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झांसी/अब्दुल सत्तार: उत्तर प्रदेश के झांसी में साइबर ठगी के एक बड़े नेटवर्क का पुलिस ने पर्दाफाश किया है. प्रेमनगर थाना पुलिस और साइबर सेल की संयुक्त टीम ने ऑनलाइन गेमिंग ऐप के जरिए कथित साइबर फ्रॉड की रकम को अलग-अलग बैंक खातों में खपाने वाले गिरोह के छह सदस्यों को गिरफ्तार किया है. पुलिस के मुताबिक, इस नेटवर्क से जुड़े 56 बैंक खातों के खिलाफ देशभर से 325 शिकायतें सामने आई हैं और जांच में करीब 403 करोड़ रुपये के संदिग्ध लेनदेन का पता चला है.
लोन दिलाने के नाम पर खुलवाते थे खातों का रास्ता
पुलिस जांच में सामने आया कि गिरोह के सदस्य लोगों को बैंक से लोन दिलाने का झांसा देकर उनके बैंक खाते, पासबुक और अन्य जरूरी जानकारी हासिल करते थे. इसके बाद इन्हीं खातों में ऑनलाइन गेमिंग ऐप और अन्य माध्यमों से साइबर ठगी की रकम मंगाई जाती थी. इस तरह सामान्य लोगों के बैंक खातों को कथित तौर पर साइबर अपराध की रकम के लिए इस्तेमाल किया जाता था.
56 खातों पर 325 शिकायतें, करोड़ों का हिसाब
पुलिस के अनुसार, समन्वय पोर्टल पर सामने आई शिकायतों की जांच में 56 खातों से जुड़े 325 साइबर अपराध मामलों की जानकारी मिली है. इन खातों के जरिए करीब 403 करोड़ रुपये के लेनदेन का पता चला है. पुलिस अब इन खातों से जुड़े अन्य लेनदेन और नेटवर्क की कड़ियों की जांच कर रही है.
गिरफ्तार आरोपियों में छात्र भी शामिल
पुलिस ने कार्रवाई करते हुए दीपक वर्मा, अदनान हुसैन, आदिल हुसैन, जानपाल, अभिषेक चौधरी और अर्चित अग्रवाल को गिरफ्तार किया है. पुलिस के मुताबिक, गिरोह में इंटरमीडिएट और ग्रेजुएशन स्तर के छात्र भी शामिल थे. आरोपियों के कब्जे से सात मोबाइल फोन और एक पॉकेट डायरी बरामद हुई है. डायरी में लेनदेन और हिसाब-किताब से जुड़ी कई महत्वपूर्ण जानकारियां दर्ज मिली हैं.
USDT में बदलकर विदेशी हैंडलरों तक पहुंचाते थे रकम
पूछताछ में पुलिस को पता चला कि साइबर अपराध से हासिल रकम को फ्रीज होने से बचाने के लिए उसे USDT (क्रिप्टोकरेंसी) में बदला जाता था. इसके बाद रकम को कथित तौर पर विदेश में मौजूद हैंडलरों तक पहुंचाया जाता था. पुलिस को इस नेटवर्क के विदेशी कनेक्शन की भी जानकारी मिली है, जिसकी जांच की जा रही है.
तीन आरोपी अब भी फरार
पुलिस के मुताबिक, गिरोह के तीन सदस्य अरमान, अर्श शेख और मोहम्मद फैज अभी फरार हैं. उनकी गिरफ्तारी के लिए पुलिस टीमें संभावित ठिकानों पर दबिश दे रही हैं. अधिकारियों का कहना है कि पूछताछ और बरामद डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की पहचान करने का प्रयास जारी है.