उत्तराखंड: पहाड़ों में शुरू होने जा रही है हेली सेवा, चीन सीमा पर पंहुचना भी होगा आसान

पहले चरण में देहरादून से दो उड़ाने संचालित करने की योजना है. देहरादून से गोचर और चिन्यालीसौड़ के लिए यात्रा शुरू होने जा रही है. डीजीसीए की हरी झंडी के बाद उत्तराखंड की घाटियों में हेली उड़ते हुये दिखाई देंगें. 

उत्तराखंड: पहाड़ों में शुरू होने जा रही है हेली सेवा, चीन सीमा पर पंहुचना भी होगा आसान
राज्य में 26 जनवरी से इस योजना के शुरू होने की उम्मीद

मनमोहन भट्ट/देहरादून: केदारनाथ घाटी के बाद अब उत्तराखंड के कई अन्य पहाड़ी क्षेत्रों में हेलीकॅाप्टर के जरिए सैर की जा सकेगी. राज्य में 26 जनवरी से इस योजना के शुरू होने की उम्मीद है. पहले चरण में देहरादून से दो उड़ाने संचालित करने की योजना है. देहरादून से गोचर और चिन्यालीसौड़ के लिए यात्रा शुरू होने जा रही है. डीजीसीए की हरी झंडी के बाद उत्तराखंड की घाटियों में हेली उड़ते हुये दिखाई देंगें. इन रणनीतिक हवाई मार्गो को खोले जाने से चीन सीमा पर पंहुचना भी आसान हो जायेगा.

यात्रियों को खर्च करने होंगे तीन से चार हजार रूपये 
उत्तराखंड में चार धाम यात्रा के दौरान देहरादून, रूद्रप्रयाग और चमोली जिले में कई हेली कम्पनियां अपनी सेवायें देती हैं. सबसे ज्यादा मांग रूद्रप्रयाग जिले में हेली सर्विस की रहती है. यंहा से केदारनाथ धाम के लिए सीधी हेली सर्विस का फायदा लाखों श्रद्धालु उठाते रहे हैं.

कई कम्पनियां देहरादून से सीधे केदारनाथ और बदरीनाथ धाम के लिए भी सेवा उपलब्ध कराते हैं. लेकिन अब राज्य के दर्जन भर से ज्यादा नये हवाई मार्ग खोले जा रहे हैं. बदरीनाथ यात्रा के महत्वपूर्ण पड़ाव गोचर और गंगोत्री यात्रा के रूट पर पड़ने वाले चिन्यालीसौड़ के लिए हेली पहले चरण में शुरू होने जा रही है. देहरादून-गोचर मार्ग की दूरी मात्र 30 मिनट मे पूरी हो सकेगी. इस सफर के लिए यात्रियों को तीन से साढ़े तीन हजार रूपये खर्च करने होंगें. जबकि गोचर के लिए चार हजार रूपये से ज्यादा किराया चुकाना होगा. इस सफर को पूरा करने के लिए 40 मिनट का समय लगेगा.

औली, फूलों की घाटी और हेमकुंट साहिब की यात्रा होगी आसान
हवाई सफर के शुरूआत से राज्य के पर्यटन को नई दिशा मिल सकती है. देहरादून-गोचर हवाई मार्ग खुलने के बाद खूबसूरत पर्यटक स्थल औली और फूलों की घाटी सहित सिक्खों के पवित्र स्थल हेमकुंड साहिब की यात्रा भी आसान होगी. इसी तरह देहरादून- चिन्यालीसौड़ मार्ग खुलने से गंगोत्री और गोमुख की यात्रा आसान होगी.

आपदा के दौरान होगा फायदा
गोचर और चिन्यालीसौड़ सबसे ज्यादा आपदा प्रभावित जिलों चमोली और उत्तरकाशी में आते हैं. मानसून के दौरान इन दोनों जिलों के कई इलाकों में आवागमन प्रभावित होता है. हालाकि ऑल वेदर रोड़ का निर्माण कार्य तेजी से चल रहा है फिर भी सड़क मार्ग से पंहुचने में अच्छा खासा समय लगता है. एसे में किसी भी तरह की आपात स्थिति में हवाई मार्ग का इस्तेमाल कर समस्या को नियंत्रण करने में मदद मिल सकती है.

चीन सीमा पर पहुंचना होगा आसान
उत्तराखंड की सीमायें चीन से भी लगती है. केंद्र सरकार लंबे समय से चीन सीमा तक बुनियादी सुविधाओं को विकसित कर रही है. रणनीतिक तौर पर ऑल वेदर रोड़ और कर्णप्रयाग तक रेल लाइन इसी रणनीति का हिस्सा है. ऐसे में सीमावर्ती क्षेत्रों में रणनीतिक तौर पर हवाई नेटवर्क को मजबूत करने के लिए इस योजना को काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है.