अच्छी खबर: यूपी में ब्राजील मॉडल से लगेगी बाल मजदूरी पर लगाम

इस मॉडल को पहले चरण में कानपुर, लखनऊ, आगरा, बरेली, गाजियाबाद, मुरादाबाद, बदायूं, बाराबंकी, बलिया, श्रावस्ती, गोंडा, बलरामपुर, बहराइच, गाजीपुर, जौनपुर, वाराणसी, मिर्जापुर, सोनभद्र, गोरखपुर, इलाहाबाद में लागू किया जाएगा.

अच्छी खबर: यूपी में ब्राजील मॉडल से लगेगी बाल मजदूरी पर लगाम
फाइल फोटो.

लखनऊ: उत्तर प्रदेश में सूबे में बालश्रम पर लगाम लगाने के लिए अब ब्राजील मॉडल अपनाया जाएगा. इस मॉडल के तहत ऐसे बाल श्रमिकों को चिह्नित किया जाएगा, जिनके ऊपर बाल मजदूरी कर परिवार चलाने की जिम्मेदारी है. ऐसे बाल श्रमिकों का भी पता लगाया जाएगा जिनके माता-पिता कुछ करने की स्थिति में नहीं हैं. इन बाल श्रमिकों को विद्या योजना से जोड़कर आर्थिक सहायता के साथ ही उनकी पढ़ाई की भी व्यवस्था की जाएगी. श्रम विभाग ने पहले चरण में 20 जिलों में इस कार्ययोजना को लागू कर दिया है.

योजना के तहत क्यो होगा?
श्रम विभाग के सर्वे में ऐसे 19.27 लाख बाल श्रमिकों की पहचान की है. सरकार उनकी बाल मजदूरी छुड़वा कर लड़के को 1 हजार और लड़की को 12 सौ रुपए की आर्थिक सहायता हर महीने देगी. इसके साथ ही विद्या योजना से जोड़कर उनको स्कूल में दाखिला दिलाया जाएगा. वहीं होनहार बच्चे की पहचान के लिए मानिटरिंग कमेटी भी बनाई जाएगी. ये कमेटी होनहार बच्चों पर विशेष नजर रख कर उन्हें आगे पढ़ाने के लिए प्रोत्साहित करेगी. साथ ही आगे की पढ़ाई पर भी ध्यान देगी.  ब्राजील मॉडल को पहले बीस जिलों में लागू किया जा रहा है. कुछ जिलों में अभियान शुरू भी हो गया है. ब्राजील में इस मुहिम के जरिए बाल श्रम पर काफी हद तक लगाम लगाने में कामयाबी हासिल हुई थी.

क्या है ब्राजील मॉडल?
सरकार की लाख कोशिशों के बावजूद भी जब बाल मजदूरी पर रोक नहीं लगी, तो ब्राजील मॉडल को अपनाने का फैसला किया गया. इस मॉडल के तहत असहाय माता-पिता, विकलांग माता-पिता, बीमार माता-पिता, दोनों या एक की मौत पर जो बच्चे बाल मजदूरी करते हैं, उनकी पहचान की जाती है. फिर उनकी बाल मजदूरी छुड़वा कर उनको आर्थिक सहायता भी मुहैया कराई जाती है.

इन जिलों में लागू होगा मॉडल
इस मॉडल को पहले चरण में कानपुर, लखनऊ, आगरा, बरेली, गाजियाबाद, मुरादाबाद, बदायूं, बाराबंकी, बलिया, श्रावस्ती, गोंडा, बलरामपुर, बहराइच, गाजीपुर, जौनपुर, वाराणसी, मिर्जापुर, सोनभद्र, गोरखपुर, इलाहाबाद में लागू किया जाएगा.

किन-किन रूपों में होता है बाल श्रम ?

  • वे बच्चे जो कारखानों, कार्यशालाओं, प्रतिष्ठानों, खानों और घरेलू श्रम जैसे सेवा क्षेत्र में मजदूरी या बिना मजदूरी काम करते हैं.
  • गली-मोहल्ले के बच्चे, कूड़ा बीनने वाले, अखबार और फेरी लगाने वाले और भीख मांगने वाले बच्चे.
  • बंधुआ बच्चे: वे बच्चे जिन्हें या तो उनके माता-पिता ने पैसों की खातिर गिरवी रखा है, या जो कर्ज चुकाने के चलने मजबूरन काम कर रहे हैं.
  • वर्किंग चिल्ड्रन:  वे बच्चे जो कृषि में और घर-गृहस्थी के काम में पारिवारिक श्रम का हिस्सा हैं.

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