संगम नगरी में बसी है कल्पवासियों की अद्भुत दुनिया, पढ़िए पूरी खबर

आस्था के सबसे बड़े माघ मेले में कल्पवास की शुरुआत हो गई है

संगम नगरी में बसी है कल्पवासियों की अद्भुत दुनिया, पढ़िए पूरी खबर
कल्पवासियों की अद्भुत दुनिया

मोहम्मद गुफरान/प्रयागराज: संगम तट पर लगे आस्था के सबसे बड़े माघ मेले में कल्पवास की शुरुआत हो गई है. माघ मेले में कल्पवासियों ने एक महीने के लिए यहां अपना आशियाना बनाकर रहना शुरू कर दिया है. करीब 4 लाख से अधिक श्रद्धालु यहां साधना-अर्चना करेंगे.

आस्था के इस कल्पवास में लाखों श्रद्धालु संगम की रेती पर एक महीने तक संयम और त्याग के साथ रहकर अपनी साधना पूर्ण करते हैं. जिनकी अपनी ही दुनिया होती है. बताया जा रहा है कि सुबह से ही कल्पवासी त्रिवेणी में स्नान करने के बाद अपने-अपने तम्बुओं में चले जाते हैं, जहां सबसे पहले सालिग्राम की प्रतिमा स्थापित करते हैं. बताया जा रहा है कि सालिग्राम की प्रतिमा के पास रोज तीन वक्त सत्यनारायण की कथा होती है.

जानकारी के मुताबिक, कल्पवासी एक वक्त भोजन और दिन में दो बार गंगा स्नान करते हैं. इसके अलावा धरती पर शयन के साथ सत्संग और भगवत भजन ही इनकी दिनचर्या होती है. त्रिवेणी में पहली डुबकी लगाने का अधिकार इन्हीं कल्पवासियों को दिया गया है. ये कल्पवासी एक महीने यानी 21 फरवरी तक त्रिवेणी के तट पर रहेंगे.

बताया जा रहा है कि पौष पूर्णिमा से माघपूर्णिमा के बीच प्रयाग में ब्रह्माण्ड के सभी देवी देवताओं और शक्तियों का आह्वान  किया गया था, जिसकी वजह से यहां पर एक महीने के कल्पवास की परम्परा की शुरुआत हुई.

धार्मिक मान्यता यह भी है कि अगर आप त्रिवेणी में केवल माघ पूर्णिमा का स्नान कर लें तो, इससे पूरे माघ के महीने में पवित्र नदियों में स्नान का पुण्य फल प्राप्त हो जाता है. माघ मेले की चमक धमक से दूर आस्था की यह नगरी अपनी निष्ठा और समर्पण की दुनिया में पूरे एक महीने तक इसी तरह डूबी रहेगी.