कोरोना महामारी में मुस्लिम शिक्षक ने पढ़ाया इंसानियत का पाठ, CM राहत कोष में आजीवन दान देंगे 1 हजार रुपये

ललितपुर जिले के एक मुस्लिम शिक्षक ने आजीवन अपनी तनख्वाह, रिटायरमेंट के बाद मिलने वाली पेंशन और मृत्यु के बाद उनकी पत्नी को मिलने वाली पेंशन में से हर महीने आजीवन एक हजार रुपये मुख्यमंत्री राहत कोष में जमा करने का फैसला किया है.

कोरोना महामारी में मुस्लिम शिक्षक ने पढ़ाया इंसानियत का पाठ, CM राहत कोष में आजीवन दान देंगे 1 हजार रुपये
शिक्षक मोहम्मद रफीक.

अमित सोनी/ललितपुर: देश मे कोरोना संक्रमण लगातार अपने पैर पसार रहा है. इसकी चपेट में आने वाले लोग काफी परेशान हैं. महामारी के बढ़ते प्रभाव को देखते हुये सरकार आम लोगों की समस्याओं और परेशानियों को दूर करने में जुटी हुई है. साथ ही साथ ऐसी विषम परिस्थितियों में बहुत सी समाजसेवी संस्थायें भी देश के आम लोगों की सेवा करने के लिये आगे आकर काम कर रही हैं. 

सीएम राहत कोष में हर महीने दान देंगे एक हजार रुपये
आम जनमानस और देश को संकट की स्थिति में देखते हुये ललितपुर जिले के एक मुस्लिम शिक्षक ने आजीवन अपनी तनख्वाह, रिटायरमेंट के बाद मिलने वाली पेंशन और मृत्यु पूर्व भी उनकी पत्नी को मिलने वाली पेंशन में से हर महीने आजीवन एक हजार रुपये मुख्यमंत्री राहत कोष में जमा करने का फैसला किया है. जिसको लेकर शिक्षक मोहम्मद रफीक ने सभी कागजी कार्रवाई भी कर दी हैं.

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ललितपुर जिले के सदर तहसील अंतर्गत चौबयाना मोहल्ले में रहने वाले मोहम्मद रफीक एक सरकारी शिक्षक हैं. जो प्राथमिक विद्यालय पडराई में प्रधानाचार्य पद पर कार्यरत हैं. उनका कहना है कि देश हित मे और इन परिस्थितियों को देखते हुये हर उस नागरिक को आगे आकर सरकार की मदद करनी चाहिये जो सक्षम हैं. सभी देशवासियों को आगे आकर अपने लोगों की हर सम्भव मदद करने की जरूरत है. सरकार तो अपना कार्य कर ही रही है. लेकिन सिर्फ यह जिम्मेदारी सरकार की नही है. आज हम सभी की यह जिम्मेदारी है कि आगे आकर लोगों की मदद करें जिस तरह से हो मदद जरूर करें. 

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उन्होंने कहा कि इसीलिये मैंने एक छोटी सी धनराशि आजीवन मुख्यमंत्री कोष में जमा करने का फैसला किया है जो मेरे मरने के बाद भी मेरी पत्नी को मिलने वाली पेंशन से भी दी जाती रहेगी. मोहम्मद रफीक जैसे शिक्षक आज उन सभी लोगों के लिये एक प्रेरणा हैं ,जो देश हित मे काम करने की जगह सिर्फ सोशल मीडिया पर बड़ी-बड़ी बातें लिखकर प्रशासनिक व्यवस्थाओं में कमियां निकालने का कार्य करते हुये नजर आते हैं. 

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