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'मसूरी संकल्प' हिमालयी राज्यों के लिए वरदान : भू-वैज्ञानिक डॉ. एमपीएस बिष्ट

बिष्ट ने कहा कि बात उत्तराखंड राज्य की करें तो आज राज्य के सामने जितनी बड़ी चुनौती विकास की है, उससे बड़ी चुनौती पर्यावरण संरक्षण की है.

'मसूरी संकल्प' हिमालयी राज्यों के लिए वरदान : भू-वैज्ञानिक डॉ. एमपीएस बिष्ट

देहरादून: हिमालयन कॉन्क्लेव हिमालयी राज्यों के लिए एक नई उम्मीद की किरण साबित होगा. वैज्ञानिक हिमालयन कॉन्क्लेव को भविष्य के लिए एक वरदान के तौर पर देखते हैं. भू-वैज्ञानिक डॉ. एमपीएस बिष्ट इसे राज्य के लिए एक उपलब्धि मानते हैं. उनका कहना है कि सभी हिमालयी राज्यों की एक सी प्रकृति और प्रवृति है. हिमालय न सिर्फ पर्यावरण संतुलन बनाने में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है बल्कि जल और खनिज दोनों का ही भंडार भी है. ऐसे में और जरूरी हो जाता है कि हमारे क्रियाकलापों का कोई विपरीत प्रभाव हिमालय पर भी न पड़े. लिहाजा उसके लिए हिमालयी राज्यों के लिए एक नीति होनी जरूरी है.

बिष्ट ने कहा कि बात उत्तराखंड राज्य की करें तो आज राज्य के सामने जितनी बड़ी चुनौती विकास की है, उससे बड़ी चुनौती पर्यावरण संरक्षण की है. विकास की अंधी दौड़ का नतीजा है कि आज पर्यावरणीय असंतुलन के हिमालय पर असर से भी इंकार नहीं किया जा सकता है. ग्लेशियर पिघल रहे हैं, जलसंकट अलार्म बजा रहा है. ऐसे में अब जरूरत है इनके संरक्षण की. उत्तराखंड जैसे राज्य को पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखने की भी कीमत चुकानी पड़ रही है.

उन्होंने कहा कि राज्य में विकास योजनाओं पर इसका असर पड़ रहा है. लिहाजा राज्य ग्रीन बोनस की मांग करता आ रहा है. हिमालयी राज्यों जे एक छत तले आने के बाद जो साझा ड्राफ्ट तैयार हुआ है, वो इन राज्यों के संतुलित विकास के लिए एक मील का पत्थर साबित होगा.