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क‍िडनी रैकेट: आरोपी डॉक्‍टर की गि‍रफ्तारी के बाद पुल‍िस ने दिया वीआईपी ट्रीटमेंट

कानपुर पुलिस ने डा. शुक्ला को गिरफ्तार तो किया लेकिन पुलिस ने उसे जो वीआईपी ट्रीटमेंट दिया, वह हैरान करने वाला रहा.

क‍िडनी रैकेट: आरोपी डॉक्‍टर की गि‍रफ्तारी के बाद पुल‍िस ने दिया वीआईपी ट्रीटमेंट

राजेश अग्रवाल, कानपुर: दिल्ली के पीएसआरआई अस्पताल के सीईओ डा. दीपक शुक्ला को किडनी रैकेट में सहभागी होने के जुर्म में आखिरकार कानपुर में गिरफ्तार कर लिया गया. स्पेशल इन्वेस्टीगेशन टीम को उसके खिलाफ मानव अंगों के अवैध कारोबार को संरक्षण देने के पुख्ता सबूत हाथ लगे हैं. कानपुर पुलिस ने डा. शुक्ला को गिरफ्तार तो किया लेकिन पुलिस ने उसे जो वीआईपी ट्रीटमेंट दिया, वह हैरान करने वाला रहा. मीडिया के सामने वह जिस तरह पुलिस अधिकारी के साथ एसयूीव गाड़ी में पिछली सीट पर बि‍ठाकर लाये गये, वह कई सवाल भी खड़े कर रहा था.

डॉ. दीपक शुक्ला को पीड़ितों को डोनरों के कलमबन्द बयान और दस्तावेजी सबूतों के आधार पर गिरफ्तार किया गया है. पुलिस ने अपनी तफ्तीश में पाया कि पीएसआरआई अस्पताल का स्टाफ बिचैलियों के माध्यम से किडनी बेचने और खरीदने वालों के बीच फर्जी अभिलेखों के माध्यम से रक्त सम्बन्ध स्थापित करते थे. अस्पताल के लैब में ब्लड सैम्पल बदलकर डीएनए मैच करा दिया जाता था. इस टेस्ट की रिपोर्ट का अनुमोदन करने के लिये कानून ने सात सदस्यीय प्राधिकार समिति के गठन का प्रावधान रखा हुआ है. पीएसआरआई की प्राधिकार समिति के चेयरमैन दीपक शुक्ला थे इसलिये पुलिस मानती है कि किडनी खरीदने बेचने का धन्धा शुक्ला की सहमति के बिना नहीं चल सकता था. इस प्राधिकार समिति में केन्द्र सरकार का नामित सदस्य भी होता है इसलिये पुलिस अब इस सदस्य के विरूद्ध भी साक्ष्य जुटाने की कोशिश कर रही है.

पुलिस तफ्तीश में एक विदेशी एजेंट का नाम भी सामने आ रहा है, यदि वह पुलिस के हत्थे चढ़ गया तो इस बात का खुलासा भी हो सकता है कि पड़ोसी गरीब मुल्कों से भी पैसों के जरूरतमन्दों को फंसा कर भारत लाया जाता था और उनकी किडनी और लीवर निकाला जाता था. पीएसआरआई में हर साल लगभग 60 से 70 किडनी और लीवर ट्रांसप्‍लांट का रिकार्ड पुलिस को मिला है. पुलिस ने अपनी शुरूआती जांच में जिन चार सैम्पल केस की पड़ताल की तो सभी में डोनर फर्जी मिले, जिन्होंने तीन लाख रुपए तक में अपनी किडनी बेची थी.

सेलर के हाथ तो कुछ लाख लगते थे, लेकिन अस्पताल स्टाफ और बिचैलियों की चांदी थी. वे रिसीवर की हैसियत और जरूरत देखकर दाम वसूलते थे. उत्तर प्रदेश के इस अमीर कारोबारी को एक करोड़ में लीवर बेचे जाने के सबूत पुलिस के हाथ लगे हैं. पीएसआरआई की कोआर्डिनेटर सुनीता वर्मा और मिथुन ने अपनी गिरफ्तारी से बचने के लिए हाईकोर्ट से स्थगनादेश ले रखा है, लेकिन शुक्ला से मिले साक्ष्यों के आधार पर इस स्टे को खारिज कराने के लिये अब पुलिस कोर्ट में अपील करेगी.

दीपक शुक्ला कानपुर की कोर्ट में पेश किया जाएगा. उधर पुलिस लाईन में आयोजित प्रेस काफ्रेंस में दीपक शुक्ला को पूरे वीआईपी रुतबे के साथ मीडिया के सामने लाया गया. उन्होने अपनी सफाई में कहा कि प्राधिकार समिति के सामने जो अभिलेख प्रस्तुत किये जाते थे, वे परीक्षण के दौरान कतई फर्जी प्रतीत नहीं होते थे, इसलिये वे खुद को अपराधी नहीं मानते.  पुलिस के पास चारों डोनरों को सरकारी गवाह बना चुकी है, इसलिये वो अपना पक्ष मजबूत मान रही है. इसके अलावा अपोलो और फोर्टिस को भी पुलिस ने अभी क्लीन चिट नहीं दी है और वहाॅ के रिकार्ड्स की छानबीन जारी है.