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खतरे में इस मेडिकल कॉलेज के छात्रों का भविष्य, MCI ने लगाया था बैन, फिर भी करे एडमिशन

छात्रों ने इस मामले की शिकायत मेडिकल कॉउंसिल ऑफ इंडिया से भी की है. छात्रों ने हाई कोर्ट में लगाई गुहार लगाई है. 

खतरे में इस मेडिकल कॉलेज के छात्रों का भविष्य, MCI ने लगाया था बैन, फिर भी करे एडमिशन
एमसीआई की ओर से नई गाइडलाइन में एग्जिट एग्जाम का प्रावधान किया गया है.

लखनऊ: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के GCRG मेडिकल कॉलेज का बड़ा गड़बड़झाला सामने आया है. यहां मेडिकल छात्रों के साथ उनके भविष्य को लेकर कॉलेज प्रशासन खिलवाड़ कर रहा है. कॉलेज पर 2017 में  मेडिकल कॉउंसिल ऑफ इंडिया ने दाखिले पर रोक लगा दी थी. मेडिकल काउंसलिंग ऑफ इंडिया ने कॉलेज मानक न पूरा करने की वजह से रोक लगाई थी. वहीं, रोक के बावजूद भी कॉलेज ने दाखिला लिया. मेडिकल कॉलेज में फैकल्टी से लेकर अस्पताल में उपकरण तक नही हैं. छात्रों का आरोप है कि उनका भविष्य अधर में लटका हुआ है. उनको जो डिग्री मिलेगी, वह केवल नाम की डिग्री मिलेगी. उससे वह प्रैक्टिस भी नहीं कर सकते हैं. 

छात्रों ने इस मामले की शिकायत मेडिकल कॉउंसिल ऑफ इंडिया से भी की है. छात्रों ने हाई कोर्ट में लगाई गुहार लगाई है. आज यानी  14 अक्टूबर को मेडिकल छात्रों के रिट पर सुनवाई भी होनी है. स्टूडेंट ने बताया कि कॉलेज को 2016 में कंडीशन पर एडमिशन लेने के लिए एमसीआई ने इजाजत दी थी. यह कंडीशन थी कि एमसीआई 6 महीने में कभी भी कॉलेज में इंस्पेक्शन के लिए आ जाएगी. अगर वह 6 महीने में अपने नॉर्म्स फुलफिल नहीं करते, तो कॉलेज को 2 साल के लिए प्रतिबंधित कर दिया जाएगा यानी कि कॉलेज में कोई भी एडमिशन नहीं लिया जाएगा.

बीकेटी स्थित जीसीआरजी मेडिकल कॉलेज के छात्रों का कैरियर दांव पर लगा है. वह अधिकारियों के यहां चक्कर लगा रहे हैं. उनका आरोप है कि कॉलेज प्रशासन ने 2 साल बाद क्लास बंद कर दी है. यहां पढ़ाई से लेकर इलाज तक की कोई सुविधा नहीं है. छात्रों ने डीजीएमआई से शिकायत की साथ ही एमसीआई और प्रधानमंत्री कार्यालय एवं मुख्यमंत्री कार्यालय भी पत्र भेजकर गुहार लगाई है.

जीसीआरजी मेमोरियल ट्रस्ट के तहत संचालित GCRG मेडिकल कॉलेज में वर्ष 2016 में 93 छात्रों ने एडमिशन लिया था. एमसीआई के निरीक्षण में मानक पूरा नहीं करने के चलते 2017-18, 18- 19 में एडमिशन लेने पर प्रतिबंध लगा दिया गया था. पाबंदी लगने के बाद कॉलेज प्रबंधन ने हाथ खींचना शुरू कर दिया. छात्रों का आरोप है कि उन्हें पढ़ाने के लिए फैकल्टी नहीं है. कॉलेज के कुछ छात्रों ने करियर की गुहार लगाते हुए अदालत का भी दरवाजा खटखटाया है. उनका कहना है कि हर साल करीब 1500000 रुपये खर्च हो रहे हैं. इसके बाद भी उनका करियर दांव पर लगा है. 

एमसीआई की ओर से नई गाइडलाइन में एग्जिट एग्जाम का प्रावधान किया गया है. ऐसे में छात्रों को चिंता है कि जब वह कुछ पढ़ नहीं रहे हैं, तो एग्जाम कैसे पास करेंगे. स्टूडेंट्स की मांग है कि उनको जल्द से दूसरे सरकारी मेडिकल कॉलेज में ट्रांसफर किया जाए, क्योंकि इनकी पढ़ाई काफी बाधित हो चुकी है.