हाथरस कांड: एक ​हफ्ते में जांच पूरी नहीं कर सकी SIT, मुख्यमंत्री योगी ने दिए 10 और दिन

 एसआईटी को जांच के लिए 10 दिन का समय और दिए जाने के पीछे कई कारण हैं. हाथरस कांड के बहाने यूपी में जातीय दंगे कराने की साजिश, पीएफआई कनेक्शन और आरोपियों के पक्ष में बूलगढ़ी गांव में हो रही लामबंदी की जांच भी एसआईटी कर रही है.

हाथरस कांड: एक ​हफ्ते में जांच पूरी नहीं कर सकी SIT, मुख्यमंत्री योगी ने दिए 10 और दिन
हाथरस कांड की जांच कर रही एसआईटी को सीएम योगी ने 10 दिन का समय और दिया है.

लखनऊ: हाथरस कांड की जांच कर रही एसआईटी सात दिन में अपनी पड़ताल पूरी नहीं कर सकी है. सीएम योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर एसआईटी को जांच के लिए 10 दिन का समय और दिया गया है. हाथरस कांड की जांच के लिए गठित तीन सदस्यीय एसआईटी में गृ​ह सचिव भगवान स्वरूप के अलावा डीआईजी चंद्र प्रकाश और एसपी पूनम बतौर सदस्य शामिल हैं.  एसआईटी ने अपनी पड़ताल के दौरान अब तक 100 से अधिक लोगों के बयान दर्ज किए हैं. बयान दर्ज कराने वालों में पीड़ित परिवार के सदस्य, आरोपी और उनके परिजन‚ पुलिस-प्रशासन के अधिकारी शामिल हैं.

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हाईकोर्ट में 12 OCT को होनी है सुनवाई
दरअसल, एसआईटी को जांच के लिए 10 दिन का समय और दिए जाने के पीछे कई कारण हैं. हाथरस कांड के बहाने यूपी में जातीय दंगे कराने की साजिश, पीएफआई कनेक्शन और आरोपियों के पक्ष में बूलगढ़ी गांव में हो रही लामबंदी की जांच भी एसआईटी कर रही है. योगी सरकार ने इस केस में सीबीआई जांच की सिफारिश की है. लेकिन अभी तक गृह मंत्रालय की तरफ से स्वीकृति नहीं मिली है. आगामी 12 अक्टूबर को हाईकोर्ट में इस प्रकरण में सुनवाई होनी है. ऐसे में राज्य सरकार हाथरस कांड में जितना हो सकता है, सबूत इकट्ठे करना चाहती है, जिससे उसे अदालत में अपना पक्ष मजबूती से रखने में कोई परेशानी न हो.

क्या है हाथरस कांड? जानिए पूरा मामला
हाथरस जिले के चंदपा थाना क्षेत्र अंतर्गत आने वाले बुलगढ़ी गांव में 14 सितंबर को 19 वर्षीय दलित युवती से कथित गैंगरेप का मामला प्रकाश में आया था. वारदात को अंजाम देने का आरोप गांव के ही चार युवकों पर लगा है, चारों फिलहाल पुलिस की हिरासत में हैं. दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में इलाज के दौरान 29 सितंबर को पीड़िता की मौत हो गई थी.

हाथरस कांड: योगी सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में बताया पुलिस ने रात में क्यों जलाया पीड़िता का शव

पुलिस पर आरोप है कि उसने परिजनों की अनुमति लिए बगैर रात में ही पीड़िता के शव को जला दिया. इस मामले में हाथरस एसपी, डीएसपी समेत 5 पुलिसकर्मी​ निलंबित हो चुके हैं. इधर, पुलिस ने फॉरेंसिक और पोस्टमार्टम रिपोर्ट के हवाले से दावा किया है कि मृत युवती के साथ दुष्कर्म नहीं हुआ था. यूपी सरकार इस मामले की जांच SIT से करवा रही है, साथ ही CBI जांच की सिफारिश भी कर चुकी है. की है.

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