क्या किसी बड़ी चेतावनी की ओर इशारा कर रहे हैं हिमालय क्षेत्र में आ रहे छोटे भूकंप!

भूकंप आने का सबसे बड़ा कारण इंडियन प्लेट का यूरेशियन प्लेट की तरफ बढ़ना है. इंडियन प्लेट जैसे-जैसे यूरेशियन प्लेट की तरफ धंस रही है. वैसे-वैसे ऊर्जा भूकंप के जरिये निकल रही है. 

क्या किसी बड़ी चेतावनी की ओर इशारा कर रहे हैं हिमालय क्षेत्र में आ रहे छोटे भूकंप!
हिमालय हमेशा से ही भूकंप के लिहाज से संवेदनशील रहा है. 19 नवंबर को भारत-नेपाल सीमा पर आए भूकंप के बाद चर्चाएं एक बार फिर तेज हो गई हैं. (फाइल फोटो)

देहरादून: हिमालय क्षेत्र में लगातार आ रहे छोटे-छोटे भूकंप वैज्ञानिकों की चिंता बढ़ा रहे हैं. इन छोटे-छोटे भूकंप के जरिए पृथ्वी के भीतर जमा काफी ऊर्जा बाहर निकल रही है. लेकिन, वैज्ञानिकों का मानना है कि पृथ्वी के भीतर ऊर्जा का जितना बड़ा भंडार है, ये ऊर्जा उस रूप में बाहर नहीं निकल रही है. इसके चलते बड़े भूकंप का खतरा लगातार बना हुआ है. देश के कई वैज्ञानिक हिमालय में आ रहे भूकंपों पर नजर रखे हुए हैं.

हिमालय हमेशा से ही भूकंप के लिहाज से संवेदनशील रहा है. 19 नवंबर को भारत-नेपाल सीमा पर आए भूकंप के बाद चर्चाएं एक बार फिर तेज हो गई हैं. 90 के दशक में उत्तराखंड के चमोली और उत्तरकाशी के भीषण भूकंप आए थे. 2005 के बाद से वैज्ञानिक हिमालय क्षेत्र में आने वाले भूकंप का लगातार अध्ययन कर रहे हैं. गढ़वाल मंडल के चमोली और कुमाऊं मंडल के पिथौरागढ़ में बाकी क्षेत्रों के मुकाबले धरती ज्यादा डोल रही है. लिहाजा वैज्ञानिक यहां अतिरिक्त सावधानी बरतने की सलाह देते हैं.

भूकंप आने का सबसे बड़ा कारण इंडियन प्लेट का यूरेशियन प्लेट की तरफ बढ़ना है. इंडियन प्लेट जैसे-जैसे यूरेशियन प्लेट की तरफ धंस रही है. वैसे-वैसे ऊर्जा भूकंप के जरिये निकल रही है. जिन क्षेत्रों में छोटे-छोटे भूकंप आ रहे हैं, वो यह बताता है कि यहां कुछ तो गड़बड़ है. छोटे भूकंप के जरिये थोड़ी-थोड़ी ऊर्जा बाहर तो निकल रही है. लेकिन बहुत बड़ी ऊर्जा अभी पृथ्वी के भीतर ही मौजूद हैं.

1897 में असम, 1905 में कांगड़ा, 1934 में बिहार और 1950 में एक बार फिर असम में बड़े भूकंप दर्ज किए गए थे. इन भूकंप की तीव्रता रिक्टर पैमाने पर 8 से ज्यादा मापी गई थी. इसके बाद से भारत में बड़े भूकंप नहीं आए. वाडिया इंस्टीट्यूट के वरिष्ठ वैज्ञानिक और भूकंप विशेषज्ञ डॉक्टर सुशील कुमार कहते हैं कि 50 साल में इस देश ने 4 बड़े भूकंप देखें और उसके बाद 69 साल में कोई बड़ा भूकंप नहीं आया. यह अपने आप में चिंता का बड़ा कारण है. डॉ. सुशील कहते हैं कि चमोली, उत्तरकाशी, कश्मीर और नेपाल के भूकम्प की तीव्रता भी ऐसी नहीं थी कि उन्हें ग्रेट अर्थक्वेक जाए. डॉक्टर सुशील कुमार कहते हैं कि बड़े भूकंप के मुकाबले इन छोटे भूकंप से निकलने वाली ऊर्जा नगण्य है. 

वैज्ञानिक इस बात का भी अध्ययन कर रहे हैं कि स्लो अर्थक्वैक के जरिये कितनी ऊर्जा हिमालय से निकल रही है. डॉ. सुशील कहते हैं कि जब तक हिमालय क्षेत्र में इस बात का पता नहीं चल जाता कि यहां स्लो अर्थक्वेक के जरिए ऊर्जा बाहर निकल रही है. तब तक बड़े भूकंप को लेकर वैज्ञानिकों की चिंता बनी रहेगी.

भूकंप को लेकर सबसे बड़ी परेशानी यह है कि अभी तक वैज्ञानिक इसका पूर्वानुमान लगाने में सफलता हासिल नहीं कर पाए हैं. हालांकि भूकंप आने से पहले जानवरों पर किए गए अध्ययन थोड़ा-थोड़ा संकेत देते हैं. लेकिन ऐसे पूर्वानुमान की बड़ी आवश्यकता है जो भूकम्प का सटीक पता लगाए ताकि भूकम्प से होने वाले नुकसान को कम किया जा सके.