शादी अनुदान और पारिवारिक लाभ योजना में बड़ा फर्जीवाड़ा, जांच में सामने आया विभागों का खेल

 शादी अनुदान के नाम पर मिलने वाले 20 हजार रुपये और पारिवारिक लाभ योजना के तहत मिलने वाले 30 हजार रुपये पाने के लिए अपात्रों को अफसर और कर्मचारियों ने पात्र बता दिया

शादी अनुदान और पारिवारिक लाभ योजना में बड़ा फर्जीवाड़ा, जांच में सामने आया विभागों का खेल
प्रतीकात्मक

कानपुर: उत्तर प्रदेश के कानपुर में शादी अनुदान और पारिवारिक लाभ योजना में घोटाला की खबर सामने आई है. साढ़े छह करोड़ रुपये का फर्जीवाड़ा सामने आया है. शादी अनुदान योजना में, 1079 और पारिवारिक लाभ योजना में 1444 लाभार्थी जांच में फर्जी पाए गए हैं. डीएम ने इस बाबत कार्रवाई के आदेश दिए हैं.

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दोनों योजनाओं में फर्जीवाड़ा
शादी अनुदान और पारिवारिक लाभ योजना के पैसों में खूब फर्जीवाड़ा हुआ है. दोनों योजनाओं के 2523 लाभार्थी फर्जी पाए गए हैं. राजस्व और समाज कल्याण विभाग के अधिकारियों की मिलीभगत से 6 करोड़ से ज्यादा इन अपात्रों को बांट दिए गए. इसका खुलासा 51 अफसरों की बनाई गई जांच कमेटी की रिपोर्ट में हुआ है. अब फर्जी तरीके से योजनाओं का लाभ पाने वाले इन 2523 लोगों से रिकवरी की योजना है. जांच कमेटी ने सत्यापन करने वाले अधिकारी और कर्मचारियों को अपनी पड़ताल में दोषी पाया है.

डीएम ने दिए कार्रवाई के निर्देश
डीएम ने इस बाबत कार्रवाई के आदेश दिए हैं. सबसे बड़ा फर्जीवाड़ा कानपुर की सदर तहसील में हुआ. शादी अनुदान के नाम पर मिलने वाले 20 हजार रुपये और पारिवारिक लाभ योजना के तहत मिलने वाले 30 हजार रुपये पाने के लिए अपात्रों को अफसर और कर्मचारियों ने पात्र बता दिया. 

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जांच अफसरों की कमेटी में खुलासा
51 अफसरों की जांच कमेटी में खुलासा हुआ है कि 1076 शादी अनुदान और 1444 पारिवारिक लाभ योजना में फर्जी लाभार्थी पाए गए हैं. अफसरों और कर्मचारियों ने अपात्रों को पात्र बना दिया. जांच में सामने आया कि बिना शादी हुए ही शादी अनुदान दिया गया. परिवार में किसी की मौत नहीं हुई और बिना मौत के पारिवारिक लाभ मिला. जांच में कई लाभार्थियों के नाम पते भी गलत निकले हैं.

सदर तहसील में सबसे बड़ा फर्जीवाड़ा 
शादी अनुदान और पारिवारिक लाभ योजना में सबसे बड़ा फर्जीवाड़ा सदर तहसील में किया गया. जांच में यह भी पता चला है कि एसडीएम की लॉगिन से फर्जी रिपोर्ट भेजी गई. कई लोगों को बगैर शादी के ही 20 हजार का अनुदान दे दिया गया.

दरअसल जिलाधिकारी कानपुर ने एडीएम आपूर्ति बसंत लाल सीटीओ यशवंत सिंह और पीडी डीआरडीए केके पांडे को जांच कमेटी में शामिल किया था. पड़ताल के पश्चात जांच रिपोर्ट में लाभार्थियों ने आय और जाति प्रमाण पत्र तक फर्जी लगाए. सदर तहसील के 2 साल और अन्य तहसीलों के 1 साल के दस्तावेजों को जब खंगाला गया तो सबसे ज्यादा गड़बड़ी शहरी क्षेत्र में ही मिली है.

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ये हैं योजना के लाभ
पारिवारिक लाभ योजना के तहत जिनके परिवार के किसी कमाने वाले सदस्य की मौत हो जाती है तो उनके आश्रित को 30 हजार रुपये दिए जाते हैं. इसी तरह किसी गरीब की बेटी की शादी के लिए सरकार 20 हजार रुपये की वित्तीय मदद देती है.

योजना का लाभ उठाने के लिए आवेदनकर्ता योग्य है या नहीं, इसके सत्यापन की जिम्मेदारी लेखपाल और कानूनगो की होती है. उनकी सत्यापन रिपोर्ट के आधार पर ही एसडीएम संबंधित पिछड़ा वर्ग कल्याण अधिकारी, समाज कल्याण अधिकारी या फिर अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी को अनुदान देने के लिए फाइल आगे भेजते हैं.

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