भारत-नेपाल सेना के बीच संयुक्त सैन्य युद्धाभ्यास की हुई शुरुआत

संयुक्त सैन्य युद्धाभ्यास में दोनों देशों की सेना की 300-300 सैन्य कर्मियों की एक-एक टुकड़ी शामिल रहेगी.

भारत-नेपाल सेना के बीच संयुक्त सैन्य युद्धाभ्यास की हुई शुरुआत
भारत-नेपाल सेना (Indo Nepal Army) के बीच संयुक्त सैन्य युद्धाभ्यास की शुरुआत

ललित मोहन भट्ट/चंपावत: भारत-नेपाल सेना (Indo Nepal Army) के बीच संयुक्त सैन्य युद्धाभ्यास सूर्य किरण नेपाल के रुपंदेही जिले में शुरू हो गया है. दोनों देशों के बीच होने वाला ये 14वां संयुक्त सैन्य अभ्यास होगा. बता दें कि एक साल भारत में सैन्य अभ्यास होता है, वहीं दूसरे साल नेपाल में सैन्य अभ्यास होता है. 

सैन्य छावनी बनवसा से मिली जानकारी के मुताबिक सूर्य किरण-14 का आयोजन तीन दिसंबर से 16 दिसंबर तक किया जाएगा. संयुक्त सैन्य युद्धाभ्यास में दोनों देशों की सेना की 300-300 सैन्य कर्मियों की एक-एक टुकड़ी शामिल रहेगी. युद्धाभ्यास के दौरान दोनों देशों की सेनाएं आतंकवाद विरोधी अभियान, विद्रोह के खिलाफ कार्रवाई, प्राकृतिक और मानवजनित आपदाओं के दौरान की जाने वाली मानवीय सहायता के अपने-अपने अनुभवों को साझा करेगी. सूर्य किरण सैन्य संयुक्त युद्ध अभ्यास आतंकवाद के बदलते तरीकों के खिलाफ सुरक्षा चुनौतियों का सामना करने के लिए किया जाता है. इसका उद्देश्य नेपाल और भारतीय सैनिकों में आपसी सैन्य समन्वय स्थापित करना होता है. 

गौरतलब है कि भारत और नेपाल केवल पड़ोसी देश नहीं बल्कि इनका सदियों पुराना नाता है. जो इन्हे सामाजिक, आर्थिक, सांस्कृतिक, और धार्मिक रूप से जोड़ता है. नेपाल से भारत का रिश्ता रोटी और बेटी का है. भारत और नेपाल के सम्बन्ध अनादि काल से हैं. दोनों देशों की धार्मिक, सांस्कृतिक, भाषायी एवं ऐतिहासिक स्थिति में बहुत अधिक समानता है. स्वतंत्र भारत और नेपाल ने अपने विशेष संबंधों को 1950 के भारत-नेपाल शांति एवं मैत्री संधि से नयी ऊर्जा दी.

सदियों से इस रिश्तों की परंपरा को दोनों देशों ने निभाया है. भारत-नेपाल के बीच कोई सामरिक समझौता नहीं है. लेकिन नेपाल पर किए गए किसी भी आक्रमण को भारत बर्दाश्त नहीं करता. 1950 से लेकर अब तक नेपाल में जो भी समस्याएं आईं उन्हें भारत ने अपना माना और भरपूर साथ दिया. हालांकि, दोनों देशों के रिश्तों में उतार-चढ़ाव आते रहे हैं बावजूद इसके परंपरा का सम्मान दोनों देशों के संबंधों में हमेशा मिठास घोलता आया हैं.

भारत-नेपाल संबंधों की शुरुआत साल 1950 की मैत्री और शांति संधि के साथ हुई थी. यही संधि दोनों देशों के बीच व्यापारिक गठजोड़ को भी बढ़ाती रही. साल 1951 जब नेपाल में राजनीतिक विवाद गहराया तो महाराजा त्रिभुवन दिल्ली पहुंचे. और तब के प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने मध्यस्थता करते हुए उन्हें पूरा सहयोग दिया. ये वो वक्त था जब नेपाल ने भारत से सैनिक सहायता की मांग की, सेना एवं प्रशासन के पुनर्गठन के लिए सहयोग मांगा.

भारत ने नेपाल को हर तरह की सहायता देकर वहां स्थायित्व लाने का प्रयास किया. तब से लेकर अब-तक भारत में जितनी सरकारें आई सबका रूख नेपाल को लेकर सहयोगात्मक रहा. भारत के मौजूदा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नेपाल यात्रा ने इस संबंध को नई दिशा देने की कोशिश की. वहां आए महाविनाशकारी भूकंप में भारत से मिली मदद को भी नेपाल कभी भूल नहीं सकता.

भारत ने उपकरणों, प्रशिक्षण एवं आपदा प्रबंधन क्षेत्र में सहयोग प्रदान कर नेपाली सेना (NA) के आधुनिकीकरण में भी मदद की है. इसके अतिरिक्त भारतीय सेना ने गोरखा सिपाहियों की भी बड़े पैमाने पर भर्ती की है. तथा दोनों सेनाएं एक-दूसरे के सेना प्रमुखों को जनरल की मानद रैंक प्रदान कर रही हैं. दोनों देशों में सेनाओं की आपसी सामंजस्य को बनाए रखने के लिए हर वर्ष संयुक्त युद्धाभ्यास बारी बारी से दोनों देशों द्वारा आयोजित किया जाता है.