close

खास खबरें सिर्फ आपके लिए...हम खासतौर से आपके लिए कुछ चुनिंदा खबरें लाए हैं. इन्हें सीधे अपने मेलबाक्स में प्राप्त करें.

UP के इस गांव ने PM मोदी के 'डिजिटल सपने' को किया साकार, फोन में हर समस्या का हल

इस गांव की जनसंख्या 2165 के आसपास है. लतीफपुर गांव को उत्तर प्रदेश के पहले डिजिटल गांव का दर्जा मिला है. जिले में ई स्पर्श योजना पाने वाला यह पहला गांव बना है. 

UP के इस गांव ने PM मोदी के 'डिजिटल सपने' को किया साकार, फोन में हर समस्या का हल

लखनऊ: लखनऊ के मलिहाबाद तहसील का लतीफपुर ग्राम पंचायत प्रधानमंत्री के डिजिटल इंडिया के सपने को साकार कर रहा है. इस गांव में फ्री WiFi, डोरस्टेप बैंकिंग सिस्टम जैसी सुविधाएं हैं. इसके अलावा गांव का एक व्हाट्सएप ग्रुप भी है, जिसके द्वारा लोगों की परेशानी सीधा अधिकारियों तक पहुंचाई जाती है. इस ग्रुप में लोग शिक्षा, स्वास्थ्य और अन्य तरह की समस्याओं को डालते हैं, संबंधित विभाग और अधिकारी उसका निस्तारण करते हैं. गांव वाले मिलकर एक मोबाइल एप्लीकेशन भी तैयार कर रहे हैं. इस एप की मदद से गांववालों को और आसानी होगी. इस एप की मदद से गांववालें सरकार की तमाम योजनाओं और योजनाओं को पाने के तरीकों के बारे में जान पाएंगे. इस काम का पूरा श्रेय युवा प्रधान श्वेता सिंह को जाता. श्वेता सिंह कंप्यूटर एप्लीकेशन में मास्टर्स की डिग्री ले चुकी हैं. सरकार ने भी उन्हें लक्ष्मीबाई अवॉर्ड देकर सम्मानित किया है.

बता दें, इस गांव की जनसंख्या 2165 के आसपास है. लतीफपुर गांव को उत्तर प्रदेश के पहले डिजिटल गांव का दर्जा मिला है. जिले में ई स्पर्श योजना पाने वाला यह पहला गांव बना है. सभी काम डिजिटल होने की वजह से गांव के 1600 परिवारों में सभी पात्रों को पेंशन मिलती है. 100 फीसद लोगों के पास राशन कार्ड, गैस कनेक्शन जैसी सुविधाएं हैं.

अगर, ग्रामीणों को किसी तरह की समस्या होती है तो वे ऑनलाइन इसकी शिकायत दर्ज करा सकते हैं. गांव में डोरस्टेप बैंकिंग की सुविधा है जिसमें बैंक कर्मचारी खुद घर पहुंचते हैं. पंचायत भवन के पास ही नए थाने के लिए भी जगह दी गई है.

प्रधान श्वेता सिंह बताती हैं कि जब 2008 में उनकी शादी हुई तो वह इस गांव में अपने पति के घर पहुंची. लेकिन, गांव की स्थिति को देखकर वह काफी निराश हुईं और उन्होंने यह सोचा क्यों न जो उन्होंने पढ़ाई की है उसका इस्तेमाल इस गांव के विकास के काम में किया जाए. उनका जज्बा देख पेशे से व्यपारी पति अखिलेश सिंह ने भी उनका साथ दिया. गांव के लोग भी श्वेता की कही हुई बातों का पूरी तरीके से अपने जीवन में अमल करते हैं. श्वेता ने गांव के लोगों को अपने हक को अपने मुट्ठी में करना सिखाया. 2015 के प्रधान चुनाव में उन्हें उम्मीदवार बनाया. श्वेता पढ़ाई छोड़ने के बाद से ही गांव में सक्रिय थीं. अवसर मुखिया चुनने का आया तो वह लोगों की पहली पसंद बन गईं. रिकॉर्ड मतों से जीतकर कम उम्र की महिला प्रधान बनीं.