गाजियाबाद के DM का 'प्रायश्चित', बिजली की बर्बादी के आहत होकर उठाया ऐसा कदम ...

डीएम ने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि खाली कार्यालयों में बिजली का इस्तेमाल न किया जाए. अगर खाली कार्यालय में बिजली का दुरुपयोग देखा गया तो अर्थदंड लगाकर बिजली के बिल की वसूली की जाएगी. 

गाजियाबाद के DM का 'प्रायश्चित', बिजली की बर्बादी के आहत होकर उठाया ऐसा कदम ...
गाजियाबाद के डीएम अजय शंकर पाण्डेय

गाजियाबाद: बिजली की बर्बादी को लेकर जनता को ज्ञान देने वाले प्रशासनिक अधिकारी और नेता खुद इन चीजों पर कितना अमल करते होंगे? अब हर किसी के बारे में तो नहीं जाना जा सकता है लेकिन गाजियाबाद के डीएम अजय शंकर पांडेय इस वक्त जो कर रहे हैं, वो जरूर हमें प्रेरित करने वाला है. जिलाधिकारी कार्यालय में उन्होंने बिजली के उपयोग और दुरुपयोग को लेकर बेहद सख्ती बरती हुई है. उन्होंने साफ कह रखा है कि बिजली की बर्बादी हुई तो अर्थदंड लगाया जाएगा. 

खुद बिना एसी-पंखे के बैठे डीएम अजय शंकर 
गाजियाबाद के डीएम अजय शंकर पाण्डेय इस बात से दुखी हुए कि उनके कार्यालय में पहुंचने से पहले ही लाइट, पंखे और एसी चलने लगते थे. इससे बिजली की बर्बादी होती थी. ऐसे में जिलाधिकारी अजय शंकर पाण्डेय ने प्रायश्चित स्वरूप बिना बिजली, पंखा और एसी के ही अपने कार्यालय में बैठकर लोगों की समस्याएं सुनीं. डीएम ने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि खाली कार्यालयों में बिजली का इस्तेमाल न किया जाए. अगर खाली कार्यालय में बिजली का दुरुपयोग देखा गया तो अर्थदंड लगाकर बिजली के बिल की वसूली की जाएगी. 

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पानी की बर्बादी पर भी लगा चुके हैं जुर्माना 

नवंबर 2019 में भी डीएम अजय शंकर तब चर्चा में आए थे जब कलेक्ट्रेट में टंकी से ओवरफ्लो होकर बह रहे पानी को लेकर अपने अधिकारियों और खुद पर जुर्माना लगाया था. ये अपनी तरह का पहला मामला था. तब भी ‘पश्चाताप शुल्क’ के रूप में 10 हजार की रकम नजारत में जमा की थी, जिसकी वसूली कलक्ट्रेट में बैठने वाले 30 अधिकारियों और 100 कर्मचारियों से वसूल की गई. वे अक्सर अपने दफ्तर की साफ-सफाई भी खुद ही करते हैं.

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