जन्माष्टमी पर कृष्णमय हुआ देश, आधी रात में जन्मे नंद के लाला

रात्रि में भगवान के जन्म के अवसर 12.00 बजे से 12.10 बजे तक प्रकट्योत्सव, 12.15 से 12.30 बजे तक महाभिषेक कराया गया. तत्पश्चात 12.40 से 12.50 बजे तक श्रृंगार आरती और फिर रात 1.30 बजे तक दर्शन हुआ.

जन्माष्टमी पर कृष्णमय हुआ देश, आधी रात में जन्मे नंद के लाला
मथुरा में भगवान श्रीकृष्ण के प्रकट्योत्सव के बाद महाभिषेक करते मंदिर के पुजारी. (फोटो एएनआई)

नई दिल्ली/मथुरा: भगवान कृष्ण के जन्मदिवस के रूप में मनाये जाने वाला पर्व जन्माष्टमी सोमवार (03 सिंतबर) को मथुरा, वृंदावन और राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली समेत पूरे देश में पारंपरिक श्रद्धा एवं हर्षोल्लास के साथ मनाया गया. मथुरा, वृंदावन सहित पूरे देश में यही जयकारा गूंज उठा ‘नंद घर आनंद भयो, जय कन्हैया लाल की’. भगवान कृष्ण के इस पावन पर्व पर सोमवार को राजधानी में इंद्रदेव भी जमकर बरसे और मौसम खुशनुमा हो गया. इस पर्व पर बड़ी संख्या में लोगों ने मंदिरों में पहुंचकर पूजा अर्चना की.

दिल्ली में भगवान कृष्ण के प्रसिद्ध मंदिरों लक्ष्मी नारायण मंदिर, इस्कान मंदिर, कृष्ण प्रणामी मंदिर, हरे कृष्ण मंदिरों में विशेष रूप से सजावट की गई है. बारिश होने के बावजूद बड़ी संख्या में लोग सुबह मंदिरों में आये. कई लोगों ने इस पर्व पर उपवास रखा. भगवान कृष्ण की जन्म स्थली मथुरा में जन्माष्टमी का पर्व बड़े उत्साह के साथ मनाया गया और इस अवसर पर दर्शन के लिए देश के कोने-कोने से श्रद्धालु मथुरा वृंदावन आये है.

Janmashtami celebrated with joy in the country

देश के विभिन्न हिस्सों से आये श्रद्धालुओं का यहां तांता लगा हुआ है. लोग मथुरा के श्रीकृष्ण जन्मस्थान, द्वारिकाधीश मंदिर, वृन्दावन के बांकेबिहारी, राधावल्लभ लाल, शाहबिहारी, राधारमण, अंग्रेजों के मंदिर के नाम से प्रसिद्ध इस्कॉन मंदिर, 21वीं सदी में बनाए गए स्नेह बिहारी व प्रेम मंदिर, बरसाना के लाड़िली जी, नन्दगांव के नन्दबाबा मंदिर, गोकुल के नन्दभवन आदि की ओर पैदल ही जा रहे हैं. हर तरफ कान्हा के जन्म को लेकर उल्लास छाया हुआ है.

श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर सुरक्षा के खासे प्रबंध किए गए हैं. मथुरा-वृन्दावन नगर निगम की ओर से श्रीकृष्ण जन्मस्थान की ओर जाने वाले हर चौराहे- रास्ते को बड़ी ही शिद्दत से सजाया गया है. सोमवार की रात्रि में भगवान के जन्म के अवसर 12.00 बजे से 12.10 बजे तक प्रकट्योत्सव, 12.15 से 12.30 बजे तक महाभिषेक कराया गया. तत्पश्चात 12.40 से 12.50 बजे तक श्रृंगार आरती और फिर रात 1.30 बजे तक दर्शन हुआ.

राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद, उपराष्ट्रपति एम. वेंकैया नायडू और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के पर्व पर देशवासियों को शुभकामनाएं दी हैं. राष्ट्रपति कोविंद ने ट्वीट किया है, ‘‘जन्माष्टमी के शुभ अवसर पर मैं सभी भारतवासियों को बधाई और शुभकामनाएं देता हूं.’’ उन्होंने कहा कि भगवान कृष्ण के जीवन और शिक्षाओं का सबके लिए एक प्रमुख संदेश है; ‘निष्काम कर्म’. जन्माष्टमी का यह पर्व हमें मन, वचन और कर्म से शील और सदाचार के मार्ग पर चलने की प्रेरणा दे.’’ 

 

 

वहीं मोदी ने ट्वीट किया, ‘‘श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के पावन अवसर पर सभी को हार्दिक शुभकामनाएं. जय श्रीकृष्ण!’’ 

 

 

नायडू ने सोमवार को अपने बधाई संदेश में कहा कि भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाने वाला जन्माष्टमी पर्व का देश में विशेष धार्मिक महत्व है. हर्षोल्लास के साथ मनाये जाने वाले इस पावन पर्व के अवसर पर उन्होंने श्रीमद्भगवद्गीता, में वर्णित दायित्त्वों की पूर्ति के सिद्धांत को समूची मानवता के लिये प्रेरणा का स्रोत बताया.

राजस्थान में कृष्ण जन्माष्टमी पारंपरिक श्रद्धा एवं हर्षोल्लास के साथ मनाई गई. उदयपुर के नाथद्वारा और राजधानी के प्रमुख आराध्य देव गोविंद देव जी के मंदिर को इस अवसर के लिए विशेष रूप से सजाया गया.

गुलाबी नगर के गोविंददेवजी मंदिर में सुबह मंगला की झांकी में ही बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए. मंदिर प्रशासन के अनुसार, मध्य रात्रि कान्हा के जन्म पर दूध, दही, घी, बूरा और शहद के साथ पंचामृत से जन्माभिषेक किया गया और उसके बाद जन्म आरती की गयी. वहीं जन्माष्टमी के अवसर पर शहर के अन्य मंदिरों-लक्ष्मी-नारायणजी बाईजी मंदिर, जगतपुरा के अक्षयपात्र श्रीकृष्ण-बलराम मंदिर, धौलाई के इस्कॉन मंदिर, बनीपार्क के राधा-दामोदरजी मंदिर को विशेष रूप से सजाया गया है.

कृष्ण जन्माष्टमी पर महाराष्ट्र में उल्लास का माहौल रहा और जगह-जगह पर सोमवार को पारंपरिक ‘दही हांडी’ का आयोजन किया गया, जिसमें मुंबई और राज्यों के अन्य भागों के युवाओं ने हिस्सा लिया. हालांकि दही हांडी उत्सव के दौरान हुई विभिन्न घटनाओं में एक गोविंदा की मौत हो गयी, 150 अन्य घायल हो गये. आपको बता दें कि महाराष्ट्र में जन्माष्टमी त्योहार के दौरान दही हांडी का आयोजन किया जाता है. इस परंपरा में रंग बिरंगे कपड़े पहने युवक यानी गोविंदा दही की हांडी तक पहुंचने के लिए मानवीय पिरामिड बनाते हैं और हवा में लटकती हांडी को तोड़ते हैं.

कश्मीरी पंडितों ने भी पूरे हर्ष और उल्लास के साथ भगवान श्री कृष्ण के प्राकट्य महोत्सव का उत्सव मनाया, उपवास के बाद रात को प्रसाद के साथ व्रत समाप्त किया. लखनऊ, भोपाल, पटना, रांची,चंडीगढ़ समेत देश के अन्य भागों से भी जन्माष्टमी का पर्व हर्षोल्लास के साथ मनाया गया.