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रूद्रप्रयाग: जल संरक्षण को लेकर डीएम ने की बड़ी पहल, मिल रही जमकर सराहना

रूद्रप्रयाग के जिलाधिकारी मंगेश घिल्डियाल द्वारा गांव से लेकर स्कूल और अन्य कई लोगों का सहयोग लेकर जागरूकता रैली के साथ खन्तियां तथा चला खाल एवं कई प्रकार वृक्षारोपण जैसे कार्य करवाये जा रहे हैं. 

रूद्रप्रयाग: जल संरक्षण को लेकर डीएम ने की बड़ी पहल, मिल रही जमकर सराहना
जिलाधिकारी मंगेश घिल्डियाल ने कहा कि आज के दौर में पर्यावरण को बढ़ते प्रदूषण के खतरे से जहां भारी जल संकट का खतरा पैदा हो रहा है.

रूद्रप्रयाग: उत्तराखंड के रूद्रप्रयाग जनपद में बहुत सारे गांव ऐसे हैं, जहां वर्षभर ग्रामीणों को पानी की समस्या से रूबरू होना पड़ता है. कई घंटों के बाद भी ग्रामीणों को कुछ लीटर पानी ही प्राप्त हो पाता है. बीते कुछ वर्षों से पहाड़ में पानी की ज्यादा दिक्कतें सामने आने लगी हैं. दरअसल, पहाड़ों और जंगलों को काटकर हो रहे सड़क निर्माण तथा जल विद्युत परियोजना समेत तमाम कामों ने कहीं न कहीं पहाड़ में रहने वाले लोगों की चिंताएं बढ़ा दी हैं. इससे लगातार पानी की कमी नजर आ रही है. इसी को मद्देनजर रखते हुए रूद्रप्रयाग के जिलाधिकारी ने बरसात से लेकर अब तक लगातार गांव में जनजागरूकता अभियान चलाकर जलसंरक्षण को बढ़ावा देने की अपील की है.

रूद्रप्रयाग के जिलाधिकारी मंगेश घिल्डियाल द्वारा गांव से लेकर स्कूल और अन्य कई लोगों का सहयोग लेकर जागरूकता रैली के साथ खन्तियां तथा चला खाल एवं कई प्रकार वृक्षारोपण जैसे कार्य करवाये जा रहे हैं. रूद्रप्रयाग जनपद के अगस्त्यमुनि विकास खंड के निरवाली धारकोट अलकनंदा के किनारे कई हेक्टेयर भूमि पर वृक्षारोपण किया गया है. जिलाधिकारी मंगेश घिल्डियाल ने निरवाली धारकोट गांव में वृहद पौधरोपण कार्यक्रम चलवाया. मुख्य उद्देश्य पर्यावरण और जल संरक्षण है और इसके लिए अधिक से अधिक पौधरोपण की आवश्यकता है. उन्होंने कहा कि हम सबको इस अभियान में मिलकर काम करने की जरूरत है. छात्र-छात्राओं के साथ ही स्थानीय जनप्रतिनिधि एवं जनता पौधरोपण अभियान में बढ़चढ़कर भाग ले रहे हैं. 

जिलाधिकारी मंगेश घिल्डियाल ने कहा कि आज के दौर में पर्यावरण को बढ़ते प्रदूषण के खतरे से जहां भारी जल संकट का खतरा पैदा हो रहा है. वहीं जंगल भी समाप्त हो रहे हैं. ऐसे में इसका बड़ा खामियाजा जीव-जंतुओं को भुगतना पड़ रहा है. उन्होंने कहा कि यदि हम पौधरोपण करते हैं, तो इससे पर्यावरण को फायदा होगा. साथ ही जल संकट से भी निजात मिलेगी और खासकर ग्रामीण क्षेत्रों में जंगली जानवरों का आतंक भी कम होगा. उन्होंने कहा कि फलदार पौधों के रोपण के बाद बंदर, लगूर और तमाम प्रकार के जंगली जानवरों के लिए भोजन जंगलों में ही उपलब्ध हो जाएगा और वह खेती की तरफ रूझान नहीं करेंगे.

उन्होंने कहा कि सरकार के इस महत्वाकांक्षी अभियान को सफल बनाने के लिए सभी लोग अधिक से अधिक सहयोग करें. हमें प्रकृति और पर्यावरण की अहमियत को समझना होगा. जिलाधिकारी का कहना है कि हम लोग प्रत्येक गांव में जलसंरक्षण को लेकर 10 कार्य कर रहे हैं. अब तक हमारे द्वारा 5 करोड़ लीटर पानी की बचत की गई है. बहुत सारे श्रोत जो बंद होने के कगार पर थे, वे एक बार फिर से पुर्नजीवत हो रहे हैं.