आईआईटी कानपुर (IIT Kanpur) का 58वां दीक्षांत समारोह 23 जून को मनाया जाएगा. आरबीआई (RBI) के गवर्नर संजय मल्होत्रा दीक्षांत समारोह में 2848 स्टूडेंट को अवार्ड देंगे.
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कानपुर आईआईटी की गिनती देश के टॉप इंजीनियरिंग संस्थानों में होती है. आईआईटी कानपुर रिसर्च और अंडरग्रेजुएट यानी बीटेक डिग्री कोर्स के लिए सबसे बेस्ट माना जाता है. आइये जानते हैं 66 साल पुराने आईआईटी कानपुर का इतिहास.
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साल 1960 में आईआईटी कानपुर की स्थापना भारत सरकार द्वारा संसद के एक अधिनियम से हुई थी. दिसंबर 1959 में
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संस्थान की शुरुआत कानपुर के कृषि उद्यान में हरकोर्ट बटलर प्रौद्योगिकी संस्थान की कैंटीन बिल्डिंग के एक कमरे में हुई थी. इसके बाद साल 1963 में संस्थान कानपुर के कल्याणपुर इलाके के पास ग्रांड ट्रंक रोड पर अपने मौजूदा स्थान पर चला गया. इसके परिसर को अच्युत कविंदे ने आधुनिकतावादी शैली में डिजाइन किया था.
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स्थापना के बाद आईआईटी कानपुर का पहला दीक्षांत समारोह 17 अक्टूबर 1965 को एक साधारण टेंट के नीचे हुआ था. मुख्य अतिथि के तौर पर भारत के पहले राष्ट्रपति डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन ने डिग्री दी थी.
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पहले दीक्षांत समारोह में आईआईटी कानपुर के 66 छात्रों को पहली बार बीटेक की डिग्री दी गई थी. इसमें 8 छात्र केमिकल, 6 छात्र सिविल के, 15 इलेक्ट्रिकल के, 23 मैकेनिकल के और 14 मेटालर्जिकल इंजीनियरिंग के छात्र थे.
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बीटेक की पहली डिग्री पाने वाले अभय कुमार भूषण ने आगे चलकर इंटरनेट की नींव रखने वाले फाइल ट्रांसफर प्रोटोकाल यानी एफटीपी को डिजाइन किया.
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स्थापना के बाद साल 1960 में आईआईटी कानपुर को जमीन दी गई. इसके बाद परिसर का दायरा बढ़ गया. वर्तमान में आईआईटी कानपुर का परिसर 420 हेक्टेयर में फैला है.
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संस्थान के पहले निदेशक पीके केलकर थे, जिनके नाम पर 2002 में केंद्रीय पुस्तकालय का नाम बदल दिया गया. अर्थशास्त्री जॉन केनेथ गैलब्रेथ के मार्गदर्शन में आईआईटी कानपुर भारत में कंप्यूटर विज्ञान की शिक्षा देने वाला पहला संस्थान था.
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आईआईटी कानपुर को लगातार भारत के सर्वश्रेष्ठ शैक्षणिक संस्थानों में जगह मिली. अगस्त 2024 तक, कम से कम 15 पद्म श्री, 4 पद्म भूषण, 1 पद्म विभूषण और 33 शांति स्वरूप भटनागर पुरस्कार यहां से पूर्व छात्रों या संकाय सदस्यों को मिल चुका है.
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सोमवार को दीक्षांत समारोह में स्नातक करने वाले छात्रों में 269 पीएचडी प्राप्तकर्ता, 29 एमटेक-पीएचडी (संयुक्त डिग्री), 2 एमडीएस-पीएचडी (संयुक्त डिग्री), 2 एमएस (शोध द्वारा)-पीएचडी (संयुक्त डिग्री), 480 एमटेक प्राप्तकर्ता, 874 बीटेक और 204 बीएस प्राप्तकर्ता शामिल थे. समारोह में एमएससी (2-वर्षीय) से 194 छात्र, एमबीए से 145, एमडीएस से 20, एमएस (शोध द्वारा) से 83, पीजीपीईएक्स-वीएलएफएम से 40, डबल मेजर से 26, दोहरी डिग्री से 93, एमएस-पीडी (दोहरी डिग्री का एमएस भाग) से 26 और ईमास्टर्स डिग्री कार्यक्रमों से 361 छात्र शामिल हुए.
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