कानपुर: गंदे तालाब के बीच खड़ी आंबेडकर की मूर्ति पर हुआ माल्यार्पण

कानपुर के जूही इलाके में गंदे तालाब के बीच में आंबेडकर की मूर्ति उनकी जयंती मनाने वालों के मुंह पर तमाचे से कम नहीं.

कानपुर: गंदे तालाब के बीच खड़ी आंबेडकर की मूर्ति पर हुआ माल्यार्पण
शिकायतों के बावजूद प्रशासन तालाब की सफाई नहीं करवा रहा- पार्षद सुनील कनौजिया

कानपुर: देश का गौरवशाली संविधान लिखने वाले डॉ भीमराव रामजी आंबेडकर की आज 127वीं जयंती है. पूरा देश आज उनके योगदान को याद कर रहा है. हर जगह उनकी पूजा की जा रही है. ऐसा कोई राजनीतिक दल नहीं है, जिसने आज आंबेडकर को याद नहीं किया हो. लेकिन, कानपुर की इस तस्वीर को देखकर लगता है कि बाबा साहेब का योगदान धूमिल हो रहा है. कानपुर के जूही इलाके में एक गंदे तालाब के बीच में बाबा साहेब आंबेडकर की मूर्ति लगी हुई है. हर साल 14 अप्रैल को इस मूर्ति की पूजा होती है, माल्यार्पण किया जाता है, लेकिन उसके बाद इस मूर्ति की सुध लेने वाला कोई नहीं होता है. दलित वोट बैंक के खातिर सभी राजनीतिक दल आंबेडकर को अपना आदर्श बता रही है. जहां कही आंबेडकर की मूर्ति को नुकसान पहुंचाया जाता है वहां बवाल शुरू हो जाता है, लेकिन आंबेडकर की इस मूर्ति की बदहाली पर किसी का ध्यान नहीं जाता है. 

गंदे पानी के बीच में बाबा साहेब की मूर्ति
गंदे पानी से भरे हुए तालाब के बीचों बीच खड़े बाबा साहेब भीमराव आंबेडकर की यह तस्वीर उनकी जयंती मना रहे लोगों के मुंह पर किसी तमाचे से कम नहीं है. तस्वीरों में साफ-साफ देख सकते हैं कि किस तरह लोग अपने हाथों में फूल माला लेकर तालाब के गंदे पानी से होते हुए बाबा साहेब की मूर्ति की तरफ बढ़ रहे है. एक युवक के कंधे पर माला है तो दुसरा अपने हाथो में मिठाई रखे हुआ है. कड़ी मशक्कत के बाद सभी लोग आंबेडकर की मूर्ति के पास पहुंचते हैं, फिर मूर्ति को माला पहना दी जाती है.

दशकों से मूर्ति की यही हालत
आंबेडकर की मूर्ति की दयनीय हालत को लेकर स्थानीय पार्षद सुनील कनौजिया ने कहा कि पिछले 25 सालों से हम आंबेडकर जयंती मना रहे हैं. पिछले कई सालों से तालाब को साफ करने की कोशिश की जा रही है. तालाब की सफाई को लेकर संबंधित विभाग के अधिकारियों से कई बार शिकायत भी की है, लेकिन शिकायतों पर सुनवाई नहीं हो रही है.

प्रशासन नहीं दे रहा शिकायत पर ध्यान
एक बुजुर्ग ने जी मीडिया से बात करते हुए कहा कि 1956 में जूही के इस इलाके में धोबी घाट हुआ करता था. उस वक्त घाट में पनकी नहर से पानी आया करता था. बाद में यह जमीन धोबी घाट के लिए दे दी गई. वक्त के साथ धोबी घाट की जमीन पर लोगों ने अवैध अतिक्रमण शुरू कर दिया. धीरे-धीरे यहां अवैध बस्ती का निर्माण हो गया. पानी की समुचित निकासी व्यवस्था नहीं होने की वजह से बस्ती की गंदा पानी बहकर बाबा साहब की मूर्ति के आसपास जमा होने लगा और यह गंदे तालाब का शक्ल ले लिया. बाबा साहेब की यह हालत देखकर इलाके लोगों ने कई बार जिलाधिकारी और नगर आयुक्त से इसकी शिकाय की लेकिन सुनवाई नहीं हुई.