बेहमई हत्याकांड: केस डायरी न मिलने के चलते टली सुनवाई, DGP को डायरी के लिए लिखा पत्र

कोर्ट ने नाराजगी जताते हुए पुलिस अधीक्षक को फटकार लगाई. साथ ही DGP से केस डायरी उपलब्ध कराने के लिए पत्र भी लिखा है.  

बेहमई हत्याकांड: केस डायरी न मिलने के चलते टली सुनवाई, DGP को डायरी के लिए लिखा पत्र
फाइल फोटो

कानपुर: 39 साल पहले हुए बेहमई हत्याकांड में केस डायरी न मिलने के चलते कोर्ट में सुनवाई को एक बार फिर टाल दिया गया. वहीं, कोर्ट ने नाराजगी जताते हुए पुलिस अधीक्षक को फटकार भी लगाई. साथ ही DGP से केस डायरी उपलब्ध कराने के लिए पत्र भी लिखा है.

न्यायालय ने कानपुर देहात के बेहमई गांव में हुए हत्याकांड की केस डायरी उपलब्ध कराने के लिए आज की तारीख तय की थी. लेकिन पुलिस अधीक्षक डायरी पेश नहीं कर पाए. जिसके बाद डीजीपी को पत्र लिखते हुए कोर्ट ने 18 मार्च तक केस डायरी उपलब्ध कराने को कहा है. जबकि इसके पहले पुलिस अधीक्षक ने 12 फरवरी को केस डायरी 26 फरवरी तक मुहैया करवानी की मौहलत मांगी थी.

क्या है बेहमई हत्याकांड केस?
आरोप है कि 14 फरवरी 1981 को फूलन देवी ने अपने 35 साथियों के साथ बेहमई गांव के 20 लोगों की गोली मारकर हत्या कर दी थी. फूलन देवी ही इस मामले में मुख्य आरोपी थीं, लेकिन उनकी मौत के बाद केस से उनका नाम हटा दिया गया. इस मामले में कुल 35 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज हुई थी, लेकिन चार्जशीट में फूलन देवी समेत 6 लोगों का ही नाम था. 

चार्जशीट में श्यामबाबू, भीखा, विश्वनाथ, पोशा और राम सिंह का नाम शामिल था. इनमें से राम सिंह की 13 फरवरी 2019 को जेल में मौत हो गई. पोशा जेल में बंद है, जबकि अन्य तीन आरोपी अभी जमानत पर हैं. नामजद डकैत विश्वनाथ और रामकेश फरार चल रहे हैं. इन दोनों की पुलिस अब तक तलाश नहीं कर पाई है. इस केस की सुनवाई के दौरान गवाही के बाद अभियोजन पक्ष के पत्र के आधार पर मान सिंह को भी आरोपी बनाया गया था, तब से वह भी फरार चल रहा है.  

2001 में हुई फूलन की हत्या 
इस केस में कुल 6 गवाह बनाए गए थे, जिनमें से 4 की मौत हो चुकी है. सिर्फ 2 गवाह, जंटर सिंह और वकील सिंह ही जिंदा बचे हैं. बेहमई हत्याकांड की मुख्य आरोपी फूलन देवी ने 1983 में मध्य प्रदेश में आत्मसमर्पण किया था. साल 1993 में फूलन देवी जेल से बाहर आई. वह मिर्जापुर लोकसभा सीट से समाजवादी पार्टी के टिकट पर दो बार सांसद चुनी गईं. साल 2001 में शेर सिंह राणा ने फूलन देवी की दिल्ली में हत्या कर दी.

फूलन देवी का जन्म उत्तर प्रदेश के जालौन जिले के पथेराकला गांव में एक दलित परिवार में हुआ था. बेहमई गांव के ठाकुरों पर फूलन देवी का गैंगरेप करने और फिर पूरे गांव में आपत्तिजनक स्थिति में घुमाने का आरोप लगा था. फूलन देवी पर आरोप है कि वह ठाकुरों की कैद से बचकर भागने में सफल रहीं। इस घटना के कई महीनों बाद 14 फरवरी 1981 को वह दस्यु सुंदरी बनकर लौटीं और अपने साथियों के साथ मिलकर बेहमई के 20 ठाकुरों को मौत के घाट उतार दिया.