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मदरसे का नाम है चाचा नेहरू, एक ही कमरे में बच्‍चे करते हैं पूजा और पढ़ते हैं नमाज

पूर्व राष्‍ट्रपति हामिद अंसारी की पत्‍नी सलमा अंसारी की ओर से चलने वाले ट्रस्‍ट के तहत चल रहे मदरसे में हिंदू और मुस्लिम बच्चे एक ही कमरे में पूजा कर रहे हैं और नमाज भी पढ़ रहे हैं. 

मदरसे का नाम है चाचा नेहरू, एक ही कमरे में बच्‍चे करते हैं पूजा और पढ़ते हैं नमाज
एक ही कमरे में बच्‍चे साथ-साथ करते हैं पूजा और पढ़ते हैं नमाज.

अलीगढ़ (अरुन कुमार सिंह ) : अलीगढ़ का एक मदरसा दुनिया के लिए मिसाल साबित हो रहा है. पूर्व राष्‍ट्रपति हामिद अंसारी की पत्‍नी सलमा अंसारी की ओर से चलने वाले ट्रस्‍ट के तहत चल रहे मदरसे में हिंदू और मुस्लिम बच्चे एक ही कमरे में पूजा कर रहे हैं और नमाज भी पढ़ रहे हैं. इस मदरसे का नाम है चाचा नेहरू मदरसा.

मदरसा चाचा नेहरू में मंदिर और मस्जिद का निर्माण कराने की घोषणा कर विरोधियों के निशाने पर आईं पूर्व उप राष्ट्रपति हामिद अंसारी की पत्नी सलमा अंसारी ने किसी की परवाह किए बगैर बच्चों के लिए पूजास्थल तय कर दिया है. कमरे में एक तरफ हिंदू बच्चों के लिए सरस्वती की मूर्ति के साथ भगवान हनुमान और शिव की तस्वीर रखी गई है तो दूसरे हिस्से में मुस्लिम बच्चे कुरान पढ़ते हैं. जब तक मंदिर और मस्जिद का मदरसा कैंपस में निर्माण नहीं हो जाता, तब तक बच्चे इसी एक कमरे में पूजा करेंगे और नमाज पढ़ेंगे.


सलमा अंसारी ने रविवार को दी थी जानकारी. फाइल फोटो

सलमा अंसारी अलीगढ़ में अलनूर चैरिटेबल ट्रस्ट के तहत मदरसा चाचा नेहरू चला रही हैं. मदरसे में करीब चार हजार बच्चे हैं. शनिवार को उन्होंने मीडिया के सामने घोषणा की थी कि वह मदरसा में मंदिर और मस्जिद का निर्माण कराएंगी. मंदिर बनाने का निर्णय हिन्दू बच्चों की सुरक्षा को देखते हुए लिया गया है. मदरसे में मंदिर निर्माण की खबर जैसी ही फैली, आलोचना शुरू हो गई थी. सलमा ने इसकी चिंता किए बगैर मंदिर निर्माण से पहले ही हिन्दू बच्चों के लिए पूजा की व्यवस्था कर दी.

जब ज़ी न्‍यूज चाचा नेहरू मदरसा पहुंचा तो एक तरफ पूजा, दूसरी तरफ नमाज हो रही थी. मदरसे में सांप्रदायिक सौहार्द का नजारा था. कमरे में एक तरफ हिन्दू बच्चे दीपक जलाकर सरस्वती की पूजा कर रहे थे, दूसरी ओर मुस्लिम बच्चे नमाज अदा कर रहे थे. बच्चे भी इस व्यवस्था से खुश हैं.

मदरसे के प्रिंसिपल राशिद ने बताया कि मदरसा के एक कमरे में पूजा की ब्यवस्था की गई है. उसी कमरे में मुस्लिम बच्चे नमाज अदा करते हैं. जो विरोध कर रहे हैं, उनसे कोई मतलब नहीं हैं. हमारा अपना मदरसा है. विरोध करने वाले न तो फंडिंग करते हैं, न कोई और मदद. इनको विरोध का कोई हक नहीं है.