लखनऊ: इस मदरसे में मुस्लिम लड़कियां सीखती हैं कंप्यूटर, हिन्दू बच्चे ले रहे उर्दू की शिक्षा

दिनी तालीम के साथ मुस्लिम बच्चे अब बाकायदा मदरसे में न सिर्फ कंप्यूटर चलाना सीख रहे हैं बल्कि अब वो धीरे-धीरे खुद को इसके साथ पूरी तरह एडजस्ट भी कर चुके हैं. 

लखनऊ: इस मदरसे में मुस्लिम लड़कियां सीखती हैं कंप्यूटर, हिन्दू बच्चे ले रहे उर्दू की शिक्षा

लखनऊ: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) ने जब यह बात कही थी कि वो अल्पसंख्यक बच्चों के एक हाथ में कुरान और दूसरे में लैपटॉप देखना चाहते हैं तो सभी को लगा था कि इस कल्पना को साकार होने में न जाने कितना वक्त लगेगा. लेकिन उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) की राजधानी लखनऊ के काकोरी स्थित मदरसे में प्रधानमंत्री का ये सपना पूरा होता दिखाई दे रहा है. दरअसल, दिनी तालीम के साथ मुस्लिम बच्चे अब बाकायदा मदरसे में न सिर्फ कंप्यूटर चलाना सीख रहे हैं बल्कि अब वो धीरे-धीरे खुद को इसके साथ पूरी तरह एडजस्ट भी कर चुके हैं. प्रधानमंत्री के सपने को साकार करने के लिए मदरसे में ये बच्चियां कितनी मेहनत कर रही हैं

इस मदरसे की एक और खास बात यह है कि यहां न सिर्फ मुस्लिम बच्चे पढ़ते हैं बल्कि मदरसे के आधुनिकीकरण के बाद हिन्दू परिवारों के बच्चे भी इस मदरसे में हिंदी, इंग्लिश, मैथ्स, साइंस, सोशल स्टडीज पढ़ रहे हैं. साथ ही वो उर्दू भी सीखने में दिलचस्पी ले रहे हैं. 

मुस्लिम बच्चे इस मदरसे में NCERT की किताबों को फर्राटे से पढ़ रहे हैं. बच्चे इन किताबों के साथ अब अपने ख्वाब भी बुनने लगे हैं. कोई मुस्लिम बच्ची डॉक्टर बनना चाहती है तो कोई इंजीनियर तो कोई बड़ी होकर टीचर बनने की बात भी कह रही है.

मदरसा चलाने वाले डॉक्टर असलम मानते हैं कि इन बच्चों को जितना ज्यादा निखारा जाएगा आने वाला भविष्य उतना ही उज्ज्वल होगा. शायद यही वजह है कि हिन्दू टीचर मदरसे में उर्दू पढ़ा रही हैं तो मुस्लिम टीचर इंग्लिश और हिंदी की क्लासेस धड़ल्ले से ले रही हैं. डॉक्टर असलम भी मानते हैं कि शिक्षा का न तो मजहब होता है न ही कोई बंदिश इसीलिए मदरसे में विविधता में एकता की बात सबको साफ नजर आ रही है.

देश के बच्चे जब ऐसे अच्छे और पॉजिटिव माहौल में पढ़ेंगे तो निश्चित तौर पर एक अच्छा और बेहतर माहौल बच्चों को बचपन से ही देखने को मिलेगा. उत्तर प्रदेश के अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री मोहसीन रजा ने कहा कि हिन्दू मुस्लिम एकता की भला इससे बेहतर तस्वीर और क्या हो सकती है यही वजह है कि चाहे सरकार में बैठे लोग हो या बच्चों के अभिभावक हर कोई इस जुगलबंदी की दिल खोल कर तारीफ कर रहा है.