गए.

लेकिन, दृष्टिहीनता के बावजूद तीनों भाई बहनों ने हार नहीं मानी और संस्कृति और कला के क्षेत्र में अपने आप को तराशा. निर्मल और उनके भाई, बहन का गीत-संगीत कमाल का है. दिव्यांग निर्मल हारमोनियम और बांसुरी बजाने में माहिर हैं, वहीं बहन की सुरीली आवाज मन छू जाती है. जबकि एक और दृष्टिहीन भाई इन्हीं गीतों पर ताल देता है.

पर्यावरण को बचाने जैसे गीत संगीतों के साथ उत्तराखण्ड की पौराणिक संस्कृति को बचाने के लिये ये परिवार आज भी संघर्ष कर रहा है. संस्कृति के क्षेत्र में काम कर रहे इन दृष्टिहीन भाई बहनों पर अब तक सरकार की नजर नहीं पड़ी है. जिससे, इनके बेहतर मुकाम हासिल करने का सपना आज भी सपना बना हुआ है. लेकिन, कभी न हार मानने का जज्बा कायम है.

परिवार आज भी संघर्षों से आगे बढ़ने के लिए जी तोड़ प्रयास कर रहा है. आंखों की रोशनी खो चुके निर्मल बताते हैं कि उन्होंने देशहित में कार्य करने के सपने भी देखे थे. लेकिन शायद ये कुदरत को मंजूर न था.

हालांकि, इन दिव्यांग भाई बहनों को समाज कल्याण विभाग से 1000 रूपये प्रति व्यक्ति के तौर पर पेंशन मिलती है. लेकिन इस महंगाई के दौर में इससे भरण पोषण कर पाना मुश्किल होता है. दिव्यांग भाई बहनों की देखरेख इनके पिता करते हैं. लेकिन गरीबी और आर्थिक तंगी इस परिवार का पीछा नहीं छोड़ रही.

दिव्यांगों के इस हुनर और प्रतिभा की सुध सरकार ले कर इन्हें बेहतर मंच दिला सके इसके लिए गढ़वाल सांसद तीरथ सिंह रावत के सामने दिव्यांगों के संघर्ष को बयां किया गया. जिस पर गढ़वाल सांसद ने बताया की वे इस गांव का दौरा कर चुके हैं और दिव्यांगों के हुनर से अच्छी तरह वाकिफ हैं. सांसद ने कहा की इनकी शिक्षा के साथ ही इन्हें रोजगार देने के लिए वे प्रयास करेंगे. साथ ही प्रदेश सरकार का ध्यान भी इस परिवार की ओर लाएंगे.

 

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