नवरात्र में योगी देंगे भक्तों को सौगात, विंध्याचल में UP का पहला रोप-वे बनकर तैयार

विंध्याचल आने वाले भक्तों को अब रोपवे से जंगल, पहाड़ और मनोरम दृश्यों को देखने का अवसर मिलेगा. इस आधा किलोमीटर लम्बे रोपवे को दो पार्ट में बनाया गया है. रोप-वे बनने से अब भक्तों को माता के दर्शन के लिए करीब डेढ़ सौ सीढ़ी चढ़नी-उतरनी नहीं पड़ेगी.

नवरात्र में योगी देंगे भक्तों को सौगात, विंध्याचल में UP का पहला रोप-वे बनकर तैयार
अष्टभुजा पर्वत पर पहला रोपवे बनकर हुआ तैयार.

मिर्जापुर: अष्टभुजा पर्वत पर पूर्वांचल का पहला रोपवे बनकर तैयार हो गया है. सूबे के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ धाम में पर्यटन को बढ़ावा देने और भक्तों की सुविधा के लिए नवरात्रि में सौगात दे सकते हैं. रोपवे बनने से अब श्रद्धालुओं अष्टभुजा और काली खोह मंदिर तक पहुंचने में दो मिनट लगेंगे.

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मिर्जापुर जनपद में पर्यटन की अपार संभावना हैं. यहां प्रकृति का अनुपम छटा हर तरफ देखने को मिलती है. विंध्याचल आने वाले भक्तों को अब रोपवे से जंगल, पहाड़ और मनोरम दृश्यों को देखने का अवसर मिलेगा. आधा किलोमीटर लंबा रोपवे को दो हिस्सों में बांटा गया है. पहला हिस्सा काली खोह मन्दिर से अष्टभुजा मन्दिर तक जिसकी लंबाई 286 मीटर है और दूसरा अष्टभुजा पहाड़ से नीचे सड़क तक जिसकी लम्बाई 180 मीटर है. पर्यटन विभाग की तरफ से तैयार यह रोपवे पीपीपी मॉडल पर बनाया गया है. रोप-वे के बनने से अब भक्तों को माता के दर्शन के लिए करीब डेढ़ सौ सीढ़ी चढ़नी-उतरनी नहीं पड़ेगी.

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टूरिस्टों की संख्या में होंगी वृद्धि
मां विंध्यवासिनी का दर्शन करने आने वाले श्रद्धालुओं को इस नवरात्र में रोपवे की सवारी करने का मौका मिलेगा. रोपवे शुरू होने के बाद विंध्याचल में टूरिस्टों की संख्या में बढ़ोत्तरी होगी. इसके साथ ही लोगों को विंध्य पहाड़ियों की खूबसूरती देखने को मिलेगी. स्थानीय लोगों को रोजगार के अवसर भी मिलेंगे. गौरतलब है कि देश के हर हिस्से से लाखों की संख्या में भक्त मां विंध्यवासिनी, अष्टभुजा और काली खोह के दर्शन के लिए आते हैं. पहले जहां भक्तों को खोह पहाड़ पर मां काली के दर्शन-पूजन करने के बाद 135 सीढ़ी चढ़कर मां अष्टभुजा के दर्शन के लिए जाना पड़ता था.  वहीं अब लोग रोपवे के जरिए जा सकेगें. रोप-वे लोगों के लिए आकर्षण और स्थानीय लोगों के लिए रोजगार प्रदान करने वाला होगा.

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आकर्षण का केंद्र बनेगा रोपवे
जिलाधिकारी सुशील कुमार पटेल ने बताया कि दो रोपवे का निर्माण हुआ है. पहला काली खोह से ऊपर अष्टभुजा के पहाड़ी पर आता है. दूसरा अष्टजा मंदिर से होकर होकर नीचे जाता है. एक की लंबाई 180 मीटर है और दूसरे की लंबाई 286 मीटर है. दोनों का टेक्निकल क्लीयरेंस जुलाई में हो चुका है और दोनों की लागत लगभग 16 करोड़ 50 लाख है. जिला अधिकारी का कहना है कि इस रोपवे के संचालन से लोगों में एक आकर्षण होगा. यहां पर्यटन की दृष्टि से लोगों में उत्साह होगा. सुशील कुमार ने कहा कि रोपवे बनने से ऐसे लोगों को फायदा होगा, जिनके पैरों में दिक्कत है या जो पैदल चलने में असमर्थ हैं. इस दौरान उन्होंने लोगों से जनपद में आने की अपील भी की. 

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2014 में शुरू हुआ निर्माण कार्य
साल 2014 में नई दिल्ली की एक कंपनी को रोपवे निर्माण का ठेका दिया गया था. तकरीबन छह साल बाद अब रोप-वे बनकर तैयार है. 265 मीटर ऊंचे इस रोपवे से अष्टभुजा और काली खोह मंदिर तक पहुंचने में भक्तों को दो मिनट लगेंगे. रोपवे की सवारी को लेकर भक्तों में काफी उत्साह है. 

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