Janmashtami 2020: कर्मयोगी कृष्ण क्यों कहलाए रणछोड़? UP के ललितपुर में छिपा है इसका रहस्य

ललितपुर जिला मुख्यालय से करीब 30 किलोमीटर की दुरी पर धोर्रा क्षेत्र के जंगलों के बीचो -बीच मुचुकुंद गुफाएं मिलती हैं. इनका उल्लेख श्रीमदभागवत महापुराण के दशम स्कन्द के 50, 51, 52 अध्याय में वर्णित है. 

Janmashtami 2020: कर्मयोगी कृष्ण क्यों कहलाए रणछोड़? UP के ललितपुर में छिपा है इसका रहस्य

अमित कुमार/ललितपुर: श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के दिन भगवान के बाल रूप की पूजा की जाती है. लेकिन भगवान कृष्ण अपने भक्तों में अलग-अलग नामों से विख्यात हैं और हर नाम के साथ जुड़ी हैं कुछ कहानियां. एक ऐसी ही कहानी बुंदेलखंड की भी धरती से आती है, जो भगवान कृष्ण की सबसे अनोखी लीला सुनाती है. ये वही घटना है, जिसका जिक्र श्रीमद्भागवत में भी है. तो चलिए जानते हैं विंध्य की पहाड़ियों में ऐसा क्या हुआ कि कर्मयोगी कृष्ण रणछोड़ बन गए. 

जरासंध के साथ युद्ध में मोहन ने छोड़ी थी रणभूमि
श्रीकृष्ण के जीवन में एक समय ऐसा भी आया था जब उन्होंने अपने शत्रु से मुकाबला ना करके मैदान छोड़ने में ही अपनी भलाई समझी. ये प्रसंग तब का है, जब महाबली मगधराज जरासंध ने कृष्ण को युद्ध के लिए ललकारा था. जरासंध ने कृष्ण के साथ युद्ध करने के लिए अपने साथ कालयवन नाम के राजा को भी मना लिया था. दरअसल, कालयवन को भगवान शंकर ने वरदान दिया था कि न तो चंद्रवंशी और न ही सूर्यवंशी उसका कभी कुछ बिगाड़ पाएंगे. उसे न तो कोई हथियार खरोंच सकता है और न ही कोई उसे अपने बल से हरा सकता है. ऐसे में उसे मारना बेहद मुश्किल था. जरासंध के कहने पर कालयवन ने बिना किसी शत्रुता के मथुरा पर आक्रमण कर दिया. चूंकि भगवान कृष्ण को उसके वरदान के बारे में पता था, ऐसे में वे जान चुके थे कि युद्ध में उसे हराया नहीं जा सकता. 

रणभूमि से भागकर श्रीकृष्ण पहुंचे मुचुकंद गुफा में 
कृष्ण रणभूमि से भागकर एक गुफा में पहुंच गए. श्रीकृष्ण और बलराम तो भागते देख जरासंध उन पर हंसने लगा. लेकिन जरासंध को इस बात का अंदाजा नहीं था कि श्रीकृष्ण इस युद्ध से भागकर उसी गुफा में छिपे थे जहां राक्षसों से युद्ध करके राजा मुचुकुंद त्रेतायुग से सोए हुए थे. 

श्रीकृष्ण की चाल में फंसकर कालयवन की मृत्यु हुई 
राजा मुचुकंद को इंद्र ने वरदान दिया था कि जो भी इंसान तुम्हें नींद से जगाएगा वो जलकर खाक हो जाएगा. ऐसे में भगवान कृष्ण कालयवन को अपने पीछे भगाते-भगाते उस गुफा तक ले आए. जहां राजा मुचुकंद सोए हुए थे. गुफा में भगवान कृष्ण ने राजा मुचुकंद के ऊपर अपना पीतांबर डाल दिया. कालयवन ने उन्हें कृष्ण समझकर लात मारकर जगाया. राजा मुचुकंद के जागते ही कालयवन जलकर खाक हो गया. 

ललितपुर जिले में हैं मुचुकंद गुफाएं
जिस मुचुकंद गुफा में कालयवन की मौत हुई थी, वो वर्तमान में उत्तर प्रदेश के ललितपुर जिले में है. ललितपुर जिला मुख्यालय से करीब 30 किलोमीटर की दुरी पर धोर्रा क्षेत्र के जंगलों के बीचो -बीच मुचकुंद गुफाएं मिलती हैं. इनका उल्लेख श्रीमदभागवत महापुराण के दशम स्कन्द के 50, 51, 52 अध्याय मे वर्णित है.  इस गुफा में इन्द्र देवता और वाकी देवतागण आकर कभी-कभी निवास किया करते थे. 


ललितपुर में स्थित रणछोड़ भगवान का मंदिर

वेत्रवती नदी के तट पर रणछोड़ भगवान का मंदिर 
वेत्रवती के तट पर राजा मुचकुंद ने श्रीकृष्ण की दिव्य मूर्ति भी स्थापित की थी. अब वो रणछोड़ भगवान का मंदिर बन चुका है. लगभग 5 हज़ार वर्ष पुराने माने जाने वाले इस मंदिर में भगवान की प्रतिमा है, जिसके दर्शन के लिए भक्त दूर-दूर से यहां पहुंचते हैं.  

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